नीरज विवाद में अनंत को लेकर ललन सिंह ने क्या कहा और मामला कहां पहुंचा

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आलोक सिंह
आलोक सिंह

बिहार की सियासत में जनता दल (यूनाइटेड) यानी JDU के भीतर मची अंदरूनी खींचतान एक बार फिर चर्चा का विषय बन गई है। मामला बाहुबली नेता अनंत सिंह (Anant Singh) से जुड़ा है, लेकिन इसके बहाने पार्टी के भीतर नेतृत्व और फैसले लेने की ताकत को लेकर कई बड़े सवाल खड़े हो गए हैं। इस पूरे घटनाक्रम के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या अनंत सिंह और केंद्रीय मंत्री ललन सिंह (Lalan Singh) की जोड़ी के सामने जेडीयू ने हथियार डाल दिए हैं?

ललन सिंह का बयान: पार्टी से बगावत पर भी कोई कार्रवाई नहीं?

5 अक्टूबर को जेडीयू सांसद और केंद्रीय मंत्री ललन सिंह ने अनंत सिंह से जुड़े विवाद को लेकर एक अहम बयान दिया। उन्होंने कहा कि उन्होंने अनंत सिंह को समझाया है कि वे पार्टी के मामलों पर सार्वजनिक तौर पर मीडिया में बयानबाजी से बचें, और अनंत सिंह इसके लिए मान गए हैं।

इस बयान के बड़े सियासी मायने निकाले जा रहे हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि एमएलसी चुनाव में पार्टी लाइन से हटकर काम करने के बावजूद अनंत सिंह के खिलाफ कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं होगी। इसका सीधा मतलब यह भी निकाला जा रहा है कि अनंत सिंह को पार्टी की ओर से जन सुराज का समर्थन या अपने करीबी का प्रचार करने की खुली छूट मिल गई है, बशर्ते वे मीडिया में चुप रहें।

ललन सिंह ने प्रदेश नेतृत्व को क्यों ठहराया जिम्मेदार?

अपने बयान में ललन सिंह ने पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री नीरज कुमार (Neeraj Kumar) का नाम लिए बिना कहा कि जब अनंत सिंह चुनाव लड़ रहे थे, तब नीरज कुमार ने उनका विरोध किया था, लेकिन उस समय उन पर कार्रवाई नहीं हुई। ललन सिंह ने इसे ‘प्रदेश नेतृत्व की गलती’ बताया।

अब सवाल यह उठ रहा है कि ललन सिंह ने इसके लिए राष्ट्रीय नेतृत्व (नीतीश कुमार) की जगह प्रदेश नेतृत्व का जिक्र क्यों किया? विधानसभा चुनाव के दौरान संजय झा प्रदेश जेडीयू का नेतृत्व कर रहे थे और टिकट बंटवारे से लेकर संगठन तक उनकी ही नजर थी। ऐसे में माना जा रहा है कि प्रदेश नेतृत्व को कटघरे में खड़ा कर ललन सिंह ने इशारों-इशारों में मौजूदा कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा पर निशाना साधा है।

नीतीश कुमार की ‘हरी झंडी’ के बाद आया बयान?

5 अक्टूबर को मीडिया में बयान देने से ठीक पहले ललन सिंह ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के साथ करीब 20 मिनट तक बैठक की थी। कयास लगाए जा रहे हैं कि इस बैठक में अनंत सिंह से हुई बातचीत का जिक्र हुआ होगा। इस मुलाकात के बाद ही ललन सिंह ने यह साफ किया कि अनंत सिंह के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होगी। इससे साफ है कि ललन सिंह को इस मामले को अपने तरीके से हैंडल करने की नीतीश कुमार की ओर से ‘हरी झंडी’ मिल चुकी है।

संजय झा और विजय चौधरी की ‘चुप्पी’ के क्या हैं मायने?

6 अक्टूबर को जेडीयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा और डिप्टी सीएम विजय चौधरी की प्रतिक्रियाएं भी सामने आईं। संजय झा ने ललन सिंह के बयान पर बेहद संक्षिप्त प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि “ललन सिंह ने पार्टी के हित में काम किया है और इसके लिए उन्हें धन्यवाद दिया जाना चाहिए।” इतना कहकर वे निकल गए।

वहीं, विजय चौधरी ने भी इस मुद्दे पर सीधा जवाब देने के बजाय गोलमोल तरीके से बात टाल दी। जेडीयू के इन बड़े नेताओं के रुख को देखकर यह सवाल और गहरा गया है कि क्या संजय झा समेत पार्टी का शीर्ष नेतृत्व अब इस मुद्दे पर अनंत सिंह और ललन सिंह की जोड़ी से टकराव टाल रहा है? फिलहाल, बिहार की सियासत और जेडीयू के अंदरूनी गलियारों में यही सवाल गूंज रहा है।