संसद स्पीकर गालिबाफ ने ट्रंप और पश्चिमी देशों की नीतियों पर साधा निशाना

iran
सैयद सरवर हुसैन - कंट्री हेड- ईरान
सैयद सरवर हुसैन – कंट्री हेड- ईरान

ईरान के शीर्ष सांसद और संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाकर कलीबाफ (Mohammad Baqer Qalibaf) ने पश्चिमी देशों (विशेषकर यूरोप और अमेरिका) में हो रहे विरोध प्रदर्शनों को लेकर एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने प्रदर्शनकारियों से अपील की है कि वे अपनी पहचान की राजनीति (Identity Politics) को लेकर बंटे नहीं, बल्कि सरकारों की जवाबदेही तय करने पर फोकस करें।

कलीबाफ ने एक बड़ा दावा करते हुए जेफरी एपस्टीन (Jeffrey Epstein) स्कैंडल, गाजा के हालात, ईरान पर युद्ध के प्रयासों और वैश्विक भ्रष्टाचार को एक ही “शीर्ष कैबाल” (Top Cabal – एक गुप्त राजनीतिक गुट) से जोड़ा है।

‘जवाबदेही से बचने के लिए भटकाया जा रहा है ध्यान’

शुक्रवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर एक पोस्ट में, कलीबाफ ने पश्चिमी सरकारों द्वारा जनता के असंतोष को दबाने या दिशा मोड़ने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले तरीके (Playbook) का जिक्र किया।

उन्होंने लिखा, “वे विरोध को ‘वर्टिकल से हॉरिजॉन्टल’ (ऊपर से नीचे के बजाय आपस में) की ओर ले जाते हैं और फिर लोगों को जागरूक होने के लिए शर्मिंदा करते हैं। डटे रहें!” कलीबाफ ने कहा कि यह बहस कि कौन ‘मूल निवासी’ (Native) है और कौन ‘गैर-मूल निवासी’, महज़ एक ‘शोर’ (Noise) है, जिसका उद्देश्य जनता का ध्यान असली मुद्दों से भटकाना है। उन्होंने आगे कहा, “उन्हें (सरकारों को) जवाबदेही से बचने के लिए विषय बदलने मत दें।”

यूरोप और अमेरिका में क्यों हो रहे हैं प्रदर्शन?

कलीबाफ की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब फ्रांस समेत कई यूरोपीय देशों और अमेरिका में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं।

  • फ्रांस: यहां बढ़ती महंगाई, ईंधन की कीमतों और सार्वजनिक सेवाओं की गिरती स्थिति को लेकर प्रदर्शन हो रहे हैं। ट्रेड यूनियन और ‘येलो वेस्ट’ (Yellow Vest) आंदोलन के समर्थक भी इन प्रदर्शनों में शामिल हो गए हैं।

  • अन्य यूरोपीय देश: इटली (Milan), स्पेन, पुर्तगाल, अल्बानिया और बेल्जियम में भी आवास की कमी, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार और शिक्षा के गिरते स्तर को लेकर जनता सड़कों पर है।

  • अमेरिका: अमेरिका में भी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) की नीतियों, विशेषकर आप्रवासन (Immigration) और उनके राष्ट्रपति अधिकारों के विस्तार के खिलाफ “नो किंग्स” (No Kings) जैसे राष्ट्रव्यापी विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं।

ट्रंप और मैक्रों की बयानबाजी

इन प्रदर्शनों पर वैश्विक नेताओं के बीच भी जुबानी जंग तेज हो गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फ्रांस के प्रदर्शनों को “पूर्ण क्रांति” (Full on revolution) करार देते हुए इसका मुख्य कारण ‘इमिग्रेशन’ (आप्रवासन) को बताया। ट्रंप ने कहा, “अगर आप इमिग्रेशन की समस्या को नहीं रोकते, तो आपके पास कोई देश नहीं बचेगा।”

वहीं, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों (Emmanuel Macron) ने कतर दौरे के दौरान ट्रंप और अन्य विदेशी नेताओं की आलोचना की। मैक्रों ने विदेशी नेताओं पर अपने राजनीतिक लाभ के लिए फ्रांस की घरेलू समस्याओं का फायदा उठाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि प्रदर्शनों को लेकर गलत सूचनाएं फैलाई जा रही हैं और इस तरह की टिप्पणियां “मूर्खतापूर्ण” (Stupid) और अस्वीकार्य हैं।