जानिए होर्मुज में तनाव के बीच संयुक्त राष्ट्र में ईरान ने क्या आरोप लगाए

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सैयद सरवर हुसैन - कंट्री हेड- ईरान
सैयद सरवर हुसैन – कंट्री हेड- ईरान

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की बैठक में समुद्री सुरक्षा के मुद्दे पर ईरान ने अमेरिका और इजरायल पर तीखा हमला बोला है। संयुक्त राष्ट्र में ईरान के प्रतिनिधि गुलामहुसैन दरजी ने आरोप लगाया कि फारस की खाड़ी और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में जारी समुद्री असुरक्षा के असली कारण अमेरिका और इजरायल की सैन्य आक्रामकता और अवैध नौसैनिक नाकाबंदी हैं। उन्होंने पश्चिमी देशों के उन दावों को सिरे से खारिज कर दिया, जिनमें तेहरान को इस जलमार्ग पर पैदा हो रहे व्यवधानों के लिए जिम्मेदार ठहराया जा रहा है।

‘अमेरिका और इजरायल हैं क्षेत्रीय अशांति की जड़’

समुद्री सुरक्षा पर आयोजित सुरक्षा परिषद की बैठक को संबोधित करते हुए ईरानी दूत ने कहा कि कुछ पश्चिमी वक्ता मौजूदा स्थिति के मूल कारणों को नजरअंदाज कर रहे हैं। उनके मुताबिक, समुद्री नेविगेशन में किसी भी तरह की रुकावट या हस्तक्षेप की पूरी जिम्मेदारी उन आक्रामकों पर है, जिन्होंने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की है।

ईरानी प्रतिनिधि ने दावा किया कि होर्मुज जलडमरूमध्य 28 फरवरी 2026 तक पूरी तरह सुरक्षित और खुला हुआ था। उनके अनुसार, इसके बाद अमेरिका और इजरायल ने ईरान के खिलाफ युद्ध छेड़ दिया और देश के नागरिक तथा समुद्री बुनियादी ढांचे, बंदरगाहों और जहाजों को जानबूझकर निशाना बनाया।

ईरानी जहाजों पर हमलों और नाकाबंदी के आरोप

ईरानी प्रतिनिधि ने अमेरिकी सैन्य अभियानों का हवाला देते हुए कई तारीखों का जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि 19 अप्रैल 2026 को अमेरिकी सेना ने ईरानी कमर्शियल वेसल ‘तुस्का’ पर हमला किया था। इसके बाद 23 मई को अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने नाकाबंदी लागू करने के लिए 100 कमर्शियल जहाजों का रुख मोड़ने की बात कही थी।

इसके अलावा, 23 जुलाई को ईरानी जलसीमा के भीतर मानवीय अभियान में जुटे दो सर्च एंड रेस्क्यू जहाजों—’नाजी 15′ और ‘नाजी 16’—पर अमेरिकी बलों द्वारा हमला किए जाने का भी आरोप लगाया गया। ईरानी दूत ने यह भी कहा कि 12 अप्रैल 2026 से अमेरिकी सेना ईरानी बंदरगाहों पर आने-जाने वाले सभी समुद्री ट्रैफिक पर पूर्ण नाकाबंदी बनाए हुए है।

‘यूएन चार्टर और संप्रभुता का खुला उल्लंघन’

ईरानी प्रतिनिधि ने अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी को देश की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का ‘फ्लग्रेंट वॉयलेशन’ (खुला उल्लंघन) बताया। उन्होंने इसे संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 2(4) का गंभीर उल्लंघन करार दिया, जो किसी भी देश की राजनीतिक स्वतंत्रता के खिलाफ बल प्रयोग पर रोक लगाता है।

मानवीय संकट का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि अमेरिकी नाकाबंदी के कारण नागरिकों के लिए भोजन, दवा, ईंधन और अन्य जरूरी सामान की आपूर्ति खतरे में पड़ गई है, जो सामूहिक सजा के समान है।

कानूनी विकल्पों के इस्तेमाल की चेतावनी

ईरान ने स्पष्ट किया है कि होर्मुज जलडमरूमध्य में उसके द्वारा उठाए गए सुरक्षा कदम पूरी तरह से रक्षात्मक और कानूनी रूप से वैध हैं। ईरानी दूत ने कहा कि एक तटीय देश के रूप में तेहरान को अपनी संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता और राष्ट्रीय हितों की रक्षा करने का पूरा अधिकार है।

उन्होंने सुरक्षा परिषद से अपनी चुप्पी तोड़ने और अमेरिका को तत्काल अपनी गैरकानूनी गतिविधियां रोकने का निर्देश देने की मांग की। ईरान ने यह भी कहा कि वह अंतरराष्ट्रीय कानून के गंभीर उल्लंघनों और नागरिकों को हुए नुकसान के लिए जिम्मेदार पक्षों को जवाबदेह ठहराने के वास्ते सभी उपलब्ध कानूनी रास्ते अपनाएगा।