पाकिस्तान में हिंदू आबादी 14.6% से 1.7% कैसे हुई? ब्रिटेन में रिपोर्ट पेश

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अजमल शाह
अजमल शाह

ब्रिटिश संसद में पेश की गई एक नई रिपोर्ट ने पाकिस्तान में हिंदुओं की घटती आबादी और उनके ‘सुनियोजित उत्पीड़न’ की चौंकाने वाली तस्वीर पेश की है। ब्रिटेन स्थित प्रवासी संगठन ‘INSIGHT UK’ द्वारा पेश की गई इस रिपोर्ट का नाम ‘पाकिस्तान में हिंदुओं का धार्मिक उत्पीड़न’ है। यह रिपोर्ट ब्रिटिश हिंदुओं के लिए संसदीय समूह (APPG) के सामने रखी गई है, जिसमें ऐतिहासिक दस्तावेजों और आज की गवाहियों के जरिए बताया गया है कि कैसे पाकिस्तान में हिंदुओं को संपत्ति से बेदखल किया गया और हाशिए पर धकेल दिया गया।

आंकड़ों में चौंकाने वाली गिरावट

रिपोर्ट के अनुसार, 1941 में ब्रिटिश सरकार के जनगणना आयुक्त एम. डब्ल्यू. एम. येट्स द्वारा कराई गई जनगणना में (जो इलाका आज पश्चिमी पाकिस्तान है) हिंदुओं की आबादी 14.6 प्रतिशत थी। लेकिन 79 साल बाद आज यह आंकड़ा 2 प्रतिशत से भी कम (लगभग 1.7 प्रतिशत) रह गया है। रिपोर्ट इस गिरावट का हवाला देकर पाकिस्तान के उन दावों पर सवाल उठाती है, जिनमें वह अल्पसंख्यकों की सुरक्षा का दम भरता है।

आखिर क्यों घटी हिंदुओं की आबादी? 6 बड़े कारण

रिपोर्ट में इस भारी गिरावट के पीछे 6 परतों वाले ‘सुनियोजित उत्पीड़न’ का जिक्र किया गया है:

  1. बंटवारे की हिंसा और विस्थापन: 1947 के दंगों और फिर 1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान हजारों हिंदू परिवारों को विस्थापित होना पड़ा।

  2. ‘शत्रु संपत्ति’ कानूनों से लूट: भागने या विस्थापित होने वाले हिंदुओं की पुश्तैनी जमीनें और संपत्तियां ‘एनिमी प्रॉपर्टी लॉ’ (शत्रु संपत्ति कानून) के तहत सरकार ने जब्त कर लीं, जिससे समुदाय गरीबी में धकेल दिया गया।

  3. जबरन धर्मांतरण और अपहरण: रिपोर्ट का सबसे भयावह पहलू महिलाओं की दुर्दशा है। आकलन है कि हर साल 1000 से ज्यादा हिंदू और ईसाई लड़कियों (ज्यादातर नाबालिग) का अपहरण कर उनका जबरन धर्म परिवर्तन और निकाह कराया जाता है।

  4. संवैधानिक भेदभाव: पाकिस्तान के संविधान (अनुच्छेद 41 और 91) के अनुसार केवल एक मुस्लिम ही राष्ट्रपति या प्रधानमंत्री बन सकता है। इसे बदलने का 2019 का प्रयास भी विफल रहा।

  5. धार्मिक आजादी का हनन: पाकिस्तानी नागरिकों को पासपोर्ट पर अपना धर्म बताना अनिवार्य है। रिपोर्ट हैरानी जताती है कि राजधानी इस्लामाबाद में हिंदुओं के लिए एक भी चालू मंदिर नहीं है। 2020 में अनुमति मिलने के बावजूद इस्लामी समूहों के हिंसक विरोध के कारण मंदिर निर्माण रोक दिया गया।

  6. सामाजिक-आर्थिक बहिष्कार: इन सभी वजहों के संयुक्त प्रभाव ने हिंदू समुदाय को लगातार सामाजिक और आर्थिक रूप से हाशिए पर धकेल दिया।

UK सरकार से 5 प्रमुख मांगें

INSIGHT UK ने अपनी रिपोर्ट में ब्रिटेन सरकार से ठोस कदम उठाने की मांग की है:

  • UK-पाकिस्तान के बीच होने वाली बातचीत में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को ‘अनिवार्य शर्त’ बनाया जाए।

  • पाकिस्तान को दी जाने वाली ब्रिटिश आर्थिक सहायता को मानवाधिकारों में सुधार से जोड़ा जाए।

  • इस्लामाबाद स्थित ब्रिटिश उच्चायोग में अल्पसंख्यक समुदायों के दो प्रतिनिधियों की नियुक्ति हो, ताकि जमीनी हकीकत सामने आ सके।

  • हिंदू, ईसाई और सिख जैसे अल्पसंख्यकों की स्थिति पर हर 6 महीने में आधिकारिक रिपोर्ट जारी की जाए।

  • धार्मिक उत्पीड़न और जबरन धर्मांतरण के शिकार लोगों के लिए ब्रिटेन में शरण के सुरक्षित रास्ते बनाए जाएं।