हूती का सऊदी अरब पर हमला: 7 बड़े कारण और क्षेत्र में युद्ध का खतरा

यमन के हूती विद्रोही (Houthi Rebels) लगातार सऊदी अरब के हवाई अड्डों, तेल प्रतिष्ठानों और प्रमुख शहरों को निशाना बना रहे हैं। यह सवाल अब और भी गंभीर हो गया है कि व्यापक क्षेत्रीय युद्ध (Regional War) के खतरे के बावजूद हूती इन हमलों को तेज क्यों कर रहे हैं?
रविवार को हूती बलों ने दक्षिणी सऊदी अरब में व्यापक हमले किए, जिससे कई शहरों में सुरक्षा अलर्ट जारी करना पड़ा। समाचार एजेंसी एएफपी (AFP) के मुताबिक, सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने कम से कम 10 बैलिस्टिक मिसाइलों को इंटरसेप्ट किया है। खमीस मुशैत में भारी विस्फोटों की आवाज सुनी गई, जबकि आभा, ताइफ, नमास और जाज़ान में चेतावनियां जारी की गईं। इसके अलावा, राजधानी रियाद में भी तीन धमाके सुने गए, जहां अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा हालिया घातक हमलों के बाद सीमित परिचालन फिर से शुरू करने की तैयारी कर रहा था।
यह टकराव सिर्फ हवाई अड्डों और मिसाइलों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह यमन के भविष्य, ईरानी प्रभाव, क्षेत्रीय सुरक्षा और महत्वपूर्ण वैश्विक तेल मार्गों के नियंत्रण से जुड़ा है। यहां 7 प्रमुख सवालों के जरिए इस बढ़ते संघर्ष को समझते हैं:
1. हूती विद्रोही अब अपने हमले क्यों तेज कर रहे हैं? इसका तात्कालिक कारण यमन के भीतर फिर से शुरू हुई लड़ाई है। हालांकि, हूती इसे सऊदी अरब पर क्षेत्रीय सुरक्षा दबाव बढ़ने के बीच अपनी सौदेबाजी (Negotiation) की स्थिति मजबूत करने के अवसर के रूप में भी देखते हैं। 2022 में हुआ संघर्ष विराम अब यमन के हवाई अड्डों, बंदरगाहों और राजनीतिक भविष्य को लेकर उपजे विवादों के कारण टूट रहा है।
सितंबर में हूतियों ने बाब अल-मंडेब (Bab Al Mandab) के पास रणनीतिक मोर्चों पर कब्जा कर लिया था, जिसके जवाब में सऊदी समर्थित यमनी बलों ने जवाबी कार्रवाई की। विश्लेषकों का मानना है कि हूतियों की रणनीति रियाद के लिए इस युद्ध की आर्थिक और राजनीतिक लागत को बढ़ाना है।
2. हूतियों की मुख्य मांगें क्या हैं?
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राजनीतिक नियंत्रण: सना और उत्तरी यमन पर अपनी पकड़ बनाए रखना और यमन की भविष्य की सरकार में निर्णायक भूमिका हासिल करना।
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प्रतिबंधों का अंत: अपने नियंत्रण वाले हवाई अड्डों और बंदरगाहों को फिर से खुलवाना और सैन्य दबाव कम करना।
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रणनीतिक मार्गों पर नियंत्रण: बाब अल-मंडेब के पास अपनी स्थिति का इस्तेमाल कर सैन्य और सौदेबाजी की ताकत बढ़ाना।
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ईरानी समर्थन: ईरान के साथ रणनीतिक संबंध बनाए रखना ताकि सैन्य लाभ मिलता रहे।
3. क्या हूती ईरान के इशारे पर काम कर रहे हैं? यह सच है कि ईरान ने हूतियों को लंबी दूरी की मिसाइलें और ड्रोन तकनीक विकसित करने में मदद की है। हालांकि, हूती महज ईरान की उपज नहीं हैं। उनका अपना राजनीतिक और सैन्य एजेंडा है। 1990 के दशक में उभरे इस गुट ने 2014 में सना पर कब्जा किया था। विश्लेषकों का कहना है कि अगर अमेरिका और ईरान के बीच कोई समझौता हो भी जाता है, तो भी जरूरी नहीं कि सऊदी-हूती संघर्ष खत्म हो जाए।
4. हवाई अड्डों और तेल ठिकानों को ही क्यों बनाया जा रहा निशाना? हूती सऊदी अरब की पारंपरिक सैन्य ताकत का मुकाबला नहीं कर सकते, इसलिए वे राज्य की अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं। हवाई अड्डे, पाइपलाइन, रिफाइनरी और शिपिंग टर्मिनल सऊदी अर्थव्यवस्था के लिए अहम हैं। इन पर हमले से उड़ानें बाधित होती हैं, निवेशकों का भरोसा डगमगाता है और ऊर्जा निर्यात को खतरा पैदा होता है। रियाद का अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा हालिया हमलों के बाद एक प्रमुख लक्ष्य बन गया है।
5. अमेरिका-ईरान युद्ध ने इस संघर्ष को कैसे बदल दिया है? होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के रास्ते शिपिंग बाधित होने से सऊदी अरब पश्चिमी तेल बुनियादी ढांचे और लाल सागर (Red Sea) के निर्यात मार्गों पर अधिक निर्भर हो गया है। हूती इन मार्गों को खतरे में डालकर खाड़ी देशों के ऊर्जा निर्यात को जटिल बना सकते हैं और वॉशिंगटन के खिलाफ ईरान की स्थिति मजबूत कर सकते हैं।
6. बाब अल-मंडेब का इतना महत्व क्यों है? बाब अल-मंडेब लाल सागर को अदन की खाड़ी से जोड़ता है और स्वेज नहर के जरिए यूरोप और एशिया के बीच एक अहम शिपिंग मार्ग है। पिछले महीने हूतियों ने यमन के पूरे लाल सागर तट पर कब्जा कर लिया था, जिससे वैश्विक शिपिंग सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। अगर यहां दिक्कतें बढ़ती हैं, तो वैश्विक ऊर्जा कीमतें और माल ढुलाई लागत आसमान छू सकती है।
7. क्या सऊदी अरब इन हमलों को रोक सकता है? सऊदी अरब के पास अत्याधुनिक वायु रक्षा प्रणालियां हैं और उसने हूतियों की कई मिसाइलों और ड्रोनों को मार गिराया है। लेकिन विशाल क्षेत्रफल और अनगिनत लक्ष्यों (हवाई अड्डे, शहर, तेल प्रतिष्ठान) की वजह से कोई भी रक्षा नेटवर्क 100 प्रतिशत सुरक्षा की गारंटी नहीं दे सकता।
आगे क्या होगा? इस संघर्ष को रोकने के लिए यमन के राजनीतिक भविष्य और सुरक्षा व्यवस्था पर एक स्थायी समझौता जरूरी है। हालांकि, अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने बातचीत को और भी मुश्किल बना दिया है। यदि हूतियों का कोई बड़ा हमला सामूहिक हताहत या ऊर्जा बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचाता है, तो सऊदी अरब की ओर से और भी कड़ी जवाबी कार्रवाई हो सकती है, जो पूरे क्षेत्र को एक बड़े युद्ध की ओर धकेल सकती है।

