ईडी की रेड के बाद हरीश रावत का बड़ा ऐलान, ‘दोषी हूं तो जेल भेजें’

उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हरीश रावत ने अपने निजी सहायक (PA) के ठिकानों पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) की छापेमारी के बाद बड़ा राजनीतिक कदम उठाया है। रावत ने शनिवार को दिल्ली में संवाददाताओं से बातचीत के दौरान कांग्रेस कार्य समिति (CWC) के स्थायी आमंत्रित सदस्य और प्रदेश कांग्रेस कमेटी की कार्यकारिणी से इस्तीफा देने का ऐलान किया। उन्होंने साफ किया कि मुख्यमंत्री रहते हुए अगर भर्ती प्रक्रिया में उनके स्तर पर कोई गड़बड़ी पाई जाती है, तो वह जेल जाने को तैयार हैं और उन्हें ‘जहां टांगना है, वहां टांग दिया जाए’।
पार्टी नहीं छोड़ी, सिर्फ पदों से दिया इस्तीफा
रावत ने स्पष्ट किया है कि उन्होंने कांग्रेस पार्टी से इस्तीफा नहीं दिया है। उनका यह कदम राहुल गांधी और कांग्रेस के भ्रष्टाचार विरोधी अभियान को राजनीतिक हमलों से बचाने के लिए है। पूर्व मुख्यमंत्री जल्द ही कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे से मुलाकात कर अपना त्यागपत्र सौंपेंगे। उनका मानना है कि आगामी उत्तराखंड विधानसभा चुनाव से पहले उनके सहयोगी के घर ईडी की कार्रवाई के जरिए कांग्रेस के खिलाफ एक विमर्श बनाने का प्रयास किया जा रहा है, जिससे पार्टी का संघर्ष कमजोर न पड़े।
पीए चंदन सिंह जीना का किया बचाव
ईडी ने 2016 में राज्य अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UKSSSC) द्वारा आयोजित ग्राम पंचायत विकास अधिकारी परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर रावत के पीए चंदन सिंह जीना के परिसरों पर छापेमारी की थी। जांच एजेंसी के मुताबिक, इस कार्रवाई में 32 लाख रुपये नकद और एक दर्जन महंगी घड़ियां जब्त की गई हैं। जीना 2014-17 के दौरान तत्कालीन मुख्यमंत्री रावत के विशेष कार्य अधिकारी (OSD) भी रहे थे।
इस कार्रवाई पर रावत ने अपने सहयोगी का बचाव करते हुए उन्हें ‘बेहद सज्जन और कर्मठ’ व्यक्ति बताया। उन्होंने कहा कि उन्हें ओएमआर शीट से छेड़छाड़ के आरोपों पर विश्वास नहीं है, लेकिन अगर इसके प्रमाण मिलते हैं तो उन्हें इस कृत्य पर शर्मिंदगी होगी।
भर्ती विवाद पर दी सफाई, ‘एरर ऑफ जजमेंट’ के लिए मांगी माफी
अपने कार्यकाल का बचाव करते हुए रावत ने बताया कि युवाओं के भविष्य को देखते हुए ही अधीनस्थ सेवा चयन आयोग का गठन किया गया था। उनके तीन साल के कार्यकाल में 42,000 से अधिक भर्तियां की गईं।
तत्कालीन आयोग अध्यक्ष आरबीएस रावत की नियुक्ति पर उन्होंने कहा कि यह फैसला उनके पिछले सेवा रिकॉर्ड और पूर्व मुख्यमंत्री भुवन चंद्र खंडूरी की सलाह पर लिया गया था। शिकायत मिलने पर अध्यक्ष से इस्तीफा लिया गया और जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर परीक्षा रद्द कर दी गई। इसके बाद भी भर्ती प्रक्रिया में यदि कोई ‘एरर ऑफ जजमेंट’ हुआ है, तो उन्होंने उत्तराखंड की जनता से क्षमा मांगी।
एजेंसियों को खुली चुनौती और भाजपा में जाने से इनकार
पूर्व मुख्यमंत्री ने सीबीआई, ईडी या राज्य पुलिस को खुली चुनौती दी है कि यदि भर्ती मामलों में उनके हस्तक्षेप का कोई भी प्रमाण है, तो उसे सामने लाया जाए। छात्र जीवन और इंदिरा गांधी के समर्थन में जेल जाने का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि उन्हें दोबारा जेल जाने का कोई भय नहीं है। दबाव में आकर भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने के सवाल पर रावत ने दो टूक जवाब दिया कि उनमें अभी भी लड़ने का सामर्थ्य बाकी है।
