शादी से लिव-इन तक क्या बदलेगा? गुजरात UCC में ये नए नियम हुए तय

President-Draupadi-Murmu
शकील अहमद सैफी
शकील अहमद सैफी

गुजरात में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने को लेकर सबसे बड़ी संवैधानिक बाधा दूर हो गई है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने गुजरात यूसीसी बिल को अपनी अंतिम मंजूरी दे दी है। इस ऐतिहासिक फैसले के साथ ही उत्तराखंड के बाद गुजरात देश का दूसरा ऐसा राज्य बन गया है, जिसने अपने यहां समान नागरिक संहिता को कानूनी रूप से स्वीकार कर लिया है।

मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल की सरकार ने विधानसभा में भारी गहमागहमी के बीच इस बिल को पारित कर मंजूरी के लिए राष्ट्रपति भवन भेजा था। बिल पेश करते हुए मुख्यमंत्री ने इसे ‘समानता और न्याय’ का प्रतीक बताया था। राष्ट्रपति की मुहर लगने के बाद अब राज्य का गृह विभाग और संबंधित प्रशासनिक निकाय इसके नियम तैयार करने में जुट गए हैं। राज्य सरकार द्वारा नियमों की आधिकारिक अधिसूचना जारी होते ही यह कानून पूरे गुजरात में प्रभावी रूप से लागू हो जाएगा।

विवाह, तलाक और उत्तराधिकार में क्या बदलेगा?

समान नागरिक संहिता लागू होने के बाद गुजरात के सभी नागरिकों पर विवाह, तलाक, गुजारा भत्ता, पैतृक संपत्ति के बंटवारे और उत्तराधिकार जैसे मामलों में एक समान कानून लागू होगा। सभी धर्मों के व्यक्तिगत (पर्सनल) कानूनों की जगह अब एक साझा कानूनी ढांचा काम करेगा। इसके तहत विवाह का अनिवार्य पंजीकरण और लिव-इन रिलेशनशिप से जुड़े विशेष और सख्त प्रावधान शामिल किए गए हैं।

गुजरात UCC बिल के मुख्य प्रावधान:

  • सभी धर्मों के लिए एक नियम: शादी, तलाक और पैतृक संपत्ति के लिए सभी धर्मों के नागरिकों पर एक समान कानून लागू होगा।

  • संपत्ति में समान अधिकार: बेटियों को पैतृक संपत्ति में बेटों के बराबर समान हिस्सेदारी का अधिकार मिलेगा।

  • बहुविवाह और जबरन शादी पर रोक: बहुविवाह (Polygamy) को पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया गया है। जबरन शादी और बहुविवाह करने पर 7 साल तक की सजा का प्रावधान है।

  • लिव-इन रिलेशनशिप का रजिस्ट्रेशन: लिव-इन रिलेशनशिप का पंजीकरण अनिवार्य होगा। अवैध लिव-इन या रजिस्ट्रेशन न कराने पर 3 महीने की सजा होगी।

  • नाबालिग के साथ लिव-इन पर सख्त एक्शन: किसी भी नाबालिग के साथ लिव-इन रिलेशनशिप में रहने पर सीधे POCSO एक्ट के तहत कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

  • तलाक के नियम: कोर्ट के बाहर (बिना कानूनी प्रक्रिया के) दिए गए तलाक पूरी तरह अमान्य होंगे। इसका उल्लंघन करने वालों को 3 साल तक की सजा हो सकती है।

  • आदिवासी और विशिष्ट परंपराओं को छूट: राज्य के आदिवासी समुदायों को इस बिल के दायरे से पूरी तरह बाहर रखा गया है। इसके साथ ही कुछ समुदायों की विशिष्ट परंपराओं (जैसे कजिन मैरिज) में कोई बदलाव नहीं किया गया है।