France Gen-Z Protest: स्कूलों की बदहाली के खिलाफ छात्रों का प्रदर्शन

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शकील अहमद सैफी
शकील अहमद सैफी

फ्रांस में शिक्षा सुधारों और स्कूलों की बदहाली को लेकर शुरू हुआ ‘Gen-Z’ हाई स्कूल छात्रों का आंदोलन अब व्यापक और हिंसक रूप ले चुका है। राजधानी पेरिस समेत देश के कई बड़े शहरों में छात्रों के प्रदर्शनों के दौरान भारी आगजनी, पथराव और झड़पें देखने को मिली हैं। बिगड़ती कानून-व्यवस्था और सुरक्षा जोखिमों को देखते हुए सरकार ने शुक्रवार को देश भर में 400 से अधिक स्कूलों और शैक्षणिक संस्थानों को बंद रखने का आदेश दिया है। इस दौरान दर्जनों लोग घायल हुए हैं और पुलिस ने अब तक करीब 2,000 लोगों को हिरासत में लिया है।

सितंबर से शुरू हुआ आंदोलन पूरे देश में फैला

हाई स्कूल छात्रों का यह विरोध प्रदर्शन सितंबर 2026 के आखिरी सप्ताह में पेरिस और उसके उपनगरीय इलाकों से शुरू हुआ था। शुरुआत में यह शांतिपूर्ण था, लेकिन कुछ ही दिनों में यह आंदोलन देश के अन्य प्रमुख प्रांतों और शहरों में फैल गया और कई जगहों पर प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच तीखी झड़पें शुरू हो गईं।

सड़कों पर क्यों उतरे हैं फ्रांसीसी छात्र?

छात्रों की नाराजगी के मुख्य कारणों में फ्रांस की सार्वजनिक शिक्षा व्यवस्था की गिरती स्थिति शामिल है:

  • शिक्षकों की भारी कमी और ओवरक्राउडिंग: स्कूलों में पर्याप्त शिक्षकों का न होना और कक्षाओं में जरूरत से ज्यादा छात्रों की संख्या।

  • जर्जर इमारतें और बुनियादी सुविधाएं: पुरानी व बदहाल स्कूल इमारतें, खराब सुविधाएं और आधुनिक उपकरणों का अभाव।

  • बजट में कटौती का विरोध: सरकार द्वारा शिक्षा बजट में संभावित कटौती और फंडिंग घटाने के प्रस्तावों के खिलाफ गहरा रोष।

  • कठिन परिस्थितियां: लंबे अध्ययन घंटे और गर्मियों के दौरान कक्षाओं के अत्यधिक गर्म होने जैसी व्यावहारिक समस्याओं से छात्र परेशान हैं।

कई शहरों में आगजनी, स्कूल और गाड़ियां फूंकी गईं

गुरुवार और शुक्रवार को प्रदर्शनों के दौरान देश के कई हिस्सों से हिंसा की गंभीर घटनाएं सामने आईं:

  • मार्सिले: दक्षिणी शहर मार्सिले में उग्र प्रदर्शनकारियों ने कम से कम दो हाई स्कूलों में आग लगा दी। वहीं एक अन्य स्कूल परिसर में शिक्षकों पर दुर्घटनावश पेट्रोल गिरने की भी खबर आई।

  • स्ट्रासबर्ग: पूर्वी शहर स्ट्रासबर्ग में कम से कम एक कार को आग के हवाले कर दिया गया।

  • टूलूज़: दक्षिण-पश्चिमी शहर टूलूज़ में दंगा-रोधी पुलिस और युवाओं के बीच भारी टकराव देखने को मिला।

न्याय मंत्री का कड़ा रुख: ‘यह अब कानून-व्यवस्था का मसला’

फ्रांस के न्याय मंत्री गेराल्ड डारमैनिन ने आरटीएल (RTL) रेडियो से बातचीत में कहा कि प्रदर्शनों में शामिल एक छोटा गुट सक्रिय रूप से हिंसा फैला रहा है। उन्होंने संदेह जताया कि उपद्रव करने वाले सभी लोग वास्तविक छात्र नहीं हैं।

डारमैनिन ने स्पष्ट किया, “जब प्रदर्शनकारी सार्वजनिक बसों को निशाना बनाने लगें और स्कूलों को आग के हवाले करने लगें, तो यह केवल मांगों का मुद्दा नहीं रह जाता, बल्कि गंभीर कानून-व्यवस्था का मामला बन जाता है।” उन्होंने बताया कि अब तक करीब 2,000 लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें से लगभग दो-तिहाई अभी भी पुलिस हिरासत में हैं। शिक्षा मंत्री एडुआर्ड गेफ्रे ने पुष्टि की है कि छात्रों की सुरक्षा के मद्देनजर 400 से ज्यादा शैक्षणिक संस्थान बंद रखे गए हैं।

धुर वामपंथी दलों पर आंदोलन भड़काने के आरोप

समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार, प्रधानमंत्री सेबेस्टियन लेकोर्नू के करीबी सूत्रों ने बताया कि खुफिया एजेंसियों ने उच्चस्तरीय बैठक में जानकारी दी है कि छात्र आंदोलन को उकसाने में धुर वामपंथी नेताओं की सक्रिय भूमिका रही है। खुफिया रिपोर्ट में ‘ला फ्रांस इंसौमिसे’ (LFI) पार्टी के कुछ नेताओं पर उकसावे के आरोप लगाए गए हैं। हालांकि, एलएफआई सांसद लुई बोयार्ड ने फ्रांसीसी मीडिया के सामने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि सरकार अपनी विफलताओं को छिपाने के लिए राजनीतिक आरोप मढ़ रही है।