ECINet ने ERO के अधिकार सीमित किए? महाराष्ट्र CEO ने उठाए सवाल

भारतीय चुनाव आयोग (ECI) द्वारा मतदाता सूचियों को दुरुस्त करने के लिए चलाए जा रहे ‘विशेष गहन पुनरीक्षण’ (Special Intensive Revision – SIR) कार्यक्रम के बीच एक बड़ा तकनीकी और प्रशासनिक विवाद खड़ा हो गया है। महाराष्ट्र के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) एस. चोकलिंगम ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को एक विस्तृत पत्र लिखा है। इस पत्र में उन्होंने ECINet सॉफ्टवेयर की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए मतदाता पंजीकरण अधिकारियों (ERO) को अधिक शक्तियां देने और सॉफ्टवेयर में 4 प्रमुख बदलाव करने की मांग की है।
महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव सिर पर हैं और मतदाता सूची का पुनरीक्षण फिलहाल नोटिस चरण में है। जल्द ही इस पर आगे की प्रक्रिया शुरू होने वाली है, जिससे पहले ही राज्य की ओर से इन बदलावों की सख्त जरूरत बताई गई है।
ECINet पोर्टल ने कैसे सीमित किए ERO के अधिकार?
नियमानुसार, हर विधानसभा क्षेत्र में मतदाता सूची तैयार करने, दावों और आपत्तियों की सुनवाई करने, और नामों को शामिल करने या हटाने की पूरी वैधानिक जिम्मेदारी ‘निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी’ (ERO) की होती है। आमतौर पर ERO एसडीएम (SDM) स्तर के अधिकारी होते हैं।
हालांकि, CEO चोकलिंगम की शिकायत है कि ECINet सॉफ्टवेयर के कारण ERO की ये शक्तियां सीमित हो गई हैं। सॉफ्टवेयर के मौजूदा ढांचे में मतदाता सूचियों का अंतिम नियंत्रण सीधे दिल्ली बैठे IT डायरेक्टर (DG-IT) के पास चला जाता है। चोकलिंगम ने मांग की है कि:
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ERO को आपत्तियों पर सुनवाई के बाद अंतिम फैसले लेने की अनुमति दी जाए।
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सॉफ्टवेयर में बदलाव किए जाएं ताकि अधिकारियों को SIR से जुड़े नोटिसों पर कार्रवाई करने के ज्यादा तकनीकी विकल्प मिल सकें।
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यदि ERO प्रस्तुत दस्तावेजों से संतुष्ट हैं, तो उन्हें किसी व्यक्ति को व्यक्तिगत सुनवाई से छूट देने का निर्णय लेने का अधिकार दिया जाए।
दोनों चुनाव आयुक्तों ने भी किया था समर्थन
इस मांग को चुनाव आयोग के भीतर से भी समर्थन मिला है। चुनाव आयुक्त विवेक जोशी और सुखबीर सिंह संधू ने भी पहले ERO को ज्यादा शक्तियां देने की वकालत की थी।
14 अगस्त 2026 को चुनाव आयुक्त संधू ने एक नोट में लिखा था कि CEO, DEO (जिला निर्वाचन अधिकारी) और ERO लगातार शिकायत कर रहे हैं कि वे अपने वैधानिक कर्तव्यों का पालन नहीं कर पा रहे हैं। उन्होंने कहा था, “यह अजीब स्थिति है कि कानून के अनुसार मतदाता सूची की पूरी जिम्मेदारी ERO, DEO और CEO पर है, लेकिन पहुंच नियंत्रण (Access Control) को DG (IT) के स्तर पर केंद्रीकृत (Centralized) कर दिया गया है।”
चुनाव आयोग ने आंशिक रूप से मानी मांगें
26 सितंबर को पूर्ण आयोग की बैठक के बाद, चुनाव आयोग ने एक बयान जारी कर महाराष्ट्र के अनुरोधों को आंशिक रूप से संबोधित किया।
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आयोग ने ERO को ‘तार्किक विसंगतियों’ के मामलों में लोगों को व्यक्तिगत सुनवाई से छूट देने का विवेक प्रदान किया है।
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बयान में यह भी कहा गया कि, “पिछले कुछ महीनों में राज्यों के CEO से मिले सुझावों के आधार पर पोर्टल में कई सुधार किए जा चुके हैं। यदि फील्ड अधिकारियों को किसी और लचीलेपन की आवश्यकता होगी, तो वह भी उपलब्ध कराया जाएगा।”
महाराष्ट्र की वोटर लिस्ट से हटे 2 करोड़ से ज्यादा नाम
इस बीच, महाराष्ट्र में मतदाता सूची को शुद्ध करने का अभियान तेजी से चल रहा है। 31 अगस्त को प्रकाशित महाराष्ट्र की मतदाता सूची के ड्राफ्ट में राज्य के 21.1 प्रतिशत (करीब दो करोड़) मतदाताओं के नाम हटा दिए गए हैं।
CEO चोकलिंगम ने बताया कि SIR प्रक्रिया के दौरान हटाए गए इन नामों में अधिकांश ऐसे मतदाता हैं, जो या तो मृत हैं या फिर स्थानांतरित (Shifted) हो चुके हैं। महाराष्ट्र की अंतिम मतदाता सूची 16 नवंबर को जारी की जाएगी, जो आगामी विधानसभा चुनावों के लिए निर्णायक होगी।

