स्मृति ईरानी या वरुण गांधी? BJP में राज्यसभा टिकट पर मंथन तेज

उत्तर प्रदेश में 16 अक्टूबर को होने वाले 10 राज्यसभा सीटों के चुनाव के लिए मंगलवार से नामांकन की प्रक्रिया शुरू हो रही है। इस बीच भारतीय जनता पार्टी (BJP) के संभावित उम्मीदवारों को लेकर सियासी सरगर्मी तेज हो गई है। सूत्रों के मुताबिक, पार्टी पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी, राष्ट्रीय महासचिव हरीश द्विवेदी और पूर्व सांसद वरुण गांधी को उच्च सदन भेजने के विकल्प पर गंभीरता से विचार कर रही है।
सोमवार को लखनऊ में हुई भाजपा कोर कमेटी की बैठक में इन नामों पर विस्तार से चर्चा हुई। अगले तीन से चार दिनों के भीतर पार्टी की केंद्रीय चुनाव समिति (CEC) की बैठक में उम्मीदवारों की आधिकारिक सूची पर अंतिम मुहर लगने की संभावना है।
10वीं सीट पर कड़ा मुकाबला, क्रॉस वोटिंग की आशंका
संख्याबल के लिहाज से इस बार का मुकाबला बेहद दिलचस्प मोड़ पर पहुंच गया है। विधानसभा के मौजूदा आंकड़ों के अनुसार, 10 में से 7 सीटें भाजपा और 2 सीटें समाजवादी पार्टी (सपा) के खाते में आसानी से जाती दिख रही हैं।
असली खींचतान 10वीं सीट को लेकर है। इस सीट पर भाजपा अपनी 8वीं और सपा अपनी तीसरी जीत दर्ज करने के लिए आमने-सामने आ सकती हैं। दोनों ही दलों के पास अतिरिक्त वोट मौजूद हैं, जिससे एक बार फिर क्रॉस वोटिंग की संभावनाओं से इनकार नहीं किया जा सकता।
जातीय और क्षेत्रीय समीकरण साधने की कवायद
2027 के यूपी विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए भाजपा उम्मीदवारों के चयन में सामाजिक संतुलन बनाने की रणनीति पर काम कर रही है:
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ब्राह्मण चेहरा: ब्राह्मण मतों को साधे रखने के लिए स्मृति ईरानी के साथ-साथ वरुण गांधी के नाम पर भी मंथन चल रहा है।
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पश्चिमी यूपी का जाट समीकरण: जाट बेल्ट में पकड़ मजबूत करने के लिए पूर्व केंद्रीय मंत्री संजीव बालियान और पूर्व सांसद डॉ. सत्यपाल सिंह के नाम पैनल में शामिल हैं।
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ओबीसी और दलित प्रतिनिधित्व: वर्तमान सांसद गीता शाक्य और केंद्रीय मंत्री बीएल वर्मा का कार्यकाल समाप्त हो रहा है। इन दोनों को दोबारा मौका मिलने की संभावना जताई जा रही है। इसके अलावा प्रदेश भाजपा ओबीसी मोर्चा के अध्यक्ष प्रकाश पाल और रेखा वर्मा के नाम पर भी विचार किया जा रहा है। दलित चेहरे के तौर पर पूर्व डीजीपी बृजलाल की जगह किसी युवा चेहरे को मौका दिया जा सकता है।
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सिख व संगठनात्मक चेहरे: पंजाब के राजनीतिक समीकरणों को देखते हुए केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी को दोबारा उच्च सदन भेजा जा सकता है। इसके अलावा सुरेश राणा, अमित मालवीय और राजवीर सिंह के नामों की भी चर्चा है। वहीं, मौजूदा सांसद नीरज शेखर और अरुण सिंह को आगामी विधानसभा चुनाव लड़ाने की रणनीति पर भी विचार चल रहा है।
समाजवादी पार्टी के संभावित चेहरे
समाजवादी पार्टी अपने वरिष्ठ नेता प्रो. रामगोपाल यादव को दोबारा राज्यसभा भेजने की तैयारी में है। इसके अलावा पार्टी के भीतर पूर्व मुख्य सचिव आलोक रंजन और सलीम इकबाल के नाम भी रेस में बताए जा रहे हैं।
विधानसभा का नंबर गेम: किसे कितने वोटों की जरूरत?
उत्तर प्रदेश विधानसभा की 403 सीटों में से मौजूदा प्रभावी संख्या 396 है। इस हिसाब से एक उम्मीदवार को जीत दर्ज करने के लिए कम से कम 37 प्रथम वरीयता वोटों की जरूरत होगी।
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भाजपा गठबंधन की स्थिति: भाजपा के पास अपने 255 विधायक हैं, जिससे 7 सीटें सुरक्षित हैं। एनडीए के सहयोगी दलों में अपना दल (सोनेलाल) के 13, राष्ट्रीय लोकदल (RLD) के 9, सुभासपा के 6 और निषाद पार्टी के 5 विधायक हैं। 7 सीटें जीतने के बाद भी एनडीए के पास 33 अतिरिक्त वोट बचते हैं। यानी भाजपा को अपनी 8वीं सीट निकालने के लिए केवल 4 अतिरिक्त वोटों का जुगाड़ करना होगा।
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सपा गठबंधन का गणित: सपा के पास 101 विधायक हैं और कांग्रेस के 2 विधायकों का साथ मिलने पर यह संख्या 103 होती है। 2 सीटें जीतने (74 वोट) के बाद सपा के पास 29 अतिरिक्त वोट शेष रह जाते हैं। ऐसे में तीसरी सीट जीतने के लिए सपा को कम से कम 8 अतिरिक्त विधायकों के समर्थन की दरकार होगी।

