TMC के 100 से ज्यादा नेता-कार्यकर्ता कांग्रेस में शामिल, बदला समीकरण?

पश्चिम बंगाल में 6 अक्टूबर को होने वाले नंदीग्राम (Nandigram) और रेजीनगर विधानसभा उपचुनाव से ठीक पहले पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) की पार्टी में बड़ी टूट देखने को मिली है। पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न पर जारी खींचतान के बीच अब स्थानीय स्तर के नेताओं ने भी टीएमसी (TMC) का साथ छोड़ना शुरू कर दिया है। मालदा जिले के महीष बाथानी क्षेत्र के 100 से अधिक नेताओं और कार्यकर्ताओं ने तृणमूल कांग्रेस छोड़कर आधिकारिक रूप से कांग्रेस का हाथ थाम लिया है।
बलरामपुर में हुआ कांग्रेस जॉइनिंग कार्यक्रम
इन नेताओं को कांग्रेस में शामिल कराने के लिए बलरामपुर में एक बड़ा कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें जिला कांग्रेस अध्यक्ष, प्रदेश कांग्रेस उपाध्यक्ष और पूर्व विधायक बी. हल्दर विशेष रूप से मौजूद रहे। कांग्रेस में शामिल होने वालों में मुख्य रूप से शामिल हैं:
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13 पंचायत सदस्य
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1 पंचायत समिति सदस्य
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टीएमसी के क्षेत्रीय अध्यक्ष
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ब्लॉक उपाध्यक्ष
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100 से अधिक सक्रिय कार्यकर्ता
महीष बाथानी: कांग्रेस के पुराने गढ़ में वापसी
महीष बाथानी क्षेत्र पहले कांग्रेस का ही मजबूत गढ़ माना जाता था, लेकिन राज्य में ममता बनर्जी का प्रभाव बढ़ने के बाद इस इलाके के राजनीतिक समीकरण बदल गए थे। अब पार्टी में चल रहे अंदरूनी कलह और ममता गुट के कमजोर पड़ने का फायदा उठाते हुए कांग्रेस ने अपने पुराने किले को वापस हासिल करने की रणनीति अपनाई है। टीएमसी छोड़कर कांग्रेस में आए नेता शराफत अली ने कहा, “पश्चिम बंगाल में भाजपा के खिलाफ मोर्चा खोलने की हिम्मत केवल कांग्रेस ही कर सकती है, कोई और नहीं।”
नंदीग्राम और रेजीनगर उपचुनाव का सियासी समीकरण
राज्य की नंदीग्राम और रेजीनगर सीटों पर 6 अक्टूबर 2026 को उपचुनाव होने जा रहे हैं।
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नंदीग्राम सीट: मौजूदा मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के यह सीट छोड़ने के बाद यहां उपचुनाव हो रहा है। ममता बनर्जी गुट ने यहां कांग्रेस उम्मीदवार को समर्थन देने का फैसला किया है। इसी रणनीति के तहत ममता गुट की उम्मीदवार संचिता प्रधान डे ने अपना नामांकन वापस ले लिया है।
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रेजीनगर सीट: आम जनता उन्नयन पार्टी के प्रमुख हुमायूं कबीर द्वारा नौदा सीट नहीं छोड़ने के कारण रेजीनगर सीट खाली हुई है, जहां से अब उनके बेटे मैदान में हैं। ममता गुट ने यहां से रबीउल आलम चौधरी को टिकट दिया है।
TMC नाम और चुनाव चिह्न: SC का चुनाव आयोग को 4 महीने का समय
इस जमीनी झटके के साथ-साथ ममता बनर्जी अपनी पार्टी के मूल नाम ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ और चुनाव चिह्न की वापसी के लिए सुप्रीम कोर्ट में भी कानूनी लड़ाई लड़ रही हैं। सुप्रीम कोर्ट ने इस विवाद को सुलझाने के लिए चुनाव आयोग (ECI) को 4 महीने की डेडलाइन दी है।
अदालत ने दोनों गुटों को अपने हलफनामे और रिकॉर्ड पेश करने के लिए 4 हफ्ते का समय दिया है। सुनवाई के दौरान चुनाव आयोग के वकील डीएस नायडू ने कहा था कि ऐसे विवादों को सुलझाने में समय लगता है। इस पर बेंच ने आयोग से कहा कि अगले 4 महीने में हर हाल में फैसला लें, और इसके लिए जरूरत पड़ने पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद भी ली जा सकती है। अदालत ने टिप्पणी की कि यह मामला भी NCP और शिवसेना के विवाद जैसा ही है, बस इसमें पारिवारिक के बजाय अलग-अलग गुटों का संघर्ष है।

