योगी बोले- पहले परीक्षा कोई देता था, नौकरी किसी और को मिलती थी

yogi29
गौरव त्रिपाठी
गौरव त्रिपाठी

शुक्रवार को धनतेरस के मौके पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ में पुलिस बल के 4,543 नवचयनित उपनिरीक्षकों (SI) को नियुक्ति पत्र सौंपे। इस दौरान उन्होंने राज्य में पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया का दावा करते हुए पूर्ववर्ती सरकारों पर जमकर निशाना साधा।

मुख्यमंत्री ने नवचयनित अभ्यर्थियों से सीधा संवाद करते हुए पूछा कि क्या उन्हें चयन के लिए किसी सिफारिश, लेन-देन या धौंस का सामना करना पड़ा। उन्होंने दावा किया कि योग्यता और मेरिट के आधार पर बिना किसी भेदभाव के यह चयन हुआ है।

‘परीक्षा कोई देता था, नौकरी किसी तीसरे को मिलती थी’

भर्ती प्रक्रिया में भाई-भतीजावाद खत्म होने की बात कहते हुए मुख्यमंत्री ने पिछली सपा सरकार का नाम लिए बिना ‘सैफई सिंडिकेट’ पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने आरोप लगाया कि 2003 से 2017 के बीच प्रदेश में आवेदन कोई करता था, परीक्षा कोई दूसरा देता था और नियुक्ति पत्र किसी तीसरे व्यक्ति को मिल जाता था।

योगी के मुताबिक, अगर राज्य में डबल इंजन की सरकार नहीं आती तो आज ईमानदार भर्ती प्रक्रिया सिर्फ एक दिवास्वप्न बनकर रह जाती। उन्होंने ऐसे बेईमान लोगों की संपत्ति जब्त करने की वकालत भी की, जिन्होंने नौजवानों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया था।

नौ साल में 9.5 लाख नौकरियां, 6 महीने में 1 लाख का लक्ष्य

सीएम ने भर्ती के आंकड़े पेश करते हुए बताया कि पिछले साढ़े नौ वर्षों में अकेले यूपी पुलिस में 2.30 लाख पुलिस अधिकारियों और कर्मियों की भर्ती हुई है। वहीं, विभिन्न सरकारी विभागों में यह आंकड़ा 9.5 लाख को पार कर चुका है।

उन्होंने ऐलान किया कि सरकार का लक्ष्य छह महीने के भीतर एक लाख युवाओं को नियुक्ति पत्र देने का है। दीपावली के बाद भैयादूज के अगले दिन राजस्व विभाग के 1,200 अभ्यर्थियों को जॉइनिंग लेटर दिए जाएंगे। इसके अलावा 42 हजार होमगार्ड और 32 हजार पुलिस कांस्टेबल की भर्ती प्रक्रिया भी लगभग पूरी हो चुकी है, जबकि 25 हजार शिक्षकों की नियुक्ति पाइपलाइन में है।

एचसीएल और नाइट शिफ्ट का दिया उदाहरण

कानून-व्यवस्था और महिला कार्यबल की भागीदारी में आए बदलाव का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने लखनऊ स्थित एचसीएल टेक का उदाहरण दिया। उन्होंने बताया कि 2017 में वहां सिर्फ 100 लोग काम करते थे, जो अब बढ़कर 12,500 हो गए हैं और आने वाले समय में यह संख्या 18,500 तक पहुंच जाएगी।

उन्होंने महिला कर्मचारियों से हुई अपनी बातचीत का हवाला देते हुए कहा कि अब महिलाएं नाइट शिफ्ट में काम कर रही हैं और रात दो बजे भी सुरक्षित अपनी स्कूटी से घर लौटती हैं। 2017 से पहले प्रदेश में ऐसा सोचना भी मुश्किल था।

जर्जर बैरक से हाईटेक पुलिसिंग तक का सफर

अपने पहले कार्यकाल की शुरुआत का एक किस्सा साझा करते हुए योगी ने बताया कि 2017 में जब वह पुलिस लाइन गए थे, तो वहां जवानों की बैरक जर्जर थी और टूटी छत से आसमान दिखता था। आज 56 जिलों में पुलिसकर्मियों के लिए आधुनिक बहुमंजिला आवासीय इमारतें बन चुकी हैं।

पुलिस की ट्रेनिंग क्षमता भी 6 हजार से बढ़ाकर 60 हजार कर दी गई है। राज्य में स्पेशल सिक्योरिटी फोर्स (UP SSF) और एसडीआरएफ का गठन हुआ है। बंद की गई पीएसी की 54 कंपनियों को दोबारा बहाल किया गया है। इसके अलावा 7 जनपदों में पुलिस कमिश्नरेट प्रणाली लागू की गई है और हर थाने में साइबर हेल्प डेस्क काम कर रही है।

इन चेहरों को मंच से मिला नियुक्ति पत्र

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने अपने हाथों से अंशु गंगवार, प्राची सविता, श्वेता भदौरिया, फरहत जहां, रवि प्रताप कुशवाहा, मयंक शाक्य, अजहरुद्दीन खान समेत 15 युवाओं को मंच पर नियुक्ति पत्र सौंपे।

इन नवनियुक्त उपनिरीक्षकों को साइबर सुरक्षा, एआई (AI) और ड्रोन तकनीक के साथ-साथ तीन नए आपराधिक कानूनों की विशेष ट्रेनिंग दी जाएगी। कार्यक्रम में वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना, लखनऊ की महापौर सुषमा खर्कवाल, अपर मुख्य सचिव (गृह) संजय प्रसाद, डीजीपी राजीव कृष्ण और एडीजी (लॉ एंड ऑर्डर) अमिताभ यश समेत कई विधायक और वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।