भोपाल अंबेडकर सेतु विवाद: 4.69 करोड़ के टेंडर पर हाईकोर्ट की रोक

भोपाल के रानी कमलापति रेलवे स्टेशन के पास स्थित नवनिर्मित डॉ. भीमराव अंबेडकर सेतु (फ्लाईओवर) के रखरखाव को लेकर जारी 4.69 करोड़ रुपये के नए टेंडर पर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने सख्त रुख अख्तियार किया है। अदालत ने राज्य सरकार से तीखे सवाल पूछते हुए इस टेंडर प्रक्रिया पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है।
हाई कोर्ट के तीखे सवाल: नया टेंडर क्यों?
मामले की सुनवाई कर रहे एक्टिंग चीफ जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस प्रदीप मित्तल की डिवीजन बेंच ने सरकार से पूछा कि जब फ्लाईओवर बनाने वाली निर्माण कंपनी ‘डिफेक्ट लायबिलिटी पीरियड’ (Defect Liability Period) के तहत अपने ही खर्च पर खामियों को दूर करने के लिए तैयार और बाध्य है, तो फिर सरकारी खजाने से करोड़ों रुपये खर्च कर नया टेंडर निकालने की जरूरत क्या थी?
अदालत ने कहा, “जब वही काम बिना किसी अतिरिक्त भुगतान के मूल कॉन्ट्रैक्टर द्वारा किया जा सकता है, तो जनता के पैसे से नया टेंडर जारी करना उचित प्रतीत नहीं होता।”
बुनियादी सुविधाओं के फंड पर कोर्ट की टिप्पणी
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने सरकार की खर्च संबंधी प्राथमिकताओं पर भी तंज कसा। जजों ने टिप्पणी की कि ऐसे टेंडरों के लिए तो करोड़ों रुपये आसानी से उपलब्ध हो जाते हैं, लेकिन जब बात स्कूल भवनों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों या अदालतों के बुनियादी ढांचे की आती है, तो सरकार की तरफ से अक्सर ‘फंड की कमी’ का हवाला दिया जाता है।
क्या है पूरा मामला?
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154 करोड़ की लागत: इस अहम फ्लाईओवर का लोकार्पण मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने जनवरी 2025 में किया था, जिसे लगभग 154 करोड़ रुपये की लागत से बनाया गया है।
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शुरुआत से ही गुणवत्ता पर सवाल: उद्घाटन के कुछ ही समय बाद और खासकर मानसून के दौरान सड़क की सतह और फिनिशिंग में भारी कमियां सामने आईं।
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विवाद की वजह: लोक निर्माण विभाग (PWD) ने एक तरफ तो खामियों के लिए मूल कंपनी को नोटिस दिया और उसे ब्लैकलिस्ट करने की प्रक्रिया शुरू की, लेकिन दूसरी तरफ रातों-रात 4.69 करोड़ का नया मेंटेनेंस टेंडर भी जारी कर दिया। मूल कंपनी का तर्क था कि वह अनुबंध के तहत अपने खर्च पर सुधार कार्य करने को तैयार है, जिसके बाद यह पूरा मामला हाई कोर्ट पहुंच गया।
अगली सुनवाई तक टेंडर पर रोक
हाई कोर्ट ने 3 सितंबर को जारी अपने लिखित आदेश में नए टेंडर की प्रक्रिया पर रोक लगा दी है। इसके साथ ही अदालत ने संबंधित निर्माण कंपनी को निर्देश दिया है कि वह फ्लाईओवर में पाई गई सभी कमियों को तुरंत दूर करे और अगली सुनवाई के दौरान इसकी अनुपालन रिपोर्ट पेश करे।
