चुनाव से पहले आजम परिवार को राहत, दो पैन कार्ड मामले में मिली जमानत

azam khan
साक्षी चतुर्वेदी
साक्षी चतुर्वेदी

उत्तर प्रदेश में कुछ महीनों बाद होने वाले विधानसभा चुनाव से ठीक पहले समाजवादी पार्टी के कद्दावर नेता आजम खान और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम को इलाहाबाद हाईकोर्ट से बड़ी कानूनी राहत मिली है। गुरुवार को अदालत ने बहुचर्चित ‘दो पैन कार्ड’ मामले में दोनों नेताओं की जमानत अर्जी मंजूर करते हुए उनकी सजा को निलंबित कर दिया है। हालांकि, हाईकोर्ट ने दोनों की दोषसिद्धि (Conviction) पर रोक लगाने की मांग को नामंजूर कर दिया है।

ट्रायल कोर्ट के फैसले को दी गई थी चुनौती

आजम खान और अब्दुल्ला आजम ने निचली अदालत (ट्रायल कोर्ट) के फैसले के खिलाफ इलाहाबाद हाईकोर्ट में क्रिमिनल रिवीजन याचिका दायर की थी। इस याचिका में दोषसिद्धि पर रोक लगाने, सजा को निलंबित करने और अंतरिम जमानत पर रिहा करने की मांग की गई थी।

मामले की सुनवाई 15 अक्टूबर को ही पूरी हो गई थी, जिसके बाद जस्टिस समित गोपाल की सिंगल बेंच (एकल पीठ) ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। गुरुवार को जस्टिस समित गोपाल की अदालत ने यह निर्णय सुनाया, जिस पर दोनों पक्षों और राजनीतिक गलियारों की निगाहें टिकी हुई थीं।

सिंघवी समेत इन दिग्गज वकीलों ने की पैरवी

सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों की ओर से देश और राज्य के जाने-माने वकीलों ने जिरह की। आजम खान और अब्दुल्ला की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी, वरिष्ठ अधिवक्ता एन.आई. जाफरी और अधिवक्ता शाश्वत आनंद ने अपना पक्ष रखा।

दूसरी तरफ, शिकायतकर्ताओं की ओर से भी अदालत में मजबूती से दलीलें पेश की गईं। शिकायतकर्ता और मौजूदा भाजपा विधायक आकाश सक्सेना की ओर से अधिवक्ता शरद शर्मा ने जिरह की। वहीं, एक अन्य पक्षकार नवाब काजिम अली खान उर्फ नवेद मियां की तरफ से अधिवक्ता विजय विक्रम सिंह ने अदालत में अपना पक्ष रखा।

कानून के स्थापित सिद्धांतों के खिलाफ है सजा: बचाव पक्ष

हाईकोर्ट में बहस के दौरान बचाव पक्ष का मुख्य तर्क यह रहा कि ट्रायल कोर्ट और सेशन कोर्ट द्वारा सुनाई गई सजा कानून के स्थापित सिद्धांतों के अनुरूप नहीं है। याचिकाकर्ताओं के वकीलों ने अदालत से आग्रह किया था कि जब तक उनकी अंतिम अपील का निस्तारण नहीं हो जाता, तब तक उनकी दोषसिद्धि पर रोक लगाई जाए, सजा निलंबित की जाए और उन्हें अंतरिम जमानत दी जाए।

अदालत ने बचाव पक्ष की दलीलों को सुनते हुए जमानत और सजा निलंबन की राहत तो दे दी, लेकिन दोषसिद्धि पर स्टे लगाने से इनकार कर दिया।