असदुद्दीन ओवैसी को तगड़ा झटका: कद्दावर नेता आसिम वकार छोड़ेंगे पार्टी

Asaduddin Owaisi
Saima Siddiqui
Saima Siddiqui

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में साल 2027 की शुरुआत में प्रस्तावित विधानसभा चुनावों से पहले सियासी उलटफेर का दौर शुरू हो गया है। राज्य में अपनी सियासी जमीन मजबूत करने में जुटे असदुद्दीन ओवैसी और उनकी पार्टी ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) को एक बड़ा झटका लगने वाला है। सूत्रों के मुताबिक, पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता और सीनियर नेता आसिम वकार ने ओवैसी का साथ छोड़ने का फैसला कर लिया है। बताया जा रहा है कि वकार कल (बुधवार, 2 सितंबर) आधिकारिक तौर पर कांग्रेस का दामन थाम सकते हैं।

पिछले 10 सालों से AIMIM में सक्रिय आसिम वकार उत्तर प्रदेश की सियासत में पार्टी का एक बड़ा और जाना-माना चेहरा बन चुके थे। चुनाव से ठीक कुछ महीने पहले उनका यह कदम यूपी में ओवैसी की राजनीतिक पकड़ को कमजोर कर सकता है।

क्यों नाराज चल रहे थे आसिम वकार?

सूत्रों की मानें तो आसिम वकार पिछले कुछ समय से AIMIM नेतृत्व से नाराज चल रहे थे। उनकी इस नाराजगी की मुख्य वजह उत्तर प्रदेश इकाई द्वारा लिए गए कुछ फैसले बताए जा रहे हैं, जिनसे वे सहमत नहीं थे। हालांकि, वकार ने अभी तक अपनी नाराजगी की असल वजहों को लेकर सार्वजनिक तौर पर कुछ भी कहने से परहेज किया है।

20 साल सपा में रहे, अब इमरान प्रतापगढ़ी ने कराई कांग्रेस में ‘एंट्री’

AIMIM का हिस्सा बनने से पहले आसिम वकार ने अपनी राजनीति के अहम 20 साल समाजवादी पार्टी (SP) को दिए थे। अब जब वे ओवैसी की पार्टी छोड़ रहे हैं, तो उन्होंने सपा में वापसी करने के बजाय कांग्रेस को चुना है। सूत्रों का कहना है कि इसके पीछे अल्पसंख्यक कांग्रेस के अध्यक्ष इमरान प्रतापगढ़ी की अहम भूमिका है, जिन्होंने वकार को कांग्रेस के पक्ष में लाने के लिए काफी मेहनत की है।

2027 चुनाव और AIMIM के सामने चुनौतियां

उत्तर प्रदेश में अगले साल जनवरी या फरवरी में विधानसभा चुनाव होने हैं। ओवैसी का मुख्य फोकस इस बार भी यूपी की मुस्लिम बहुल सीटों पर है। अगर साल 2022 के विधानसभा चुनाव की बात करें, तो AIMIM शुरुआत में ओम प्रकाश राजभर की पार्टी (SBSP) के साथ गठबंधन का हिस्सा थी और 100 सीटों पर चुनाव लड़ने की बात तय हुई थी। लेकिन राजभर ने ऐन वक्त पर सपा से गठबंधन कर लिया। इसके बाद AIMIM ने अकेले ही 95 सीटों पर प्रत्याशी उतारे थे, लेकिन उसे एक भी सीट पर जीत हासिल नहीं हुई थी। ऐसे में चुनाव से ऐन पहले आसिम वकार जैसे मुखर चेहरे का पार्टी से जाना ओवैसी के लिए एक बड़ी चुनौती साबित हो सकता है।