चीन के डैम की काट या स्थानीय लोगों के लिए खतरा? सियांग पर टकराव

अरुणाचल प्रदेश के ईस्ट सियांग जिले स्थित पासीघाट में प्रस्तावित 11,200 मेगावाट के सियांग अपर मल्टीपर्पज प्रोजेक्ट के विरोध में चल रहे प्रदर्शन शुक्रवार देर रात हिंसक हो गए। हालात बिगड़ने के बाद शनिवार तक पूरे इलाके में भारी सुरक्षा बल तैनात कर दिया गया। स्थानीय प्रशासन ने प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच बढ़े तनाव को देखते हुए अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था की है। यह घटनाक्रम भारत की सबसे बड़ी जलविद्युत परियोजनाओं में से एक को फिर से राष्ट्रीय बहस के केंद्र में ले आया है।
चीन के मेगा डैम का रणनीतिक जवाब
सियांग नदी तिब्बत में यारलुंग त्सांगपो के नाम से बहती है और अरुणाचल प्रदेश में प्रवेश कर ब्रह्मपुत्र बन जाती है। चीन ने जुलाई 2025 में भारतीय सीमा के नजदीक लगभग 170 अरब डॉलर की लागत वाली एक विशाल जलविद्युत परियोजना का निर्माण शुरू किया था। इससे डाउनस्ट्रीम जल प्रवाह, अचानक आने वाली बाढ़ और जल संबंधी सूचनाओं को साझा करने को लेकर भारत की चिंताएं बढ़ गई हैं। सियांग परियोजना को चीन की इस अपस्ट्रीम जल परियोजना के रणनीतिक जवाब और पूर्वोत्तर में जल व राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति के अहम हिस्से के रूप में देखा जा रहा है।
बुनियादी ढांचे और रोजगार का ब्लूप्रिंट
भारत अरुणाचल प्रदेश में सियांग प्रोजेक्ट के अलावा 1,720 मेगावाट की कमला जलविद्युत परियोजना पर भी काम कर रहा है। केंद्र सरकार कमला परियोजना के लिए 26,069.50 करोड़ रुपये मंजूर कर चुकी है, जिससे हर साल 6,870 मिलियन यूनिट बिजली उत्पादन का अनुमान है। केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (CEA) के अनुसार राज्य में 50,394 मेगावाट जलविद्युत क्षमता है, लेकिन नवंबर 2024 तक इसमें से केवल 1,115 मेगावाट का ही उपयोग हो पाया था।
सरकार का तर्क है कि सियांग परियोजना से केवल बिजली नहीं बनेगी, बल्कि सीमावर्ती क्षेत्रों में सैकड़ों किलोमीटर सड़कें, पुल और बुनियादी ढांचे का विकास होगा। इससे स्थानीय युवाओं के लिए तकनीकी, परिवहन और इंजीनियरिंग क्षेत्र में रोजगार पैदा होंगे।
स्थानीय समुदायों का समर्थन और विरोध
परियोजना को लेकर स्थानीय स्तर पर लोगों की राय बंटी हुई है। जून 2026 में 110 परिवारों ने परियोजना के प्रारंभिक अध्ययन के समर्थन में एक समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। दूसरी तरफ, कई आदिवासी समुदाय और संगठन विस्थापन, पर्यावरणीय नुकसान और पैतृक भूमि पर पड़ने वाले असर की आशंका से लगातार इसका विरोध कर रहे हैं।
परियोजना के तहत प्रभावित परिवारों के लिए रोजगार आरक्षण और आजीवन वार्षिकी जैसी योजनाएं प्रस्तावित हैं। साथ ही अरुणाचल प्रदेश को 12 प्रतिशत मुफ्त बिजली और 1 प्रतिशत बिजली स्थानीय क्षेत्र विकास कोष के लिए देने का प्रावधान किया गया है।
नैरेटिव वॉर और भारत के सामने चुनौती
रणनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस पूरे घटनाक्रम में चीन के नैरेटिव वॉरफेयर की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता, भले ही इसका कोई पुष्ट प्रमाण न हो। चीन अक्सर अपनी अपस्ट्रीम परियोजनाओं से जुड़ी अंतरराष्ट्रीय चिंताओं को कमतर आंकता रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार, सियांग परियोजना की सफलता केवल 11,200 मेगावाट की क्षमता से तय नहीं होगी। सरकार के लिए सबसे बड़ी चुनौती पारदर्शी प्रक्रिया, उचित मुआवजे, प्रभावी पुनर्वास और पर्यावरण संरक्षण के जरिए स्थानीय समुदायों का विश्वास जीतना होगा।

