15 जिलों में पोस्टर क्यों लगे? अखिलेश को अतीक-मुख्तार के नाम पर घेरा

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शालिनी तिवारी
शालिनी तिवारी

उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक पारा चढ़ने लगा है। समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव की आजम खान से गुरुवार को हुई मुलाकात के बाद, शुक्रवार सुबह राज्य के कई शहरों में अखिलेश के खिलाफ पोस्टर नजर आए। प्रमुख चौराहों पर लगाए गए इन पोस्टरों में तुकबंदी वाले नारों के जरिए अखिलेश यादव पर तीखा राजनीतिक हमला किया गया है।

लखनऊ समेत 15 जिलों में पोस्टर वॉर

राजधानी लखनऊ में नेशनल पीजी कॉलेज क्रॉसिंग के पास एक बड़ा पोस्टर लगाया गया है। इसमें अखिलेश यादव की गोल टोपी वाली तस्वीर के साथ माफिया अतीक अहमद और मुख्तार अंसारी की तस्वीरें भी लगाई गई हैं। पोस्टर पर नारा लिखा गया है- ‘चाय, समोस रसमलाई, सारे माफिया अपने भाई।’

इस तरह के पोस्टर केवल लखनऊ तक सीमित नहीं हैं। बलिया, मऊ, गाजीपुर, आजमगढ़, वाराणसी, बस्ती, हरदोई और सीतापुर समेत राज्य के कुल 15 जिलों में ये पोस्टर लगाए गए हैं।

2013 यूपी-पीसीएस भर्ती का हवाला

पोस्टरों में सपा सरकार के दौरान हुए भर्ती विवादों को भी मुद्दा बनाया गया है। शहरों में चस्पा किए गए एक पोस्टर में 2013 की यूपी-पीसीएस भर्ती परीक्षा का जिक्र करते हुए दावा किया गया है कि 86 में से 56 भर्तियां एक विशेष जाति की हुईं। इस पर तंज कसते हुए स्लोगन लिखा गया है- ‘रसगुल्ला और रसमलाई, एक जाति की सत्ता आई।’

परिवारवाद और दंगों का जिक्र

पोस्टरों के जरिए समाजवादी पार्टी पर परिवारवाद का आरोप लगाते हुए भी निशाना साधा गया है। एक पोस्टर पर लिखा है- ‘दाल चावल और अचार, पार्टी मतलब एक परिवार।’

इसके अलावा, सपा शासनकाल के दौरान हुए मुजफ्फरनगर दंगों और इफ्तार पार्टियों को भी पोस्टर वॉर का हिस्सा बनाया गया है। इन मुद्दों पर अखिलेश को घेरते हुए पोस्टर पर लिखा गया है- ‘दंगा, इफ्तार और बिरयानी, सपा राज की असल कहानी।’