अखिलेश यादव और आशुतोष रांका की मैराथन बैठक, समझें 7 सियासी मायने

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Saima Siddiqui
Saima Siddiqui

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों से पहले राजधानी लखनऊ के सियासी गलियारों में एक नया मोड़ देखने को मिला है। समाजवादी पार्टी (SP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रांका और उनके सात सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल के साथ जनेश्वर मिश्र ट्रस्ट कार्यालय में करीब 90 मिनट तक बंद कमरे में गहन विचार-विमर्श किया। बैठक के बाद दोनों पक्षों ने मीडिया से दूरी बनाए रखी, लेकिन राज्य की प्रमुख विपक्षी पार्टी और Gen-Z युवाओं के नेतृत्व वाले उभरते आंदोलन के इस तालमेल ने सियासी हलचल तेज कर दी है।

युवा, शिक्षा और बेरोजगारी पर हुआ मुख्य मंथन

समाजवादी पार्टी के मुख्य प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी ने बैठक की पुष्टि करते हुए कहा कि अखिलेश यादव युवाओं और सरकारी शिक्षा की बदहाली के खिलाफ लगातार आवाज उठाते रहे हैं, इसलिए यह संवाद स्वाभाविक था। सूत्रों के अनुसार, बैठक का मुख्य एजेंडा निम्नलिखित बिंदुओं पर केंद्रित रहा:

  • पेपर लीक और भर्ती में देरी: NEET सहित राज्य व राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी भर्ती परीक्षाओं में बार-बार होने वाले पेपर लीक और पारदर्शी परीक्षा प्रणाली की मांग।

  • शिक्षा का चरमराता ढांचा: सरकारी प्राथमिक विद्यालयों में बुनियादी सुविधाओं का अभाव और स्कूलों के बंद होने का संकट।

  • बेरोजगारी और महंगी निजी शिक्षा: युवाओं के सामने रोजगार का संकट और निजी संस्थानों की अत्यधिक फीस।

SP और CJP के बीच बढ़ता रणनीतिक समन्वय

IIT कानपुर और LSE के पूर्व छात्र तथा पूर्व मैकिन्से कंसलटेंट आशुतोष रांका के नेतृत्व वाली CJP को युवाओं और शिक्षित कार्यकर्ताओं का बड़ा समर्थन मिल रहा है। इससे पहले दिल्ली के जंतर-मंतर पर CJP के 36 दिनों तक चले प्रदर्शन में सपा सांसद डिंपल यादव और धर्मेंद्र यादव समर्थन देने पहुंचे थे। वहीं, राजस्थान में “स्कूल ठीक करो” अभियान के दौरान रांका पर हुए हमले की अखिलेश यादव ने सार्वजनिक निंदा की थी।

इस मुलाकात के 7 प्रमुख राजनीतिक मायने

  • Gen-Z वोट बैंक की लामबंदी: अखिलेश यादव की नजर पहली बार वोट डालने वाले युवाओं और शहरी मध्यम वर्ग के Gen-Z वोटर्स को सपा के साथ जोड़ने पर है।

  • शिक्षा पर सत्ता-विरोधी माहौल: CJP के “स्कूल ठीक करो” अभियान और सपा के एजेंडे का मेल सत्तारूढ़ दल के खिलाफ एक मजबूत मुद्दा आधारित विमर्श तैयार कर सकता है।

  • PDA से आगे विस्तार: अपने पारंपरिक ‘PDA’ (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) आधार के साथ-साथ सपा अब शिक्षित और गैर-पारंपरिक नागरिक वर्गों तक अपनी पहुंच बढ़ा रही है।

  • संगठनात्मक सुरक्षा और नेटवर्क: CJP को मुख्यधारा की बड़ी राजनीतिक छतरी और सुरक्षा मिल रही है, जबकि सपा को जमीन पर सक्रिय युवा कार्यकर्ताओं का कैडर हासिल हो रहा है।

  • रणनीति का शुरुआती परीक्षण: यह बैठक औपचारिक चुनावी गठबंधन या सीट-बंटवारे से पहले संयुक्त जमीनी आंदोलनों के समन्वय की संभावनाओं को परखने का मंच है।

  • सरकार पर चौतरफा दबाव: छात्र ऊर्जा और सपा के विशाल कैडर का मेल लखनऊ से दिल्ली तक बड़े जन-आंदोलन खड़े करने का दम रखता है।

  • पेपर लीक को केंद्रीय मुद्दा बनाना: आगामी विधानसभा चुनावों में जातीय समीकरणों से इतर पेपर लीक, बेरोजगारी और छात्र अधिकारों को मुख्य चुनावी मुद्दा बनाने की रणनीति स्पष्ट दिखाई दे रही है।