सैनिकों के त्याग से रोशन हैं दिवाली के दीये, जवानों से बोले राजनाथ सिंह

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साक्षी चतुर्वेदी
साक्षी चतुर्वेदी

देशभर में धूमधाम से मनाए जा रहे प्रकाश के पावन पर्व दीपावली के खास मौके पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सिक्किम (Sikkim) स्थित रणनीतिक रूप से बेहद अहम भारत-चीन सीमा (India-China Border) पर पहुंचकर सेना के जांबाज जवानों के साथ त्योहार की खुशियां बांटीं।

रक्षा मंत्री ने जवानों का मुंह मीठा कराया और कहा कि आज पूरा देश जो रोशनी और शांति के साथ दिवाली मना रहा है, वह सिर्फ हमारे सैनिकों के अदम्य साहस, त्याग और अनुशासन की बदौलत ही संभव हो पाया है।

शून्य से नीचे तापमान में जवानों का बढ़ाया मनोबल

जब पूरा देश अपने परिवारों के साथ दीपावली मना रहा था, तब देश की सीमाओं की रक्षा के लिए शून्य से नीचे के जमा देने वाले तापमान और दुर्गम पहाड़ियों पर मुस्तैद भारतीय जवानों का मनोबल बढ़ाने रक्षा मंत्री स्वयं मोर्चे पर पहुंचे।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह रविवार को पश्चिम बंगाल के सुकना आर्मी बेस (Sukna Army Base) से हेलीकॉप्टर के जरिए सिक्किम के शेरा थांग पहुंचे। इस मौके पर उनके साथ थल सेना प्रमुख (COAS) जनरल धीरज सेठ और सेना के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे।

1967 के अमर बलिदानियों को दी श्रद्धांजलि

सिक्किम पहुंचने के बाद रक्षा मंत्री ने नाथू ला पास (Nathu La Pass) के निकट स्थित शेरा थांग युद्ध स्मारक (Sherathang War Memorial) पर पुष्पांजलि अर्पित कर देश के वीर सपूतों को याद किया।

राजनाथ सिंह ने बताया कि यह स्मारक 1967 में नाथू ला और चो ला की ऐतिहासिक झड़पों में चीनी सेना को खदेड़ने और सर्वोच्च बलिदान देने वाले भारतीय सेना के वीरों की स्मृति में बनाया गया है। उन्होंने कहा कि यह स्मारक आने वाली पीढ़ियों को देशभक्ति और मातृभूमि की रक्षा के लिए हमेशा प्रेरित करता रहेगा।

‘जवानों का साहस ही दिवाली का सबसे बड़ा दीया’

शेरा थांग में तैनात सेना के जवानों को संबोधित करते हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने उनके त्याग की तुलना दिवाली के दीये से की। उन्होंने कहा, “अगर आज पूरा देश शांति और सुरक्षा के साथ दीपावली मना रहा है, तो यह हमारे सेना के जवानों के त्याग का ही परिणाम है। शेरा थांग में मौजूद हर एक जवान दिवाली के एक जलते हुए दीये के समान है। जिस तरह दीया बिना शोर किए अंधेरे से लड़ता है, उसी तरह हमारे जवानों की मौजूदगी पूरे देश में सुरक्षा का विश्वास जगाती है।”

इस दौरान रक्षा मंत्री ने व्यक्तिगत रूप से जवानों को अपने हाथों से मिठाई खिलाई और देश की अथक सेवा के लिए उनका आभार व्यक्त किया।

‘अनुशासन ही सेना की असली ताकत’

आधुनिक युद्ध प्रणाली और तकनीकी विकास का जिक्र करते हुए रक्षा मंत्री ने स्पष्ट किया कि युद्ध में मानवीय साहस का कोई विकल्प नहीं हो सकता।

उन्होंने कहा, “आधुनिक सैन्य तकनीक चाहे कितनी भी उन्नत क्यों न हो जाए, लेकिन अगर सैनिकों में साहस और अनुशासन नहीं है, तो वह तकनीक बेअसर हो जाती है। हमारे जवानों का अनुशासन ही भारतीय सेना की सबसे बड़ी ताकत है।”

राजनाथ सिंह ने इस बात पर जोर दिया कि देश के अलग-अलग राज्यों, भाषाओं और संस्कृतियों से आए सैनिक एक ही मजबूत संकल्प के साथ मां भारती की रक्षा के लिए सीमा पर कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हैं।