चटगांव, सिलहट और नोआखाली वापस लेने का वक्त आ गया: निशिकांत दुबे

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शकील अहमद सैफी
शकील अहमद सैफी

बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने देश के विभाजन और तत्कालीन फैसलों को लेकर कांग्रेस और देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने मांग की है कि जिस तरह पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) को वापस लेने की बात होती है, उसी तरह अब बांग्लादेश के ‘अनधिकृत कब्जे’ वाले सिलहट, नोआखली और चटगांव बंदरगाह को भी भारत में वापस लेने का समय आ गया है।

दुबे ने दावा किया कि ये तीनों क्षेत्र प्राचीन ‘टिपरा (त्रिपुरा) साम्राज्य’ का हिस्सा थे और फिलहाल बांग्लादेश के अनधिकृत कब्जे में हैं।

कांग्रेस और बहारुल इस्लाम पर गंभीर आरोप

अपने बयान में निशिकांत दुबे ने पूर्व जज और कांग्रेस नेता बहारुल इस्लाम का जिक्र करते हुए कांग्रेस पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि बहारुल इस्लाम मुस्लिम लीग की ‘रेड आर्मी’ के सदस्य थे।

दुबे के मुताबिक, “यह वही ‘रेड आर्मी’ थी जो नोआखली नरसंहार में शामिल थी और जिसने चटगांव को पाकिस्तान में मिलाने तथा सिलहट जनमत संग्रह में अहम भूमिका निभाई थी।” उन्होंने आरोप लगाया कि इस पृष्ठभूमि के बावजूद कांग्रेस ने बहारुल इस्लाम को पहले राज्यसभा सदस्य बनाया, फिर हाई कोर्ट का जज नियुक्त किया।

बीजेपी सांसद ने कहा कि हाई कोर्ट से रिटायर होने के बाद उन्हें सुप्रीम कोर्ट का जज बनाया गया और वहां से सेवानिवृत्त होने के बाद कांग्रेस ने उन्हें दोबारा राज्यसभा भेजा।

नेहरू पर निशाना: ‘प्रधानमंत्री बनने के लिए आतुर थे’

विभाजन के वक्त के हालातों का जिक्र करते हुए बीजेपी सांसद ने जवाहरलाल नेहरू पर निशाना साधा। उन्होंने दावा किया कि नेहरू प्रधानमंत्री बनने के लिए ‘बेहद आतुर’ थे।

दुबे ने 15 अक्टूबर 1946 को हिंदू बहुल इलाके नोआखली में हुए ‘डायरेक्ट एक्शन’ का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि उस दिन एक ही दिन में करीब 10,000 हिंदुओं का कत्लेआम हुआ, लेकिन तब भी नेहरू वहां नहीं गए। उनके मुताबिक, नेहरू उस समय मुस्लिम लीग को अपनी सरकार में शामिल करने की चिंता में लगे हुए थे।

त्रिपुरा का विलय और पूर्वोत्तर का पिछड़ापन

निशिकांत दुबे ने कहा कि त्रिपुरा के महाराजा बीर बिक्रम सिंह और बाद में महारानी कंचन प्रभा ने नेहरू के फैसलों का विरोध किया था। उन्होंने बताया कि अंततः सरदार पटेल ने सेना भेजी और अक्टूबर 1948 में त्रिपुरा का भारत में विलय हुआ।

बीजेपी सांसद ने पूर्वोत्तर के वर्तमान हालात को सीधे तौर पर इन ऐतिहासिक फैसलों से जोड़ा। उन्होंने दावा किया कि चटगांव बंदरगाह भारत के हाथ से चले जाने के कारण ही आज पूरा पूर्वोत्तर पिछड़ा हुआ है और वहां का विकास बाधित हुआ है। इसी तर्क के आधार पर उन्होंने कहा कि अब इतिहास को सुधारने और चटगांव, नोआखली और सिलहट को वापस लेने का समय आ गया है।