हवा, सतह और पानी के भीतर भी हमला करने में सक्षम होंगे नए कॉर्वेट

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Lt Col Vijay Singh (डिफेंस एडिटर)
Lt Col Vijay Singh (डिफेंस एडिटर)

भारतीय नौसेना की समुद्री ताकत और रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ाने के लिए एक बड़े रक्षा समझौते पर मुहर लगी है। रक्षा मंत्रालय ने नौसेना के लिए 8 अत्याधुनिक नेक्स्ट जनरेशन कॉर्वेट (NGC) युद्धपोतों के अधिग्रहण हेतु 53,866.50 करोड़ रुपये के अनुबंध पर हस्ताक्षर किए हैं। नई दिल्ली के कर्तव्य भवन-2 में रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह की मौजूदगी में इस अहम सौदे को अंतिम रूप दिया गया।

5 करोड़ से अधिक मानव-दिवस रोजगार का अनुमान

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर पोस्ट कर इस डील को देश के स्वदेशी शिपबिल्डिंग इकोसिस्टम के लिए बेहतरीन खबर बताया है। उन्होंने कहा कि नेक्स्ट जनरेशन कॉर्वेट परियोजना रक्षा क्षेत्र के सार्वजनिक उपक्रमों (DPSUs), निजी शिपयार्डों और एमएसएमई (MSMEs) सहित भारतीय औद्योगिक साझेदारों के आपसी तालमेल को मजबूत करेगी।

राजनाथ सिंह के मुताबिक, अगले 10 वर्षों के दौरान इन युद्धपोतों के निर्माण से शिपयार्डों में लगभग 72 लाख मानव-दिवस (man-days) और सहयोगी उद्योगों व एमएसएमई में करीब 460 लाख मानव-दिवस रोजगार सृजित होने की उम्मीद है। रक्षा मंत्री ने इसे ‘मेड-इन-इंडिया’ सामग्री और भारतीय हुनर को बढ़ावा देने वाला कदम बताया, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मेक इन इंडिया संकल्प को मजबूती प्रदान करेगा।

GRSE और GSL को मिला निर्माण का जिम्मा

इस रक्षा सौदे के तहत आठ में से 5 कॉर्वेट का निर्माण कोलकाता की गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स लिमिटेड (GRSE) करेगी। वहीं, बाकी 3 युद्धपोत गोवा शिपयार्ड लिमिटेड (GSL) द्वारा तैयार किए जाएंगे। यह भारतीय युद्धपोत डिजाइन और विनिर्माण के क्षेत्र में एक बड़ा कदम है, क्योंकि यह पहली बार है जब नौसेना द्वारा पूरी तरह स्वदेशी स्तर पर डिजाइन किए गए इन युद्धपोतों को प्रतिस्पर्धी प्रक्रिया के जरिए चुनी गई रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियां तैयार कर रही हैं।

अत्याधुनिक मिसाइलों और सेंसर्स से लैस होंगे जहाज

नेक्स्ट जनरेशन कॉर्वेट हवा, सतह और पानी के भीतर किसी भी तरह के खतरे से निपटने में पूरी तरह सक्षम होंगे। इन युद्धपोतों में अत्याधुनिक मिसाइलें, उन्नत हथियार और नए सेंसर्स लगाए जाएंगे। नौसेना के बेड़े में इनके शामिल होने से समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा, पनडुब्बी रोधी अभियानों, तटीय सुरक्षा और निगरानी क्षमताओं में इजाफा होगा।