दान पर किसने लगाई सेंध? सुप्रीम कोर्ट में यूपी सरकार ने क्या बताया

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गौरव त्रिपाठी
गौरव त्रिपाठी

अयोध्या के भव्य श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए दान की चोरी के मामले में उत्तर प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में बड़ा खुलासा किया है। भारत के सॉलिसिटर जनरल (SGI) तुषार मेहता ने उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से शीर्ष अदालत को बताया कि मंदिर के दान की गिनती करने वाले कर्मचारियों और अधिकारियों ने ही पैसों की हेराफेरी को अंजाम दिया है।

निजी खातों में जमा कराई गई दान की रकम

एसजीआई तुषार मेहता ने कोर्ट को पूरी कार्यप्रणाली की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि जिन लोगों को दानपात्र से पैसे निकालने और उनकी गिनती का जिम्मा सौंपा गया था, वे गिनती के दौरान ही नकदी निकाल लेते थे। इसके बाद चुराए गए इन पैसों को आरोपी या तो अपने निजी बैंक खातों में जमा करा देते थे या फिर अन्य जगहों पर निवेश कर देते थे।

ट्रायल कोर्ट को कार्यवाही आगे बढ़ाने के निर्देश

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान यह अवगत कराया गया कि पुलिस इस मामले की जांच पूरी कर चुकी है और अदालत में चार्जशीट भी दाखिल की जा चुकी है। पूरा घटनाक्रम सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने संबंधित ट्रायल कोर्ट को निर्देश दिया है कि वह मामले में कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई जारी रखे। शीर्ष अदालत ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि उसने इस मामले के गुण-दोष पर अपनी तरफ से कोई टिप्पणी नहीं की है, ताकि ट्रायल कोर्ट पूरी तरह स्वतंत्र रूप से मामले की सुनवाई कर सके।

CCTV फुटेज से खुली पोल, 8 आरोपी गिरफ्तार

यह पूरा मामला तब खुला जब जांच के दौरान मंदिर परिसर के सीसीटीवी फुटेज खंगाले गए। फुटेज में गिनती के दौरान चोरी के दर्जनों मामले सामने आए। इस खुलासे के बाद राज्य सरकार ने विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया। पुलिस और एसआईटी ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए दान की गिनती और देखरेख से जुड़े कुल 8 आरोपियों को गिरफ्तार किया।

लाखों की नकदी बरामद

गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान टिंकू यादव, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, अविनाश शुक्ला, मनीष यादव, सुभाष श्रीवास्तव, करुणेश पांडेय और रामशंकर मिश्रा के रूप में हुई है। एसआईटी ने इन आरोपियों के पास से लाखों रुपये की नकदी भी बरामद की है। पूरी जांच के आधार पर ही जांच एजेंसी ने इन सभी 8 आरोपियों के खिलाफ अदालत में आरोपपत्र (चार्जशीट) पेश किया है।