‘मेरी बेटी से मिलवा दीजिए’, खगड़िया SP की पत्नी पटना में धरने पर बैठीं

बिहार कैडर के आईपीएस अधिकारी और खगड़िया के पुलिस अधीक्षक (SP) भानु प्रताप सिंह का पारिवारिक विवाद अब पटना पहुंच गया है। रविवार को उनकी पत्नी पूजा सिंह अपनी छह साल की बेटी से मिलने की मांग को लेकर सम्राट चौधरी के आवास के बाहर धरने पर बैठ गईं। हंगामे की सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में पटना पुलिस मौके पर पहुंची और पूजा को अपने साथ ले गई।
‘भैया, मेरी बेटी से मिलवा दीजिए’
पूजा सिंह ने मीडिया से बातचीत में कहा कि उन्हें अब केवल सम्राट चौधरी से ही आखिरी उम्मीद बची है। उन्होंने उन्हें ‘भैया’ कहकर अपील की कि किसी तरह उन्हें उनकी बेटी से मिलवा दिया जाए। पूजा के मुताबिक, उनकी छह साल की बच्ची फिलहाल खगड़िया में एसपी भानु प्रताप के पास ही रह रही है। महिला ने स्पष्ट किया कि उन्होंने अब तक कोई कानूनी कदम नहीं उठाया है और न ही तलाक की अर्जी दी है; उनकी एकमात्र मांग अपनी बच्ची से मिलना है।
भरतपुर में भी बंद मिले थे ससुराल के दरवाजे
इस दंपति का विवाद नया नहीं है। इससे पहले राजस्थान के भरतपुर स्थित मथुरा गेट थाने में भी यह मामला पहुंच चुका है। आईपीएस भानु प्रताप मूल रूप से उत्तर प्रदेश के फतेहपुर के रहने वाले हैं और उनका परिवार भरतपुर की गीता कॉलोनी में किराए पर रहता है। पूजा का आरोप है कि जब वह बेटी से मिलने भरतपुर गई थीं, तो करीब एक घंटे तक दरवाजा खटखटाने के बाद भी ससुराल वालों ने गेट नहीं खोला। इसके बाद वह विजय नगर में अपनी ननद के घर भी गईं, लेकिन वहां भी उन्हें प्रवेश नहीं मिला।
पुलिस ने कार्रवाई से कर दिया था इनकार
ससुराल में एंट्री न मिलने के बाद पूजा भरतपुर के मथुरा गेट थाने पहुंची थीं। पूजा के मुताबिक, वहां के एसएचओ ने आईपीएस भानु प्रताप से फोन पर बात की और इसे पूरी तरह से पारिवारिक विवाद बताते हुए तत्काल किसी भी तरह की कार्रवाई करने से इनकार कर दिया था। इसके बाद पूजा देर रात तक थाने में ही बैठी रही थीं।
पत्नी ने की नौकरी, पति ने की UPSC की तैयारी
पूजा का मायका राजस्थान के झुंझुनूं जिले के उदयपुरवाटी स्थित तिवारी का वास गांव में है। उन्होंने बताया कि भानु प्रताप से उनकी पहली मुलाकात 2015 में एक कार्यक्रम के दौरान हुई थी। दोनों ने परिवारों की नाराजगी के बावजूद प्रेम विवाह किया था। शादी के शुरुआती पांच सालों तक पूजा ने भरतपुर के एक निजी स्कूल में शिक्षिका के तौर पर काम कर घर चलाया, जबकि इसी दौरान भानु प्रताप ने यूपीएससी (UPSC) की तैयारी की। चयन के बाद भानु प्रताप बिहार कैडर के आईपीएस अधिकारी बन गए।

