सिर्फ FIR से नहीं रुकेगी नौकरी, यूपी सरकार के नए नियमों में क्या है खास?
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उत्तर प्रदेश में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे लाखों युवाओं के लिए चयन प्रक्रिया से जुड़ा एक अहम अपडेट है। राज्य सरकार ने सरकारी भर्तियों में ‘कैरेक्टर वेरिफिकेशन’ (चरित्र सत्यापन) के नियमों को और अधिक सख्त कर दिया है। नए आदेश के मुताबिक, किसी भी हिंसक प्रदर्शन में शामिल होने वाले या मौजूदा व्यवस्था को बदलने की मंशा रखने वाले संगठनों से जुड़े युवाओं को अब सरकारी नौकरी के लिए अयोग्य माना जाएगा।
क्या है कैरेक्टर वेरिफिकेशन का नया नियम?
सरकारी भर्तियों में कैरेक्टर वेरिफिकेशन की प्रक्रिया पहले से ही लागू है, जिसका मुख्य उद्देश्य यह जाचना होता है कि अभ्यर्थी की पृष्ठभूमि आपराधिक तो नहीं है या उस पर कितने गंभीर मामले दर्ज हैं। अब सरकार ने इन नियमों का दायरा बढ़ाते हुए इसमें दो नए क्लॉज जोड़े हैं। इसके तहत, यदि कोई अभ्यर्थी किसी प्रदर्शन के दौरान हिंसा का हिस्सा बनता है या सत्ता/व्यवस्था को बदलने की हिंसक सोच रखने वाले किसी संगठन से जुड़ा पाया जाता है, तो उसे नौकरी की रेस से बाहर कर दिया जाएगा।
राजनीतिक विचारधारा के आधार पर नहीं होगी अयोग्यता
नए निर्देशों में अभ्यर्थियों के लोकतांत्रिक अधिकारों को लेकर स्थिति स्पष्ट की गई है। आदेश में साफ कहा गया है कि किसी भी राजनीतिक दल से जुड़े होने या व्यक्तिगत राजनीतिक विचारधारा के आधार पर किसी भी युवा को अयोग्य घोषित नहीं किया जाएगा। राजनीतिक विचारधारा को अभ्यर्थी के ‘कैरेक्टर’ का पैमाना नहीं माना गया है।
FIR दर्ज होने पर तुरंत बाहर नहीं होंगे अभ्यर्थी
नए नियमों में एफआईआर (FIR) को लेकर भी स्थिति साफ की गई है। अगर किसी अभ्यर्थी के खिलाफ कोई एफआईआर दर्ज है, तो उसे तुरंत अयोग्य नहीं माना जाएगा, क्योंकि मामला दर्ज होने का मतलब दोष सिद्ध होना नहीं है। ऐसे मामलों में पुलिस को एक महीने के भीतर अपनी विस्तृत जांच रिपोर्ट पेश करनी होगी। इस पुलिस रिपोर्ट के आधार पर ही संबंधित विभाग अभ्यर्थी की उम्मीदवारी पर अंतिम फैसला लेगा।
नए बदलावों का अभ्यर्थियों पर असर
इस सख्त नियमावली के दो अलग-अलग पहलू सामने आ रहे हैं:
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पहला पहलू (चिंता): अगर कोई अभ्यर्थी किसी शांतिपूर्ण प्रदर्शन में शामिल होता है और वहां अचानक हिंसा भड़क जाती है, तो उसे भी सीधे बाहर किए जाने का जोखिम है। इसके अलावा, प्रतिबंधित या अयोग्य संगठनों की स्पष्ट सूची को लेकर भी कुछ असमंजस की स्थिति है।
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दूसरा पहलू (राहत): यह नियम उन युवाओं के लिए बड़ी राहत है, जिनके नाम किसी रंजिश या झूठी शिकायत के चलते एफआईआर में दर्ज करा दिए जाते थे। पहले केवल एफआईआर दर्ज होने से करियर पर संकट आ जाता था, लेकिन अब पुलिस की पूरी जांच रिपोर्ट पेश होने के बाद ही योग्यता या अयोग्यता तय की जाएगी।

