शांति की कोशिशों को झटका! ईरान ने कतर के प्रस्ताव को बताया अस्वीकार्य

अमेरिका और इजरायल के साथ जारी तनाव के बीच ईरान ने कतर द्वारा पेश किए गए किसी भी नए शांति प्रस्ताव की बात से साफ इनकार किया है। रॉयटर्स से बातचीत में वार्ता में शामिल एक वरिष्ठ ईरानी अधिकारी ने बुधवार को कहा कि कतर ने ईरान को कोई नया प्रस्ताव नहीं दिया है, बल्कि केवल ऐसे विचार रखे हैं जिन्हें तेहरान ‘अस्वीकार्य’ मानता है। अधिकारी ने स्पष्ट किया कि अपने परमाणु कार्यक्रम पर कोई लचीलापन न दिखाने के ईरान के रुख में कोई बदलाव नहीं आया है।
यह बयान उस पिछली रिपोर्ट के एकदम उलट है, जिसमें दावा किया गया था कि कतरी मध्यस्थों ने रविवार को तेहरान को एक शांति समझौते का ड्राफ्ट सौंपा है।
तेहरान समिट से बंटे ईरानी हार्डलाइनर्स
कतर के प्रस्ताव को लेकर ये विरोधाभासी दावे ऐसे समय में सामने आए हैं, जब सऊदी अरब, पाकिस्तान, तुर्की और ईरान के बीच हुई एक उच्च-स्तरीय कूटनीतिक बैठक ने ईरानी हार्डलाइनर्स (कट्टरपंथियों) के बीच मतभेदों को उजागर कर दिया है।
बहस इस बात पर छिड़ी है कि क्या क्षेत्रीय वार्ता से संघर्ष खत्म हो सकता है या यह तेहरान को यमन के मुद्दे पर रियायतें देने के लिए मजबूर करने की चाल है।
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हुती विद्रोहियों का मुद्दा: कट्टरपंथी अखबार ‘केहान’ के मैनेजिंग एडिटर होसैन शरियातमदारी ने “तेहरान समिट: पानी या मृगतृष्णा?” शीर्षक वाले एक लेख में इस बैठक के उद्देश्य पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि मक्का रक्षा समझौते (Mecca defence pact) में शामिल देशों के साथ सहयोग, ईरान पर हुती विद्रोहियों (Houthis) से दूरी बनाने का दबाव बढ़ा सकता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि तेहरान इस गुट का साथ कभी नहीं छोड़ेगा।
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यमन ज्यादा बड़ी चिंता: पूर्व संसदीय राष्ट्रीय सुरक्षा समिति के अध्यक्ष हेशमतुल्लाह फलाहतपिशेह ने ‘खबार ऑनलाइन’ से कहा कि दौरा करने वाले देशों के लिए वाशिंगटन के साथ ईरान के टकराव से ज्यादा बड़ा मुद्दा यमन है। उन्होंने कहा, “जब तक यमन मुद्दा नहीं सुलझता, ईरान का मुद्दा एजेंडे में नहीं आएगा।”
गारंटी और समझौते पर क्या है ईरान का रुख?
ईरानी विश्लेषक इस बात पर भी सवाल उठा रहे हैं कि क्या क्षेत्रीय ताकतें इस बात की गारंटी दे सकती हैं कि समझौता होने के बाद वाशिंगटन और इजरायल दोबारा सैन्य कार्रवाई शुरू नहीं करेंगे। ईरान के सरकारी अखबार की डिप्लोमैटिक एडिटर मरियम सलारी ने तर्क दिया कि सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि तेहरान कोई रियायत देता है, तो उसे एक और युद्ध न होने का क्या भरोसा मिलेगा। वहीं, पूर्व विदेश मंत्री मोहम्मद जवाद जरीफ ने गैर-आक्रामकता और विश्वास बहाली पर आधारित एक क्षेत्रीय सुरक्षा ढांचे का आह्वान किया है।
ट्रंप और नेतन्याहू के आक्रामक बयान
इस बीच, अमेरिका और इजरायल ने अपने तेवर और कड़े कर लिए हैं।
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डोनाल्ड ट्रंप: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अगले हफ्ते होने वाले मिडटर्म चुनावों के बाद ईरान पर नए सैन्य हमलों की संभावना से इनकार नहीं किया है। संभावित हमलों के बारे में पूछे जाने पर ट्रंप ने पत्रकारों से कहा, “मैं आपको यह नहीं बता सकता, लेकिन कुछ भी संभव है।” ट्रंप ने दावा किया कि तेहरान समझौता चाहता है, लेकिन शायद ईरानी नेता चुनावों के बाद तक बातचीत टाल रहे हैं।
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बेंजामिन नेतन्याहू: इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कड़ा रुख अपनाते हुए घोषणा की है कि इजरायल के पास ट्रंप के साथ मिलकर ‘ईरानी खतरे’ को “हमेशा के लिए खत्म करने” का एक ऐतिहासिक अवसर है। उनका यह बयान इजरायल के अनिर्णायक संसदीय चुनावों के बाद पैदा हुई राजनीतिक अनिश्चितता के बीच आया है।
क्या था कतर का शांति प्रस्ताव?
इससे पहले बुधवार को रॉयटर्स ने वार्ता से जुड़े एक अधिकारी के हवाले से बताया था कि कतर ने वाशिंगटन और तेहरान के बीच सात दिवसीय विश्वास बहाली प्रक्रिया का एक ड्राफ्ट तैयार किया था, जिसे संभावित रूप से कई देशों की गारंटी मिल सकती थी। लेकिन ईरान का कहना है कि यह एक औपचारिक शांति प्रस्ताव नहीं था।
वाशिंगटन की मांग है कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम बातचीत का मुख्य हिस्सा होना चाहिए, जबकि तेहरान की शर्त है कि ईरानी बंदरगाहों की अमेरिकी नाकेबंदी खत्म की जाए और उसके तेल निर्यात पर लगे प्रतिबंध हटाए जाएं।

