‘पहला प्यार दूसरी बार’? नए कलाकारों का रोमांस दिल जीतता है, लेकिन….

स्कूल टाइम क्रश, प्यार-मोहब्बत की उलझनों और नई पीढ़ी की अनिश्चितताओं पर आधारित कहानियों के दौर में निर्देशक अनुज सैनी की फिल्म ‘पहला प्यार दूसरी बार’ सिनेमाघरों में आ गई है। इस रोमांटिक-कॉमेडी फिल्म में कई नए चेहरों को एक साथ उतारा गया है, जो अपने सहज अभिनय से दर्शकों को आकर्षित करते हैं। हालांकि, घिसे-पिटे प्रसंग और जानी-पहचानी कहानी इस फिल्म को उतनी गहराई नहीं दे पाते, जिसकी उम्मीद की जा रही थी। क्रिटिक्स की ओर से इसे 2.5/5 की रेटिंग दी गई है।
क्या है ‘पहला प्यार दूसरी बार’ की कहानी?
फिल्म की कहानी तीन दोस्तों—गौतम (स्पर्श वालिया), वेदांत (कुणाल वैद) और शिवी (सरगुन कौर लूथरा) के इर्द-गिर्द घूमती है, जो कॉरपोरेट जिंदगी की भागदौड़ और अपनी बेरंग लव लाइफ से परेशान हैं। स्कूल रीयूनियन की खबर मिलते ही तीनों अपने पुराने क्रश से मिलने और जिंदगी में रोमांस का तड़का लगाने निकल पड़ते हैं।
यहाँ अधूरी मोहब्बत को दूसरा मौका देने की उनकी कोशिशें नई उलझनों को जन्म देती हैं। गौतम की नजदीकियां गेहना (अलीशा चोपड़ा) से बढ़ती हैं, लेकिन गेहना का कंट्रोलिंग स्वभाव उसे कमिटमेंट से पीछे हटने पर मजबूर करता है। दूसरी ओर, वेदांत अपने स्कूल टाइम क्रश सिमरन (साक्षी वैद्य) से प्यार का इजहार करता है, मगर उसकी शादी तय होने से मुश्किलें खड़ी हो जाती हैं। वहीं, शिवी अपने क्रश करण (तुषार छिब्बर) को लुभाने के चक्कर में खुद को ही बदल बैठती है।
कमजोर पटकथा और अनुमानित घटनाक्रम
निर्देशक अनुज सैनी ने फिल्म की शुरुआत एक ताजगी भरे अंदाज में की है। लव रंजन, जहान हांडा और अनुज सैनी की लिखी पटकथा कमिटमेंट फोबिया, कैजुअल रिलेशनशिप और भावनात्मक असुरक्षा जैसे मुद्दों को छूती है। हालांकि, स्कूल रीयूनियन और पुराने क्रश का विचार काफी सुना-सुनाया सा लगता है।
फिल्म का पहला हाफ अपनी दिशा तलाशता नजर आता है, जबकि दूसरे हाफ में घटनाएं गति पकड़ती हैं और कुछ कॉमिक दृश्य हंसाते हैं। हालांकि, कुछ सीन काफी नाटकीय (ओवर ड्रैमेटिक) लगते हैं, जैसे स्कूल के दिनों के क्रश के लिए बरसों बाद अचानक इस कदर दीवाना हो जाना कि रीयूनियन के महज दो दिनों में उसकी शादी तोड़ने की उम्मीद की जाए। रोचक कोहली का संगीत फिल्म का प्लस पॉइंट है, लेकिन लाउड बैकग्राउंड स्कोर थोड़ा अखरता है।
कलाकारों का अभिनय
अभिनय के मोर्चे पर फिल्म के सभी नए कलाकारों ने सराहनीय काम किया है। स्पर्श वालिया, कुणाल वैद और सरगुन कौर लूथरा की दोस्ती और आपसी केमिस्ट्री बेहद सहज और स्वाभाविक लगती है। स्पर्श ने गौतम के किरदार के साथ पूरा इंसाफ किया है, जबकि कुणाल मजनू आशिक के रूप में जंचते हैं।
अलीशा चोपड़ा ने गेहना के चुलबुले अंदाज को अच्छे से पेश किया है और स्पर्श के साथ उनके दृश्य दिलचस्प हैं। सरगुन कौर लूथरा अपने अभिनय से किरदार में गहराई लाती हैं, वहीं तुषार छिब्बर और साक्षी वैद्य ने भी अपने-अपने किरदारों को बखूबी निभाया है।
कुल मिलाकर, ‘पहला प्यार दूसरी बार’ नई पीढ़ी के रिश्तों को दिलचस्प अंदाज में पेश करने की कोशिश करती है, लेकिन कमजोर लेखन और अनुमानित कहानी इसे एक यादगार रोमांटिक कॉमेडी बनने से रोकती है। हालांकि, यह फिल्म स्कूल के दिनों की पुरानी यादों को जरूर ताजा करती है।
क्रिटिक रेटिंग: 2.5/5

