नहीं बख्शे जाएंगे! वोटर लिस्ट में गड़बड़ी पर नवदीप रिणवा का सख्त रुख

उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनावों से पहले मतदाता सूचियों में गड़बड़ी के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। पीलीभीत जिले में एक ही एपिक कार्ड पर 13 हजार से ज्यादा वोटर दर्ज होने का मामला सामने आने के बाद चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए थे। इस बीच, मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) नवदीप रिणवा ने इसे एक आपराधिक कृत्य करार देते हुए इस मामले में सख्त कार्रवाई की जानकारी दी है।
डेटा ऑपरेटर बर्खास्त, जिम्मेदार एसडीएम पर एफआईआर
मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने प्रेस को जानकारी देते हुए बताया कि इस गंभीर मामले में डेटा ऑपरेटर को बर्खास्त कर दिया गया है। जिन एसडीएम (SDM) के कार्यकाल में यह गड़बड़ी हुई, उन्हें जिम्मेदार मानते हुए उनके खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज कराई गई है। इसके साथ ही पूरे जिले की विधानसभाओं की जांच की जा रही है और सभी जिलों से इस बिंदु पर तीन दिन के भीतर रिपोर्ट मांगी गई है। सीईओ ने बताया कि सभी जिला निर्वाचन अधिकारियों की बैठक बुलाई गई है, और चेतावनी दी गई है कि भविष्य में यदि ऐसी गलतियां हुईं तो कड़ी जवाबदेही तय की जाएगी।
जानबूझकर किया गया आपराधिक कृत्य
सीईओ नवदीप रिणवा के मुताबिक, यह गड़बड़ी जानबूझकर किया गया आपराधिक कृत्य थी। वोटर्स रजिस्ट्रेशन सेंटर के कंप्यूटर सहायक ने बिना फिजिकल फॉर्म-8 प्राप्त किए सिस्टम में एंट्री कर दी थी, जिसे उन्होंने आपराधिक विश्वासघात (क्रिमिनल ट्रस्ट ब्रीच) बताया। इसके अलावा दो ईआरओ (ERO) द्वारा गलत फॉर्म अप्रूव किए जाने का मामला भी सामने आया है। यह पूरी प्रक्रिया 31 मई से 29 अगस्त के बीच हुई, जो कि एसआईआर (SIR) प्रक्रिया पूरी होने के बाद का समय है।
‘राम ने यादव को मारा’ जैसे नामों पर भी होगी कार्रवाई
एमएलसी (MLC) वोटर लिस्ट में ‘राम ने यादव को मारा’ और ‘मूर्ख चंद यादव’ जैसे अजीबोगरीब नाम आने के सवाल पर सीईओ ने स्पष्ट किया कि संबंधित ईआरओ और एईआरओ से इस त्रुटि के बारे में जवाब तलब किया गया है। जवाब मिलने के बाद इस पर उचित निर्णय लिया जाएगा। उन्होंने बताया कि समाजवादी पार्टी 10 अप्रैल के बाद लगातार शिकायतें भेज रही हैं, जो मुख्य रूप से डुप्लीकेसी (दोहरी प्रविष्टियों) से जुड़ी हैं।
डुप्लीकेसी रोकने के लिए नया सिस्टम तैयार
मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने कहा कि एसआईआर के शुरुआती चरणों के दौरान डुप्लीकेसी की समस्या काफी हद तक दूर हो गई थी, लेकिन 6 जनवरी के बाद की गई प्रविष्टियों में यह समस्या सामने आई। निर्वाचन आयोग ने अब डुप्लीकेसी रोकने के लिए एक नया सिस्टम तैयार किया है, जिससे फॉर्म स्तर पर ही गड़बड़ी पकड़ में आ रही है। मतदाताओं के पंजीकरण के लिए विशेष शिविर भी लगाए जा रहे हैं, जहां फॉर्म 6, 7 और 8 उपलब्ध हैं। आयोग का प्रयास है कि 12 नवंबर को जब ड्राफ्ट लिस्ट प्रकाशित होगी, तब तक इस समस्या को बहुत हद तक सुलझा लिया जाए।

