सऊदी में हमलों का खतरा, तेल कंपनी अरामको ने उठाया बड़ा सुरक्षा कदम

यमन के हूती विद्रोहियों और सऊदी अरब के बीच चल रहा संघर्ष एक नए और बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। सऊदी अरब के हवाई अड्डों और महत्वपूर्ण ऊर्जा ठिकानों पर हो रहे हमलों में अब तक कई नागरिकों की जान जा चुकी है। बिगड़ते हालात के बीच दिग्गज तेल कंपनी सऊदी अरामको (Saudi Aramco) ने अपने मुख्यालय से कर्मचारियों को निकाल लिया है, जबकि अमेरिका ने अपने गैर-आपातकालीन (Non-emergency) राजनयिक कर्मचारियों को तुरंत देश छोड़ने का आदेश दिया है।
दम्माम एयरपोर्ट और तेल क्षेत्र पर हमला, एक भारतीय समेत 4 की मौत
बुधवार रात दम्माम के किंग फहद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर हुए हमले में एक भारतीय और एक सऊदी नागरिक की मौत हो गई। इस घटना में दो भारतीयों सहित आठ अन्य लोग घायल हुए हैं।
इसके अलावा, अरामको के शायबाह तेल क्षेत्र (Shaybah oilfield) पर हुए ड्रोन हमले को हवा में नष्ट किए जाने के बाद उसके मलबे की चपेट में आने से एक फिलिपिनो और एक नेपाली नागरिक की जान चली गई। इस घटना में भी एक भारतीय और एक पाकिस्तानी नागरिक घायल हुआ है। इन हमलों ने यह साबित कर दिया है कि अहम ऊर्जा प्रतिष्ठानों के आसपास काम करने वाले नागरिक लगातार खतरे में हैं।
अरामको मुख्यालय खाली, अमेरिका ने राजनयिकों को वापस बुलाया
सुरक्षा चिंताओं के बीच सऊदी अरामको ने दहरान (Dhahran) स्थित अपने मुख्य संचालन केंद्र से बचे हुए कर्मचारियों को भी बाहर निकाल लिया है। कर्मचारियों को अगले आदेश तक ‘वर्क फ्रॉम होम’ करने को कहा गया है। अरामको मुख्यालय के एक हिस्से को हमले में भारी नुकसान पहुंचने की खबरें हैं।
दूसरी तरफ, वाशिंगटन ने बड़ा कदम उठाते हुए सऊदी अरब में तैनात अपने गैर-जरूरी सरकारी कर्मचारियों और उनके परिवारों को देश छोड़ने का आदेश दिया है। अमेरिकी विदेश विभाग ने नागरिक हवाई अड्डों और बुनियादी ढांचे पर हो रहे हूती हमलों को इस फैसले की मुख्य वजह बताया है।
रियाद और मदीना पर भी मंडरा रहा खतरा
सऊदी वायु रक्षा प्रणाली (Air Defence) लगातार साम्राज्य के अलग-अलग हिस्सों में ड्रोन हमलों को नाकाम कर रही है। गुरुवार को रियाद और मदीना के क्षेत्रों में भी ड्रोन मार गिराए गए। इस संघर्ष ने अब क्षेत्रीय युद्ध का रूप लेना शुरू कर दिया है। ब्रिटेन ने मिसाइलों को रोकने के लिए आरएएफ (RAF) टाइफून गश्त सहित अतिरिक्त सैन्य सहायता की घोषणा की है, जबकि हूतियों ने लाल सागर के व्यापारिक मार्गों को अवरुद्ध करने की धमकी दी है।

