वोटर लिस्ट पर बड़ा विवाद, पीलीभीत में दो SDM और ऑपरेटर पर FIR

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महेंद्र सिंह
महेंद्र सिंह

उत्तर प्रदेश के पीलीभीत में एसआईआर (SIR – Special Intensive Revision) से जुड़े कथित गड़बड़ी के मामले में प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। 22 अक्टूबर 2026 को इस मामले में दो एसडीएम (SDM) और एक कंप्यूटर ऑपरेटर सहित कुल 3 लोगों के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज की गई है। इस कार्रवाई के बाद से जिले के प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है।

किन पर हुई FIR और क्या है प्रशासन का कदम?

दर्ज की गई एफआईआर में अमरिया के एआरओ (ARO) और एसडीएम मयंक गोस्वामी, तथा एसडीएम हेमंत चौधरी के नाम शामिल हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए पीलीभीत के जिलाधिकारी (DM) आलोक कुमार ने एसआईआर में गड़बड़ी की शिकायतों की जांच के लिए एक विशेष टीम का गठन कर दिया है।

डिंपल यादव का कड़ा प्रहार: ‘CEC क्यों नहीं लेते नैतिक जिम्मेदारी?’

पीलीभीत में हुई इस कार्रवाई के बाद विपक्षी दल हमलावर हो गए हैं। समाजवादी पार्टी (SP) की मैनपुरी सांसद डिंपल यादव ने तीखे सवाल उठाते हुए कहा कि यदि विधानसभा स्तर पर हुई लापरवाही के लिए पीलीभीत के कर्मचारियों पर कार्रवाई हो सकती है, तो पूरे उत्तर प्रदेश में एसआईआर की गंभीर अनियमितताओं की नैतिक जिम्मेदारी मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) क्यों नहीं ले रहे हैं?

डिंपल यादव ने स्पष्ट रूप से कहा कि “नैतिकता का तकाजा है कि जिम्मेदार लोग अपना इस्तीफा दें और दोषी पाए जाने पर उन्हें जेल भेजा जाए।”

क्या है पूरा मामला? कांग्रेस ने उठाया था मुद्दा

पीलीभीत का यह मामला तब सुर्खियों में आया जब राजधानी लखनऊ में कांग्रेस की नई प्रदेश अध्यक्ष आराधना मिश्रा ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए एसआईआर (वोटर लिस्ट पुनरीक्षण) में भारी अनियमितताओं का दावा किया था।

  • 13 हजार नामों में बदलाव: आराधना मिश्रा ने आरोप लगाया था कि पीलीभीत में 10 अप्रैल को एसआईआर की अंतिम सूची जारी होने के बाद 13 हजार से ज्यादा मतदाताओं के नामों में बदलाव कर दिया गया।

  • EPIC नंबर वही, नाम बदल गए: इससे पहले 21 अक्टूबर को यूपी कांग्रेस के प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने दस्तावेजों के साथ दावा किया था कि पीलीभीत सदर विधानसभा क्षेत्र में 13,150 मतदाताओं के नाम बदल दिए गए हैं, जबकि उनके ईपीआईसी (EPIC) नंबर और सीरियल नंबर पहले जैसे ही हैं। ऑनलाइन चेक करने पर उसी ईपीआईसी नंबर पर नाम और पिता का नाम बदला हुआ दिख रहा है।

कांग्रेस का कहना है कि उन्होंने अपनी टीम के माध्यम से इन मामलों का सत्यापन किया है। समाजवादी पार्टी भी लगातार मतदाता सूची (Voter List) में कथित धांधली और अनियमितताओं को लेकर चुनाव आयोग पर सवाल उठाती रही है।