इटावा, जसवंतनगर और भरथना: तीन सीटें, कई सवाल, 2027 की चुनावी जंग

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दीपक श्रीवास्तव

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर राजनीतिक दलों ने अपनी गोटियां बिछानी शुरू कर दी हैं। राज्य की सत्ता की लड़ाई में इटावा जिला हमेशा केंद्र में रहता है। समाजवादी पार्टी के संस्थापक रहे दिवंगत मुलायम सिंह यादव की राजनीतिक कर्मभूमि और सैफई से जुड़े होने के कारण यह क्षेत्र सपा का मजबूत सियासी आधार माना जाता रहा है।

हालांकि 2017 और 2022 के विधानसभा चुनावों ने साबित किया है कि जिले का मिजाज एकतरफा नहीं रहा है। 2017 में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने जिले की तीनों सीटों पर क्लीन स्वीप किया था। वहीं 2022 में सपा ने वापसी करते हुए तीन में से दो सीटों—जसवंतनगर और भरथना—पर जीत दर्ज की, जबकि इटावा सदर सीट पर भाजपा बेहद करीबी मुकाबले में अपना कब्जा बरकरार रखने में सफल रही थी।

2022 विधानसभा चुनाव: इटावा की तीनों सीटों का रिपोर्ट कार्ड

विधानसभा सीट 2022 में विजेता पार्टी रनर-अप प्रत्याशी पार्टी जीत का अंतर (वोट)
जसवंतनगर शिवपाल सिंह यादव सपा विवेक शाक्य भाजपा 90,979
इटावा सदर सरिता भदौरिया भाजपा सर्वेश कुमार शाक्य सपा 3,984
भरथना (SC) राघवेंद्र कुमार सिंह सपा डॉ. सिद्धार्थ शंकर दोहरे भाजपा 7,559

1. जसवंतनगर: शिवपाल यादव का अभेद्य दुर्ग

जसवंतनगर विधानसभा सीट सपा और यादव परिवार की सियासी साख का प्रतीक है। वरिष्ठ नेता शिवपाल सिंह यादव लंबे समय से इस सीट का प्रतिनिधित्व करते आ रहे हैं। 2022 के चुनाव में शिवपाल ने 90,979 वोटों के भारी अंतर से जीत दर्ज की थी, जो जिले में जीत का सबसे बड़ा अंतर था।

2027 के चुनाव में सपा के सामने अपने इस गढ़ में भारी बढ़त को बनाए रखने की चुनौती होगी, वहीं भाजपा के लिए संगठनात्मक स्तर पर अपनी पैठ मजबूत कर मुकाबले को कड़ा करने का जिम्मा रहेगा। क्षेत्र में सड़कों की स्थिति, कृषि संकट, स्थानीय रोजगार और विधायक की जमीनी सक्रियता जैसे मुद्दे चर्चा में रहेंगे।

2. इटावा सदर: 3,984 वोटों की नजदीकी जंग

इटावा सदर सीट पर 2022 में जिले का सबसे दिलचस्प और करीबी मुकाबला देखने को मिला था। भाजपा की सरिता भदौरिया ने 98,150 वोट पाकर जीत हासिल की, जबकि सपा के सर्वेश कुमार शाक्य को 94,166 वोट मिले थे। महज 3,984 वोटों की यह मामूली बढ़त बताती है कि सीट पर दोनों दलों के बीच कांटे की टक्कर रही थी।

इस सीट पर बहुजन समाज पार्टी (बसपा) का प्रदर्शन भी अहम रहा था। बसपा उम्मीदवार कुलदीप गुप्ता उर्फ संतू ने 46,525 वोट हासिल किए थे। ऐसे में 2027 में भाजपा के लिए अपने पुराने आधार को बचाना और सपा के लिए इस मामूली अंतर को पाटना सबसे बड़ी प्राथमिकता होगी।

3. भरथना (SC): आरक्षित सीट पर सीधी टक्कर

अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित भरथना विधानसभा सीट पर 2022 में सपा के राघवेंद्र कुमार सिंह ने भाजपा के डॉ. सिद्धार्थ शंकर दोहरे को 7,559 वोटों से हराया था। इस सीट पर भी बसपा ने उल्लेखनीय उपस्थिति दर्ज कराई थी, जहां पार्टी प्रत्याशी कमलेश अंबेडकर को 37,599 वोट मिले थे।

2027 में भरथना सीट पर प्रत्याशियों की सामाजिक स्वीकार्यता, ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी विकास और स्थानीय समस्याएं चुनावी दिशा तय करेंगी। भाजपा अपनी 2022 की हार की समीक्षा कर वापसी की कोशिश में जुटेगी, जबकि सपा इस आरक्षित सीट पर अपनी पकड़ मजबूत रखना चाहेगी।

सामाजिक संतुलन और स्थानीय मुद्दे तय करेंगे दिशा

इटावा में यादव बिरादरी के पारंपरिक सपा समर्थन के अलावा शाक्य, लोध, अनुसूचित जाति, ब्राह्मण और अन्य पिछड़ी जातियों का वोट बैंक हर सीट पर परिणाम तय करने में निर्णायक भूमिका निभाता है।