बिजनौर की 8 सीटों पर किसका दम? 2022 के नतीजे खोलते हैं कई राज

उत्तर प्रदेश की सियासत में पश्चिमी यूपी का बिजनौर जिला हमेशा से चुनावी रणनीतिकारों की प्रयोगशाला रहा है। लगभग 43 प्रतिशत मुस्लिम आबादी वाले इस जिले में दलित, जाट, सैनी और चौहान मतदाताओं का गठजोड़ हर चुनाव में नतीजों की दिशा तय करता है। 2022 के विधानसभा चुनाव में यहां भारतीय जनता पार्टी (BJP) और समाजवादी पार्टी (SP) के बीच 4-4 सीटों की सीधी बराबरी रही थी। हालांकि मतदान की असल बारीकी जीत-हार के अंतर में दर्ज हुई—जहां तीन सीटों पर फैसला 300 से भी कम वोटों से हुआ और चौथी सीट पर अंतर महज 1,445 वोटों का रहा।
2027 के विधानसभा चुनाव की तरफ बढ़ते हुए जिले के समीकरण 2022 के मुकाबले पूरी तरह बदल चुके हैं। तब सपा के साथ मिलकर लड़ी राष्ट्रीय लोकदल (RLD) अब एनडीए खेमे में है, जबकि नगीना लोकसभा सीट पर भारी अंतर से जीत दर्ज करने वाली आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) ने अकेले मैदान में उतरने का ऐलान कर दिया है।
जनसांख्यिकी और साक्षरता: चुनावी संतुलन की धुरी
2011 की जनगणना के अनुसार बिजनौर की कुल आबादी करीब 36 लाख 83 हजार दर्ज की गई थी, जिसमें पुरुष लगभग 19 लाख 21 हजार और महिलाएं 17 लाख 61 हजार हैं। लिंगानुपात प्रति हजार पुरुषों पर 917 महिलाओं का है। जिले की औसत साक्षरता दर 68 प्रतिशत है, जिसमें पुरुष साक्षरता 77 प्रतिशत और महिला साक्षरता करीब 60 प्रतिशत है।
जिले की 75 प्रतिशत आबादी ग्रामीण इलाकों में और 25 प्रतिशत शहरी क्षेत्रों में निवास करती है। धार्मिक संतुलन के लिहाज से हिंदू आबादी करीब 55 प्रतिशत, मुस्लिम 43 प्रतिशत और सिख समुदाय की हिस्सेदारी लगभग 1.4 प्रतिशत है। यही सामाजिक बनावट यहां हर सीट पर मतदान का मुख्य आधार बनती है।
2022 के नतीजे: तीन सीटों पर सांस थामने वाले मुकाबले
बिजनौर जिले में कुल आठ विधानसभा सीटें हैं—नजीबाबाद, नगीना (सुरक्षित), बढ़ापुर, धामपुर, नहटौर (सुरक्षित), बिजनौर, चांदपुर और नूरपुर।
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धामपुर: जिले का सबसे करीबी मुकाबला धामपुर में दर्ज हुआ, जहां भाजपा के अशोक कुमार राणा ने सपा के नईम उल हसन को महज 203 वोटों से मात दी।
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चांदपुर: यहां सपा के स्वामी ओमवेश ने भाजपा की तत्कालीन विधायक कमलेश सैनी को केवल 234 वोटों के अंतर से हराया।
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नहटौर (सुरक्षित): भाजपा के ओम कुमार ने रालोद प्रत्याशी मुंशीराम को सिर्फ 258 वोटों से शिकस्त दी।
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बिजनौर: भाजपा की सूची मौसम चौधरी ने रालोद के नीरज चौधरी को 1,445 वोटों के करीबी अंतर से हराया (सूची को 97,165 और नीरज को 95,720 वोट मिले)।
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नजीबाबाद: सपा के तसलीम अहमद ने भाजपा के राजा भारतेंद्र सिंह को 23,770 वोटों से हराया।
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नगीना (सुरक्षित): सपा के मनोज कुमार पारस ने भाजपा के डॉ. यशवंत सिंह को 26 हजार से अधिक वोटों से हराया, जो जिले की सबसे बड़ी जीत थी।
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बढ़ापुर: भाजपा के कुंवर सुशांत सिंह ने सपा के कपिल कुमार को 14,345 वोटों से शिकस्त दी (सुशांत सिंह को 1,00,100 वोट मिले)।
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नूरपुर: सपा के राम अवतार सिंह ने भाजपा के सीपी सिंह को 6,065 वोटों से मात दी।
बसपा के मजबूत गढ़ से भाजपा की 2017 वाली लहर तक
बिजनौर कभी दलित-मुस्लिम गठजोड़ के दम पर बहुजन समाज पार्टी (BSP) का मजबूत सियासी केंद्र रहा था। 1989 में मायावती ने पहली बार इसी जिले से लोकसभा का सफर तय किया था। 2019 के लोकसभा चुनाव में भी नगीना और बिजनौर दोनों सीटें बसपा के खाते में गई थीं। 2012 तक नजीबाबाद और चांदपुर जैसी सीटों पर बसपा का सीधा दबदबा था।
2017 के चुनाव में भाजपा ने इस समीकरण को तोड़ा और आठ में से छह सीटों पर कब्जा जमाया, जबकि सपा सिर्फ नजीबाबाद और नगीना बचा सकी थी। 2008 के परिसीमन के बाद बनी नहटौर सीट पर ओम कुमार 2012 में बसपा से जीते और फिर पाला बदलकर 2017 व 2022 में भाजपा के टिकट पर विधायक बने। वहीं नूरपुर में भाजपा विधायक के निधन के बाद हुए उपचुनाव में सपा ने वापसी की और 2022 में भी सीट बरकरार रखी।
2024 के लोकसभा नतीजों ने बदला पूरा परिदृश्य
2024 के आम चुनाव में जिले की नगीना लोकसभा सीट पर आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के मुखिया चंद्रशेखर आजाद ने 1 लाख 51 हजार से अधिक वोटों के अंतर से एकतरफा जीत दर्ज की। इस चुनाव में भाजपा को करीब 3 लाख 61 हजार, सपा को 1 लाख 2 हजार और बसपा को महज 13 हजार वोट मिले। वहीं बिजनौर लोकसभा सीट एनडीए के पाले में गई, जहां रालोद के चंदन चौहान सांसद चुने गए।
2027 के चुनाव में यह बदलाव जमीन पर नए समीकरण बनाएगा। 2022 में सपा के साथ चुनाव लड़ने वाली रालोद अब एनडीए का हिस्सा है, जिससे बिजनौर और चांदपुर जैसी सीटों पर जाट मतदाताओं का रुख अहम होगा। दूसरी तरफ, चंद्रशेखर आजाद के अकेले चुनाव लड़ने के फैसले से नगीना, नहटौर और नजीबाबाद जैसी दलित-मुस्लिम बहुल सीटों पर सपा और भाजपा दोनों के पुराने चुनावी गणित के सामने नई चुनौती खड़ी हो गई है।
8 विधानसभा सीटों का जातीय ढांचा
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नजीबाबाद: मुस्लिम वोटर करीब 1 लाख, दलित 50 हजार, जाट 30 हजार, रवा राजपूत 15 हजार, वैश्य और ब्राह्मण 8-8 हजार।
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नगीना (सुरक्षित): मुस्लिम लगभग 1.30 लाख, अनुसूचित जाति 80 हजार, सैनी 35 हजार, जाट 20 हजार, कश्यप 10 हजार।
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बढ़ापुर: मुस्लिम, राजपूत, गुर्जर और दलित मतदाताओं का मिला-जुला प्रभाव।
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धामपुर: ठाकुर, दलित और मुस्लिम मतदाता मुख्य आधार; चौहान समाज की आबादी लगभग 30 हजार।
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नहटौर (सुरक्षित): मुस्लिम लगभग 80 हजार, दलित 70 हजार, चौहान और सैनी 35-35 हजार, जाट वोटर करीब 30 हजार।
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बिजनौर: मुस्लिम करीब 1 लाख, जाट 70 हजार, दलित 50 हजार, सैनी 25 हजार, राजपूत 22 हजार, कश्यप और पाल 10-12 हजार।
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चांदपुर: मुस्लिम करीब 1.25 लाख, दलित 48 हजार, जाट 35 हजार, सैनी और चौहान 25-25 हजार, ब्राह्मण लगभग 20 हजार।
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नूरपुर: मुस्लिम लगभग 1 लाख, चौहान समाज करीब 33 हजार, दलित 30 हजार, सैनी 17 हजार, त्यागी 15 हजार, यादव करीब 12 हजार।

