‘अब्दुल दरी नहीं बिछाएगा’: ओवैसी ने मुस्लिम नेतृत्व को लेकर क्या कहा?

एआईएमआईएम (AIMIM) प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने उत्तर प्रदेश के रामपुर में वंशवादी राजनीति और राज्य की विकास परियोजनाओं पर तीखा हमला बोला है। ओवैसी ने स्पष्ट किया है कि उनकी पार्टी नेहरू, गांधी या यादव परिवार के किसी व्यक्ति को अपना नेता नहीं बनाएगी, बल्कि इसके बजाय वह अपनी पार्टी के भीतर युवा मुस्लिम पुरुषों और महिलाओं को आगे बढ़ाएगी। ओवैसी के मुताबिक, मुस्लिम युवाओं में नेतृत्व करने की प्रतिभा और क्षमता है, लेकिन उन्हें खुद को साबित करने के मंच और अवसर से अक्सर वंचित रखा जाता है।
साक्षरता दर को लेकर सपा पर वार
रामपुर में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए ओवैसी ने स्थानीय शैक्षिक स्थिति का हवाला दिया। उन्होंने मंच से कहा, “हम सबको मिलकर अन्याय के इस युग का अंत करना होगा। रामपुर में साक्षरता दर 53 प्रतिशत है, जबकि पूरे उत्तर प्रदेश में यह 67 प्रतिशत है।” समाजवादी पार्टी पर तंज कसते हुए ओवैसी ने कहा कि जब सपा के लोगों से यह सवाल पूछा जाएगा, तो वे ‘दलाल’ इस पिछड़ेपन के लिए भी ओवैसी को ही जिम्मेदार ठहरा देंगे।
’80-20′ और विकास परियोजनाओं पर सरकार से सवाल
एआईएमआईएम अध्यक्ष ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का सीधा नाम लिए बिना ‘बाबा’ और ’80-20′ के बयान को लेकर निशाना साधा। ओवैसी ने कहा, “बाबा सिर्फ 80-20 के सिद्धांत की बात करते हैं। रामपुर जिले को ही देख लीजिए, यहां जल जीवन योजना के तहत 50 टैंक भी नहीं बने हैं।”
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने 690 करोड़ रुपये की परियोजनाओं का उद्घाटन किया, जो पूरी तरह धराशायी हो गईं और जमीन पर कुछ भी हासिल नहीं हुआ। ओवैसी ने कहा कि उन्होंने सिर्फ रिबन काटे, तस्वीरें खिंचवाईं और चले गए। शहर में थोड़ा बहुत काम हुआ है, लेकिन पूरे जिले में कोई विकास कार्य नहीं हुआ।
2027 के चुनाव और गठबंधन की स्थिति
उत्तर प्रदेश में 2027 में होने वाले विधानसभा चुनावों के मद्देनजर ओवैसी बार-बार समाजवादी पार्टी सहित अन्य विपक्षी दलों के साथ गठबंधन कर बीजेपी को चुनौती देने की पेशकश कर रहे हैं। दूसरी तरफ, सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने संकेत दिए हैं कि उनकी पार्टी अपने मौजूदा गठबंधन सहयोगियों के साथ ही आगे बढ़ने का इरादा रखती है।
उत्तर प्रदेश की राजनीति में फिलहाल एआईएमआईएम की उपस्थिति सीमित है। विपक्षी दल अक्सर ओवैसी की पार्टी पर बीजेपी विरोधी वोटों का बंटवारा कर परोक्ष रूप से बीजेपी को फायदा पहुंचाने का आरोप लगाते रहे हैं। हालांकि, ओवैसी सार्वजनिक मंचों से इन आरोपों को पूरी तरह खारिज करते आए हैं।

