वोटर लिस्ट विवाद में नया मोड़, महा CEO ने Form 6 बदलने की मांग क्यों की?

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भोजराज नावानी
भोजराज नावानी

महाराष्ट्र में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर चल रहे विवाद के बीच राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) ने भारत निर्वाचन आयोग (ECI) से एक अहम मांग की है।

सूत्रों के मुताबिक, महाराष्ट्र CEO ने चुनाव आयोग को एक प्रस्ताव भेजकर वोटर लिस्ट में नाम जुड़वाने के लिए इस्तेमाल होने वाले ‘फॉर्म 6’ (Form 6) में बदलाव का अनुरोध किया है। इसका मुख्य उद्देश्य उन वोटरों को राहत देना है, जिनके नाम SIR प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची से हटा दिए गए थे, लेकिन अब वे दोबारा अपना नाम जुड़वाना चाहते हैं।

क्या है ‘फॉर्म 6’ का विवाद?

‘फॉर्म 6’ का इस्तेमाल आमतौर पर उन लोगों द्वारा किया जाता है जो पहली बार (First Time Voter) मतदाता सूची में अपना नाम जुड़वाना चाहते हैं। चुनाव आयोग ने हाल ही में ‘फॉर्म 6’ में एक ‘डिक्लेरेशन’ (घोषणा-पत्र) जोड़ा है, जिसमें आवेदक को यह घोषणा करनी पड़ती है कि वह पहली बार वोटर के रूप में आवेदन कर रहा है।

विवाद की असली जड़ यह है कि चुनाव आयोग ने उन वोटरों को भी इसी ‘फॉर्म 6’ का इस्तेमाल कर दोबारा रजिस्ट्रेशन करने को कहा है, जिनके नाम SIR प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची से किसी कारणवश हटा दिए गए थे।

वोटरों में क्यों है डर और हिचकिचाहट?

जिन वोटरों के नाम पहले से ही मतदाता सूची में मौजूद थे और किसी कारण कट गए हैं, वे अब यह नया ‘फॉर्म 6’ भरने से डर रहे हैं। उनकी परेशानी यह है कि अगर वे खुद को ‘फर्स्ट टाइम वोटर’ बताते हुए डिक्लेरेशन पर हस्ताक्षर करते हैं, तो यह कानूनी रूप से ‘गलत बयान’ देना माना जा सकता है।

‘जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950’ की धारा 31 के तहत, मतदाता सूची से जुड़े किसी भी फॉर्म में जानबूझकर गलत घोषणा करना एक दंडनीय अपराध है। इसके लिए एक साल तक की जेल, जुर्माना या दोनों हो सकते हैं। इस कानूनी उलझन के डर से अधिकारी भी हटाए गए वोटरों को दोबारा रजिस्ट्रेशन के लिए राजी नहीं कर पा रहे हैं।

महाराष्ट्र के CEO ने सुझाए ये 3 अहम बदलाव

इस उलझन और कानूनी डर को दूर करने के लिए महाराष्ट्र के CEO ने चुनाव आयोग को भेजे गए प्रस्ताव में मुख्य रूप से तीन बड़े बदलाव सुझाए हैं:

  1. ‘New Voters’ शब्द हटाना: ‘फॉर्म 6’ के टाइटल और डिक्लेरेशन से ‘न्यू वोटर्स’ या ‘फर्स्ट टाइम वोटर’ शब्द को हटा दिया जाए।

  2. वैकल्पिक घोषणा का विकल्प: फॉर्म में एक ऐसी वैकल्पिक घोषणा जोड़ी जाए, जिसमें वोटर यह बता सके कि वह पहले किसी विधानसभा क्षेत्र में रजिस्टर्ड था, लेकिन अब उसका नाम कहीं दर्ज नहीं है और वह दोबारा सूची में शामिल होना चाहता है।

  3. EPIC नंबर देने की अनुमति: आवेदकों को अपना पुराना ‘इलेक्टर फोटो आइडेंटिटी कार्ड’ (EPIC) या वोटर आईडी नंबर भरने की अनुमति दी जाए। इससे चुनाव अधिकारियों को वोटर के पुराने रिकॉर्ड का आसानी से पता चल सकेगा।

महाराष्ट्र में चल रही है SIR प्रक्रिया

गौरतलब है कि महाराष्ट्र के CEO द्वारा भेजा गया यह प्रस्ताव फिलहाल एक सुझाव है, जिसे अभी चुनाव आयोग की कानूनी और प्रशासनिक मंजूरी मिलना बाकी है।

महाराष्ट्र में मतदाता सूची अद्यतन करने की SIR प्रक्रिया अभी जारी है। राज्य में दावे और आपत्तियां दर्ज करने की समय सीमा 26 अक्टूबर को खत्म हो रही है, जबकि अंतिम मतदाता सूची (Final Voter List) 16 नवंबर को जारी की जानी है। अगर चुनाव आयोग फॉर्म 6 में इन बदलावों को मंजूरी देता है, तो उन लाखों पात्र मतदाताओं के लिए दोबारा रजिस्ट्रेशन की राह आसान हो जाएगी, जिनके नाम कट गए थे।