आयोग का फैसला: 17 राज्यों में SSR, कांग्रेस ने CEC से फिर मांगा इस्तीफा

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Saima Siddiqui
Saima Siddiqui

मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार और विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर जारी तीखे राजनीतिक घमासान के बीच भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने दो बड़े प्रशासनिक फैसले लिए हैं। आयोग ने घोषणा की है कि वह राजनीतिक दलों के साथ मतदाता सूची का ‘मशीन-रीडेबल’ (पढ़ा जा सकने वाला) संस्करण साझा करेगा। इसके साथ ही आयोग ने 17 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में मतदाता सूची के वार्षिक विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (SSR) का भी आदेश जारी कर दिया है।

पहला फैसला: राजनीतिक दलों को मिलेगी रीडेबल पीडीएफ

चुनाव आयोग के फैसले के अनुसार, अब सभी मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों को मतदाता सूची के प्रारूप (ड्राफ्ट) और अंतिम (फाइनल) दोनों संस्करणों की सॉफ्ट कॉपी उपलब्ध कराई जाएगी। यह सूची मतदाताओं की तस्वीरों के बिना, पढ़ने योग्य (Readable) पीडीएफ प्रारूप में होगी।

इसके अलावा, मतदान के समय वर्णमाला क्रम (Alphabetical Order) में व्यवस्थित मतदाता सूची की रीडेबल पीडीएफ कॉपी पेन ड्राइव या अन्य इलेक्ट्रॉनिक स्टोरेज डिवाइस में उम्मीदवारों को दी जा सकेगी। यह सुविधा उम्मीदवारों की मांग और निर्धारित शुल्क के भुगतान पर रिटर्निंग ऑफिसर (RO) या जिला निर्वाचन अधिकारी (DEO) के कार्यालय से प्राप्त होगी।

दूसरा फैसला: 17 राज्यों में SSR की घोषणा

आयोग ने दूसरा बड़ा कदम उठाते हुए 17 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में वार्षिक विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (Special Summary Revision – SSR) कराने का फैसला किया है। इसके लिए अर्हता तिथि (Qualifying Date) 1 जनवरी 2027 तय की गई है।

हर साल 1 जनवरी को मतदाता सूची अपडेट करने के उद्देश्य से साल के अंतिम महीनों में यह राष्ट्रव्यापी प्रक्रिया अपनाई जाती है, ताकि नए मतदाताओं के नाम जोड़े जा सकें और त्रुटियों को सुधारा जा सके। आयोग ने उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, गोवा, पंजाब और मणिपुर समेत कुल 17 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को इस संबंध में पत्र लिखा है।

आयोग ने स्पष्ट किया है कि जिन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में ‘विशेष गहन पुनरीक्षण’ (SIR) की प्रक्रिया चल रही है या हाल ही में पूरी हुई है, वहां SSR का कार्यक्रम बाद में अलग से घोषित किया जाएगा।

इन 17 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में होगा पुनरीक्षण:

  • उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, गोवा, मणिपुर

  • बिहार, राजस्थान, मध्य प्रदेश, गुजरात, छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल, असम

  • केरल, तमिलनाडु, पुडुचेरी, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, लक्षद्वीप

कांग्रेस का हमला: ‘यह नाकाफी, सीईसी सरकारी गवाह बनें’

चुनाव आयोग के इस फैसले का श्रेय कांग्रेस पार्टी नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के लगातार उठाए जा रहे सवालों को दे रही है। राहुल गांधी पिछले काफी समय से आयोग से मशीन-रीडेबल मतदाता सूची सार्वजनिक करने की मांग कर रहे थे।

फैसले पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कांग्रेस के संगठन महासचिव के.सी. वेणुगोपाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर लिखा, “ज्ञानू भाई, यह काफी नहीं है। आपको इस्तीफा दे देना चाहिए और सरकारी गवाह (approver) बन जाना चाहिए। मोदी-शाह के इशारे पर आपने जो नुकसान किया है, वह अब अधिसूचना के जरिए ‘यू-टर्न’ लेने से ठीक नहीं होगा।”

वेणुगोपाल ने आगे कहा, “हम 2025 से ही मशीन से पढ़े जा सकने वाले मतदाता सूची की मांग कर रहे हैं। पारदर्शिता तो बस एक न्यूनतम आवश्यकता है; यह ऐसा कुछ नहीं है जो आपको आपके पिछले गुनाहों से बरी कर दे। 13 करोड़ भारतीयों को उनके मताधिकार से वंचित करना देशद्रोह के समान है।” उन्होंने जोर देकर कहा कि चुनाव प्रक्रिया में व्यापक सुधार होने चाहिए, जिसकी शुरुआत SIR को रद्द करने और चुनाव आयोग में नियुक्तियों की प्रक्रिया में बदलाव से हो। उन्होंने आयोग के इस कदम को “बहुत छोटा और बहुत देर से उठाया गया” बताया।