भरत जी बेचारे 14 साल बाद भाई से मिले थे या हाउसकीपिंग जॉइन की थी?

भाई, हर साल दिवाली से पहले घर-घर एक ही दृश्य दिखता है। माँ रसोई में डिब्बे-डिब्बी खोलकर पुरानी अचार की बोतलों से जंग लड़ रही हैं। बाबूजी छत पर जाले हटाते-हटाते सीढ़ी से लगभग गिरने वाले हैं। बहनें अलमारी के अंदर से 2012 का पुराना स्वेटर निकालकर चिल्ला रही हैं—“ये किसका है?!” और भाई लोग… भाई लोग सिर्फ फोन पर रील देख रहे हैं कि “घर की सफाई कैसे करें”।
सब कहते हैं—“भगवान राम जब अयोध्या लौटे थे ना, तभी से ये परंपरा चली आ रही है।” ठीक है भाई, रामचरितमानस खोलते हैं। राम वन से लौटे। भरत जी ने चरण पकड़ लिए। पूरा अयोध्या नगर दीपों से जगमगा उठा। लेकिन कहीं भी नहीं लिखा कि:
- भरत जी महल के कोनों में झाड़ू लेकर घूमे हों
- लक्ष्मण जी ने छत के जाले हटाए हों
- माता कौशल्या ने रसोई के डिब्बे-डिब्बी साफ किए हों
- शत्रुघ्न जी ने बाथरूम की टाइल्स पर एसिड डाला हो
वाल्मीकि जी ने लिखा—“नगर सजाया गया, दीप जलाए गए, फूल बिछाए गए।”
सफाई का जिक्र सिर्फ इतना है कि रास्ते साफ किए गए ताकि रथ आराम से निकल सके। बाकी सब… हमारे आधुनिक घरों का आविष्कार है।
तो फिर ये परंपरा कहाँ से आई भाई? ये परंपरा आई है उस महान भारतीय माँ से, जिसने एक बार कहा था—“दिवाली है बेटा, घर चमकना चाहिए।” और फिर वो चमक इतनी बढ़ गई कि अब घर की सफाई दिवाली का मुख्य त्योहार बन गई है। राम जी का स्वागत तो साइड डिश रह गया।
सोचो जरा…अगर सच में उस समय ये परंपरा होती तो भरत जी राम से पहले कहते— “भैया, थोड़ा रुको। महल में अभी जाले बाकी हैं। माता जी रसोई में पुरानी घी की डिब्बी साफ कर रही हैं। तुम वन में 14 साल रहे, हम यहाँ जाले हटा रहे हैं।”
राम जी शायद हँसते हुए कहते—“भैया, जाले रहने दो। मैं तो सिर्फ घर लौटा हूँ, होटल रेटिंग नहीं चेक करने आया।” आजकल तो स्थिति ये है कि दिवाली से 15 दिन पहले घर युद्धक्षेत्र बन जाता है। नमक की डिब्बी को इस तरह पोछा जाता है जैसे उसमें रावण छिपा हो। पर्दे धोए जाते हैं जैसे वे सीता माता के अशोक वाटिका के हों। और फर्श इतना चमकता है कि लक्ष्मण जी अगर आज आएं तो फिसलकर गिर जाएं।
असली बात ये है भाई— हम सफाई नहीं कर रहे। हम अपनी साल भर की गंदगी को एक हफ्ते में छुपाने की कोशिश कर रहे हैं। और इसे भगवान राम के सिर मढ़ रहे हैं। राम जी आए थे अयोध्या को रोशन करने। हमने उन्हें झाड़ू और पोछे का ब्रांड एंबेसडर बना दिया।
इस दिवाली बस इतना याद रखिए— भगवान राम घर लौटे थे प्यार और उल्लास के साथ। जाले हटाने के लिए नहीं। अगर घर में थोड़े जाले रह भी जाएं तो कोई बात नहीं। राम जी तो जाले वाले वन से ही आए थे। उन्हें आदत है।

