उपाध्याय, पाठक, चौबे और दीक्षित पर टिप्पणी, अदालत में आगे बढ़ेगा मामला

तुलसी पीठाधीश्वर और प्रसिद्ध कथावाचक जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य (Swami Rambhadracharya) की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। ब्राह्मण समाज की कुछ खास उपजातियों को लेकर की गई उनकी कथित विवादित टिप्पणी के मामले में आज प्रयागराज की जिला अदालत में अहम सुनवाई होनी है।
प्रयागराज की एसीजेएम कोर्ट संख्या-8 ने शिकायत का संज्ञान लेते हुए पहले ही स्वामी रामभद्राचार्य के खिलाफ केस रजिस्टर करने का आदेश दिया था और उन्हें नोटिस भी जारी किया था। शिकायतकर्ता ने परिवाद दाखिल कर रामभद्राचार्य को मानहानि (Defamation) के अपराध में तलब कर दंडित किए जाने की मांग की है।
क्या है रामभद्राचार्य का पूरा विवाद?
यह पूरा विवाद इसी साल 3 फरवरी 2024 का है। आरोप है कि मथुरा के वृंदावन में आयोजित एक भागवत कथा के दौरान स्वामी रामभद्राचार्य ने ब्राह्मण समाज की कुछ उपजातियों को लेकर विवादित बयान दिया था।
शिकायत के मुताबिक, रामभद्राचार्य ने अपने प्रवचन में ब्राह्मणों के उपाध्याय, पाठक, चौबे, त्रिगुणायत और दीक्षित समाज पर सीधी टिप्पणी की थी। आरोप है कि उन्होंने इन उपजातियों को ‘अधम’ और ‘नीच’ बताया था और यह भी कहा था कि ऊंचे कुल के लोग इन समाजों में अपनी बेटियों की शादी नहीं करते हैं।
‘युवाओं के विवाह में आ रही है बाधा’
रामभद्राचार्य के इसी बयान के खिलाफ शिकायतकर्ता सुरेश चंद्र उपाध्याय ने 14 सितंबर 2026 को प्रयागराज की एसीजेएम कोर्ट में परिवाद (शिकायत) दर्ज कराया था।
शिकायतकर्ता की तरफ से अदालत में कहा गया है कि कथावाचक के इस सार्वजनिक बयान से उपाध्याय, पाठक और दीक्षित जैसी संबंधित उपजातियों की सामाजिक प्रतिष्ठा को गहरी ठेस पहुंची है। शिकायत में यह भी दावा किया गया है कि इस तरह के बयानों के कारण समाज में भ्रम फैल रहा है और इन उपजातियों के युवाओं के विवाह में बाधाएं पैदा हो रही हैं।
कोर्ट ने लिया संज्ञान, जारी किया था नोटिस
प्रयागराज की सीजेएम कोर्ट ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए संज्ञान लिया था। अदालत ने स्वामी रामभद्राचार्य को नोटिस जारी कर आज (सुनवाई की तारीख) का दिन तय किया था। अब आज होने वाली इस सुनवाई में देखना होगा कि अदालत इस मानहानि मामले में क्या कदम उठाती है।

