चीन की मौजूदगी बढ़ी? सैटेलाइट तस्वीरों में लाओस के एयरबेस पर 8 विमान

चीन की विस्तारवादी नीतियों और दक्षिण पूर्व एशिया में अपनी सैन्य पैठ बढ़ाने की कोशिशों का एक और बड़ा सबूत सामने आया है। सैटेलाइट तस्वीरों से संकेत मिले हैं कि चीनी सेना (PLA) लाओस (Laos) में एक नए संयुक्त विमानन केंद्र (Joint Aviation Facility) का इस्तेमाल कर रही है। लाओस के बान क्युन हवाई अड्डे (Ban Keun Airport) पर लाओस वायुसेना की मौजूदा क्षमता से दोगुने ‘K-8/JL-8’ सीरीज के ट्रेनर विमान देखे गए हैं, जिससे इस बात को बल मिला है कि ड्रैगन यहां गुपचुप तरीके से अपना सैन्य बेस तैयार कर रहा है।
सैटेलाइट तस्वीरों में 8 ट्रेनर एयरक्राफ्ट और सैन्य वाहन
रॉयटर्स द्वारा प्राप्त की गई 30 सितंबर 2026 की कमर्शियल सैटेलाइट तस्वीरों में बान क्युन हवाई अड्डे पर आठ टू-सीटर ट्रेनर और लाइट-अटैक एयरक्राफ्ट (K-8/JL-8) खड़े दिखाई दे रहे हैं। इसके साथ ही, वहां दो दर्जन से अधिक सैन्य और सपोर्ट वाहन (Support Vehicles) भी मौजूद हैं।
यह तस्वीरें उस घटना के ठीक एक दिन बाद ली गई हैं, जब ‘चीन-लाओस जॉइंट सपोर्ट एंड ट्रेनिंग सेंटर’ और ‘चीन-लाओस फ्रेंडशिप एविएशन एकेडमी’ ने आधिकारिक रूप से इसी हवाई अड्डे पर काम करना शुरू किया था। इस उद्घाटन समारोह में पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) का एक प्रतिनिधिमंडल भी शामिल हुआ था। बीजिंग का आधिकारिक दावा है कि इस केंद्र का उद्देश्य लाओस वायुसेना के पायलटों के प्रशिक्षण को मजबूत करना है।
क्षमता से दोगुने विमान: चीन की मौजूदगी का इशारा!
सैन्य मामलों की जानकारी रखने वाली ‘IISS मिलिट्री बैलेंस 2026’ रिपोर्ट के अनुसार, लाओस की वायुसेना के पास आधिकारिक तौर पर केवल चार K-8W विमान हैं। साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट (SCMP) की जांच में भी लाओस द्वारा विमानों की कोई नई खेप खरीदने का सार्वजनिक रिकॉर्ड नहीं मिला है।
चीनी सैन्य विमानन विश्लेषक एंड्रियास रुप्रेच (Andreas Rupprecht) ने स्पष्ट रूप से कहा कि वहां मौजूद अतिरिक्त विमान निश्चित रूप से पीएलए वायुसेना के हैं। रुप्रेच ने कहा, “मेरी राय में, संभवतः नहीं बल्कि निश्चित रूप से, क्योंकि वहां आठ विमान देखे जा सकते हैं और लाओस के पास केवल चार हैं।” उन्होंने यह भी बताया कि लाओस के K-8W विमानों को आमतौर पर कैमोफ्लाज (छलावरण) रंग में देखा गया है, जबकि PLA के विमान हल्के रंग के होते हैं, जो सैटेलाइट तस्वीरों से भी मेल खाता है।
दक्षिण पूर्व एशिया में चीन का पहला हवाई सैन्य बेस?
सुरक्षा शोध फर्म पर्सपेक्टम (Perceptum) के संस्थापक और चीन मामलों के विशेषज्ञ टिमोथी हीथ ने इस कदम को बेहद अहम माना है। विश्लेषकों का मानना है कि बान क्युन चीन का पहला ऐसा विदेशी सैन्य प्रतिष्ठान है, जो मुख्य रूप से हवाई शक्ति (Air Power) पर केंद्रित है।
जॉन हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर आइजैक कार्डन ने कहा कि अगर पीएलए के विमान वहां हैं, तो इसका मतलब है कि चीनी सैन्य विमानन की बान क्युन तक पहुंच हो चुकी है। कार्डन ने इसे कंबोडिया के रीम नौसैनिक अड्डे (Ream Naval Base) में चीन की मौजूदगी से जोड़ते हुए कहा कि यह विमानन क्षेत्र में उसी ‘रीम मॉडल’ का विस्तार हो सकता है।
कोई बड़ा खतरा नहीं, लेकिन राजनीतिक संदेश स्पष्ट
हालांकि, विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि फिलहाल यह एयरबेस क्षेत्र में चीन की सैन्य ताकत को अचानक से कई गुना नहीं बढ़ाएगा, क्योंकि K-8 मुख्य रूप से केवल प्रशिक्षण विमान हैं। इसके अलावा, चीनी विमान अपने घरेलू बेस से भी इस क्षेत्र तक आसानी से पहुंच सकते हैं।
CSIS चाइना पावर प्रोजेक्ट के डिप्टी डायरेक्टर ब्रायन हार्ट ने कहा, “भले ही चीन वहां भविष्य में अधिक उन्नत विमान तैनात कर दे, यह क्षेत्र में हवा से हमला करने की पीएलए की क्षमता को बुनियादी तौर पर नहीं बदलेगा। लेकिन, वहां से काम करने से चीन को विदेशी ठिकानों पर काम करने का अनुभव मिलेगा, जो भविष्य में बड़े सैन्य अड्डों की स्थापना के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है।”
विश्लेषकों के अनुसार, इस बेस का मुख्य महत्व राजनीतिक है। यह न केवल दक्षिण पूर्व एशिया में चीन के बढ़ते प्रभाव को दर्शाता है, बल्कि यह भी स्पष्ट करता है कि चीन अपनी महत्वाकांक्षी ‘बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव’ (BRI) के साझेदारों से क्या अपेक्षाएं रखता है।

