चीन-EU में ट्रेड वॉर टालने का फॉर्मूला, हाइब्रिड कारों की सप्लाई पर लगाम

यूरोपीय संघ (EU) और चीन के बीच हाइब्रिड कारों के निर्यात को लेकर एक बड़ा समझौता हुआ है। इसके तहत चीन यूरोपीय ब्लॉक में भेजे जाने वाले अपने हाइब्रिड वाहनों के शिपमेंट में आधे से ज्यादा की कटौती करेगा। बीजिंग में हुई मैराथन व्यापार वार्ता के बाद इस समझौते पर मुहर लगी है। इस कदम ने दोनों के बीच एक पूर्ण ‘ट्रेड वॉर’ (Trade War) छिड़ने के खतरे को फिलहाल टाल दिया है।
चार साल में ‘कई मिलियन’ कारों का निर्यात घटेगा
EU के व्यापार प्रमुख मारोस सेफकोविक ने बीजिंग में संवाददाताओं को बताया कि इस समझौते से अगले चार साल के भीतर चीन के हाइब्रिड कार निर्यात में भारी कमी आएगी। सेफकोविक ने चीनी वाणिज्य मंत्री वांग वेन्ताओ और उप-प्रधानमंत्री हे लिफेंग के साथ गहन बातचीत के बाद इस फैसले की घोषणा की।
सेफकोविक ने कहा, “यह पहली बार है जब चीन ने व्यापारिक तनाव के चरम पर पहुंचने से पहले ही अपने निर्यात को मॉडरेट करने की बात स्वीकार की है।”
वार्ता से जुड़े सूत्रों ने जानकारी दी कि हाइब्रिड कारों पर बनी यह सहमति एक सेफगार्ड उपाय (Safeguard measure) के रूप में काम करेगी। इसके जरिए EU आयात को सीमित करने के लिए कोटा और टैरिफ तय कर सकता है, ठीक वैसे ही जैसे हाल ही में चीनी स्टील के आयात को रोकने के लिए किया गया था। यूरोपीय संघ के लिए यह डील एक ‘प्रूफ ऑफ कॉन्सेप्ट’ है, जिससे यह परखा जा सकेगा कि बीजिंग पूरी ईमानदारी से बातचीत के नतीजे लागू करता है या नहीं।
EU को मिलेगा 4 अरब यूरो का बाजार और रेयर अर्थ मिनरल्स
इस डील में केवल कारों का मुद्दा शामिल नहीं है। चीन ने रेयर अर्थ मिनरल्स (Rare earth minerals) के एक्सपोर्ट लाइसेंस के लिए यूरोपीय संघ के आवेदनों में तेजी लाने पर भी सहमति जताई है।
कार पार्ट्स, जैतून का तेल (Olive oil) और टेक्सटाइल जैसे यूरोपीय उत्पादों के लिए चीनी बाजार तक पहुंच को और बेहतर बनाया जाएगा। सेफकोविक के मुताबिक, वर्तमान निर्यात मूल्य के आधार पर यह छूट यूरोपीय संघ के लिए लगभग 4 अरब यूरो (4.5 अरब डॉलर) की हो सकती है। दो दिनों की बातचीत के बाद दोनों पक्षों ने 16 सूत्रीय संयुक्त बयान जारी किया। इसमें मेडिकल उपकरणों और पावर इनवर्टर जैसे विवादित मुद्दों पर अगले साल मार्च में फिर से बातचीत करने की रूपरेखा तय की गई है।
‘ट्रेड वॉर की घोषणा आसान, लेकिन रोकना मुश्किल’
सेफकोविक ने पूर्ण टैरिफ वॉर की आशंकाओं को खारिज करते हुए कहा, “ट्रेड वॉर या किसी भी युद्ध की घोषणा करना बहुत आसान है, लेकिन उसे रोकना बहुत मुश्किल है। इसलिए मेरा पूरा जोर बातचीत पर था।”
सेफकोविक ने स्पष्ट किया कि यह व्यापारिक संतुलन बनाने की दिशा में केवल एक पहला कदम है। उन्होंने यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन का हवाला देते हुए कहा कि संवाद से नतीजे मिलने चाहिए, और जहां संवाद काम नहीं करेगा, वहां यूरोपीय संघ संतुलन बनाने के लिए अपने व्यापारिक उपकरणों का इस्तेमाल करेगा।
अगले सप्ताह उर्सुला वॉन डेर लेयेन यूरोपीय संघ के राष्ट्रीय नेताओं को इस वार्ता के नतीजों की जानकारी देंगी। उस बैठक में तय होगा कि यूरोप में ‘चाइना शॉक 2.0’ (China shock 2.0) से निपटने के लिए चीन की ये रियायतें पर्याप्त हैं या नहीं।
फ्रांस-जर्मनी का सख्त रुख, इंडस्ट्री ने किया फैसले का स्वागत
यूरोपीय संघ के कई देश चीन को लेकर सख्त रवैया अपना रहे हैं। फ्रांस और जर्मनी का एक संयुक्त पेपर हाल ही में लीक हुआ था, जिसमें व्यापार नियमों का उल्लंघन करने वाले देशों या कंपनियों को तुरंत यूरोपीय बाजार से बाहर करने के लिए एक सख्त तंत्र बनाने की मांग की गई थी।
बीजिंग में हुए इस समझौते का व्यापारिक और औद्योगिक जगत ने स्वागत किया है। चाइना चैंबर ऑफ कॉमर्स टू द ईयू (CCCEU) ने इसे ‘व्यावहारिक परिणाम’ बताते हुए संवाद के जरिए व्यापारिक तनाव कम करने की इच्छाशक्ति की सराहना की। यूरोपियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन ने भी इसे एक सकारात्मक कदम बताया।
यूरोपीय संसद की व्यापार समिति के सदस्य पास्कल कैनफिन ने इसे व्यापार संबंधों को संतुलित करने की दिशा में पहला कदम करार दिया। कैनफिन ने कहा कि यह असंतुलन व्यवस्थित है, इसलिए यूरोप को अपनी आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ट्रेड डिफेंस इंस्ट्रूमेंट्स (व्यापार रक्षा उपकरणों) का इस्तेमाल करने से पीछे नहीं हटना चाहिए।

