CJP प्रदर्शन का असर? सेंट्रल दिल्ली में ₹250 करोड़ के कारोबार पर संकट

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रस्तावित प्रदर्शन को देखते हुए प्रशासन ने लुटियंस और सेंट्रल दिल्ली को सुरक्षा घेरे में तब्दील कर दिया है। 10 अक्टूबर को होने वाले इस जमावड़े के मद्देनजर कनॉट प्लेस (CP) और आसपास के प्रमुख व्यावसायिक क्षेत्रों में दुकानें, होटल, रेस्तरां और निजी दफ्तर बंद रखने का फैसला लिया गया है। इस एहतियाती बंदी के कारण राजधानी के व्यापारिक तंत्र को भारी आर्थिक चपत लगने का अनुमान है। वहीं, दिल्ली मेट्रो के 57 स्टेशनों को बंद किए जाने के प्रशासनिक कदम पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई है।
एक दिन में ₹250 करोड़ के नुकसान की आशंका
व्यापारिक संगठनों के आकलन के मुताबिक, दिल्ली में रोजाना करीब 600 करोड़ रुपये का खुदरा और थोक कारोबार होता है। इसमें से अकेले 250 करोड़ रुपये का व्यवसाय सेंट्रल दिल्ली के बाजारों से जुड़ा है।
शनिवार को सुरक्षा कारणों से प्रतिष्ठान बंद रहने के कारण केवल सेंट्रल दिल्ली में ही एक दिन में करीब 250 करोड़ रुपये का व्यापार सीधे तौर पर प्रभावित होने की आशंका जताई गई है। कारोबारी संगठनों का कहना है कि फेस्टिव सीजन के दौरान अचानक बाजार बंद होने से खुदरा व्यापारियों, रेस्तरां संचालकों और लॉजिस्टिक्स से जुड़े कामगारों को बड़ा झटका लगेगा।
NDTA की एडवाइजरी: सुरक्षा के मद्देनजर CP रहेगा बंद
व्यापारिक संगठन नई दिल्ली ट्रेडर्स एसोसिएशन (NDTA) ने कनॉट प्लेस के सभी दुकानदारों, शोरूम संचालकों, निजी दफ्तरों और रेस्तरां प्रबंधन के लिए शनिवार, 10 अक्टूबर 2026 के लिए आधिकारिक एडवाइजरी जारी की है।
एसोसिएशन के महासचिव विक्रम बधवार द्वारा जारी दिशा-निर्देशों में सभी प्रतिष्ठानों के मालिकों और संचालकों से अपील की गई है कि वे इलाके की मौजूदा कानून-व्यवस्था और संभावित जोखिम को देखते हुए अपने प्रतिष्ठान बंद रखें। एडवाइजरी में कहा गया है कि किसी भी अप्रिय घटना या संपत्ति के नुकसान से बचने के लिए कारोबारी एहतियात बरतें तथा स्थानीय प्रशासन और पुलिस के निर्देशों का पूर्ण सहयोग करें।
57 मेट्रो स्टेशन बंद करने पर सुप्रीम कोर्ट की कड़ी टिप्पणी
इधर, दिल्ली मेट्रो द्वारा पुलिस के अनुरोध पर 57 स्टेशनों को बंद करने के निर्णय पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख दिखाया है। मामले की सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत ने सार्वजनिक परिवहन ठप किए जाने पर गहरी चिंता जताई।
सीजेआई ने कहा कि अदालत को मेट्रो सेवाएं बंद किए जाने से भारी चिंता है। उन्होंने विशेष रूप से उन लाखों यात्रियों का मुद्दा उठाया जो अपनी आजीविका के लिए ग्रेटर नोएडा और दक्षिणी दिल्ली से रोजाना दिल्ली आते हैं। अदालत ने छात्रों और सामान्य मुसाफिरों की दैनिक आवाजाही पर पड़ने वाले असर का भी उल्लेख किया।
सीजेआई सूर्यकांत ने स्पष्ट किया कि कानून-व्यवस्था संभालने के नाम पर प्रशासन हर सार्वजनिक सेवा को पूरी तरह बंद नहीं कर सकता। उन्होंने सुझाव दिया कि यदि भीड़ अनियंत्रित होने की आशंका है, तो मेट्रो की फ्रीक्वेंसी घटाई जा सकती है या अन्य विकल्पों पर विचार किया जा सकता है, न कि पूरे स्टेशन बंद कर दिए जाएं। शीर्ष अदालत ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता को इस संबंध में तत्काल कदम उठाने और स्थिति की समीक्षा करने के निर्देश दिए हैं।

