रसिक दुलारी मौत की जांच में नया एंगल, फोन-सिम नियमों पर पुलिस की नजर

संत प्रेमानंद महाराज के शिष्य रसिक दुलारी शरण की संदिग्ध मौत के मामले में मथुरा पुलिस की तफ्तीश अब आश्रम की आंतरिक व्यवस्थाओं और डिजिटल संपर्कों पर केंद्रित हो गई है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, आश्रम में साधकों के पुराने फोन जमा कराने, नए सिम कार्ड देने और बाहरी दुनिया से संपर्क सीमित रखने से जुड़े नियमों को लेकर विस्तृत पड़ताल की जा रही है। मामले में कड़ियां जोड़ने के लिए पुलिस अब तक 85 लोगों के बयान दर्ज कर चुकी है।
पुराने फोन जमा कराने और नए सिम देने की व्यवस्था पर जांच
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, आश्रम में शिष्य या साधक के तौर पर रहने वाले लोगों के लिए मोबाइल फोन और बाहरी संपर्कों को लेकर एक तय व्यवस्था बनाई गई थी। सूत्रों का दावा है कि दीक्षा या साधक बनने के बाद लोगों के पुराने फोन रख लिए जाते थे और उन्हें आश्रम की तरफ से नए मोबाइल व सिम कार्ड दिए जाते थे।
जांच एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि पुराने फोन जमा कराने और नए उपकरण देने के पीछे आश्रम प्रबंधन की आधिकारिक नीति क्या थी। क्या यह नियम सभी साधकों पर समान रूप से लागू था या केवल कुछ खास लोगों पर? इसके अलावा, इन फोनों की निगरानी या कॉल रिकॉर्डिंग की कोई व्यवस्था थी या नहीं और साधकों के पुराने संपर्कों का डेटा किसके पास सुरक्षित रखा जाता था, पुलिस इसकी भी तकनीकी जांच कर रही है।
परिजनों से सीमित संपर्क और अवसाद का एंगल
सूत्रों के अनुसार, आश्रम में रहने वाले लोगों के परिजनों और दोस्तों से बातचीत करने पर भी पाबंदियां थीं। कई मामलों में बातचीत बहुत सीमित रखी जाती थी या इसकी अनुमति नहीं होती थी।
पुलिस इस बात की पड़ताल कर रही है कि साधकों को बाहरी दुनिया से किस स्तर तक अलग रखा जाता था। रसिक दुलारी के मामले में यह सवाल इसलिए अहम माना जा रहा है क्योंकि पुलिस यह समझने की कोशिश कर रही है कि क्या वह किसी मानसिक दबाव या अवसाद (Depression) से जूझ रहा था। यदि वह तनाव में था, तो क्या उसके पास अपने परिवार या पुराने दोस्तों से खुलकर बात करने का कोई माध्यम मौजूद था या नहीं।
आश्रम में मानसिक स्वास्थ्य की निगरानी और काउंसलिंग व्यवस्था
जांच का एक बड़ा बिंदु यह भी है कि यदि साधकों का बाहरी संपर्क सीमित था, तो आश्रम के भीतर उनके मानसिक स्वास्थ्य और आचरण की निगरानी किस तरह की जाती थी।
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क्या किसी साधक के व्यवहार में अचानक आए बदलाव की जानकारी परिजनों को दी जाती थी?
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क्या आश्रम में किसी प्रकार की काउंसलिंग या मनोवैज्ञानिक सहायता की व्यवस्था थी?
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यदि कोई व्यक्ति मानसिक रूप से परेशान था, तो उसे विशेषज्ञों या परिवार से संपर्क कराने की क्या प्रक्रिया तय थी?
पुलिस रसिक दुलारी के परिजनों और करीबी लोगों से भी पूछताछ कर रही है, ताकि यह साफ हो सके कि आश्रम में आने से पहले और बाद में उसके व्यवहार में क्या अंतर आया था और क्या उसने कभी किसी परेशानी या मानसिक तनाव का जिक्र किया था।
सीडीआर और डिजिटल साक्ष्यों की पड़ताल, 85 लोगों से पूछताछ
पुलिस की एक टीम रसिक दुलारी के पुराने फोन, नए सिम, कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR), चैट और अन्य डिजिटल साक्ष्यों का विश्लेषण कर रही है। इसके जरिए यह पता लगाया जा रहा है कि घटना से ठीक पहले के दिनों में उसकी किन-किन लोगों से बातचीत हुई थी और क्या उसके संपर्कों या गतिविधियों में कोई असामान्य बदलाव आया था।
मथुरा पुलिस इस पूरे मामले में आश्रम प्रबंधन, सेवादारों और परिजनों समेत अब तक 85 लोगों के बयान दर्ज कर चुकी है और उसी आधार पर आगे की कार्रवाई की जा रही है।

