25 नवंबर के बाद क्या होगा? पुरी-वर्मा के टिकट कटने से उठे बड़े सवाल

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शकील अहमद सैफी
शकील अहमद सैफी

उत्तर प्रदेश से राज्यसभा चुनाव के लिए भारतीय जनता पार्टी (BJP) की ओर से जारी 8 उम्मीदवारों की सूची ने केंद्रीय मंत्रिमंडल में बड़े फेरबदल की सुगबुगाहट तेज कर दी है। पार्टी ने इस बार केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी और केंद्रीय राज्य मंत्री बीएल वर्मा को उम्मीदवार नहीं बनाया है।

दोनों नेताओं का मौजूदा राज्यसभा कार्यकाल 25 नवंबर 2026 को समाप्त हो रहा है। उच्च सदन के लिए दोबारा नामांकित न किए जाने के बाद अब दोनों मंत्रियों का मंत्रिमंडल से बाहर होना तय माना जा रहा है।

संसदीय नियमों के तहत मंत्री पद छोड़ना तय

संवैधानिक नियमों के अनुसार, किसी भी केंद्रीय मंत्री को पद पर बने रहने के लिए संसद के किसी एक सदन (लोकसभा या राज्यसभा) का सदस्य होना अनिवार्य है। यदि कोई मंत्री दोनों में से किसी भी सदन का सदस्य नहीं रहता, तो उसका कार्यकाल समाप्त होते ही पद छोड़ना अनिवार्य हो जाता है।

इससे पहले जून में भी इसी तरह की स्थिति देखने को मिली थी, जब बीजेपी ने रवनीत सिंह बिट्टू को राज्यसभा का टिकट नहीं दिया था, जबकि कार्यकाल पूरा होने के बाद जॉर्ज कुरियन ने पद से इस्तीफा दे दिया था। इन दोनों मंत्रियों का कार्यकाल 21 जून को समाप्त हुआ था। इसके बाद से ही मंत्रिमंडल में फेरबदल के कयास लगाए जा रहे थे।

2018 से शुरू हुआ था हरदीप पुरी का राज्यसभा सफर

हरदीप सिंह पुरी को पहली बार जनवरी 2018 में उत्तर प्रदेश से राज्यसभा भेजा गया था। यह सीट मनोहर पर्रिकर के इस्तीफे के बाद खाली हुई थी। इसके बाद 26 नवंबर 2020 को पार्टी ने उन्हें दोबारा उत्तर प्रदेश से ही निर्विरोध राज्यसभा भेजा।

केंद्र सरकार में पहले उन्हें राज्य मंत्री का प्रभार सौंपा गया और 2024 में उन्हें पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की पूरी जिम्मेदारी दी गई थी। अब टिकट कटने के साथ ही उनके संसदीय सफर का मौजूदा अध्याय 25 नवंबर को समाप्त हो जाएगा।

‘एक व्यक्ति-एक पद’ फॉर्मूला: पंकज चौधरी और हर्ष मल्होत्रा पर भी नजर

मंत्रिमंडल विस्तार की चर्चाओं के बीच दो अन्य मंत्रियों के भविष्य को लेकर भी राजनीतिक गलियारों में अटकलें हैं। मोदी कैबिनेट में शामिल पंकज चौधरी को उत्तर प्रदेश बीजेपी का अध्यक्ष बनाया गया है, वहीं हर्ष मल्होत्रा को हाल ही में दिल्ली बीजेपी की कमान सौंपी गई है।

बीजेपी संगठन की कार्यशैली ‘एक व्यक्ति-एक पद’ के सिद्धांत पर आधारित रही है। ऐसे में माना जा रहा है कि संगठन की जिम्मेदारी संभाल रहे इन दोनों नेताओं को भी केंद्रीय मंत्रिपरिषद से मुक्त किया जा सकता है। इसे लेकर अभी तक पार्टी या सरकार की ओर से कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।