85 मेडल की कहानी: भारत ने Asian Games में क्या-क्या कर दिखाया?

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शालिनी तिवारी
शालिनी तिवारी

जापान में आयोजित एशियन गेम्स 2026 (Asian Games 2026) भारतीय खेलों के लिए कई मायनों में ऐतिहासिक और यादगार साबित हुए हैं। भारत ने इस महाकुंभ में 21 गोल्ड, 27 सिल्वर और 37 ब्रॉन्ज मेडल समेत कुल 85 पदक जीतकर पदक तालिका में चौथा स्थान हासिल किया है।

भले ही कुल पदकों की संख्या पिछले एशियन गेम्स के मुकाबले कम रही हो, लेकिन इस बार भारतीय खिलाड़ियों—खासकर महिला एथलीटों—ने कई ऐसे कीर्तिमान स्थापित किए हैं जो दशकों तक याद रखे जाएंगे।

महिलाओं का दबदबा: 21 में से 11 गोल्ड बेटियों के नाम

इस बार भारतीय दल की सबसे बड़ी तस्वीर महिला खिलाड़ियों की कामयाबी रही। भारत को मिले 21 गोल्ड मेडल में से 11 महिलाओं ने जीते, जबकि 7 गोल्ड पुरुषों के खाते में आए। इसके अलावा टीम और मिक्स्ड स्पर्धाओं में भी भारत ने शानदार प्रदर्शन किया।

विद्या रामराज ने तोड़ा पीटी उषा का 42 साल पुराना रिकॉर्ड

एथलेटिक्स में भारत की सबसे बड़ी उपलब्धि विद्या रामराज के नाम रही। उन्होंने महिलाओं की 400 मीटर हर्डल्स स्पर्धा में ब्रॉन्ज मेडल जीता और साथ ही भारतीय एथलेटिक्स की उड़नपरी पीटी उषा का 42 साल पुराना ऐतिहासिक रिकॉर्ड भी तोड़ दिया। पीटी उषा ने यह रिकॉर्ड 1984 के लॉस एंजेलिस ओलंपिक में बनाया था। स्पोर्ट्स कमेंटेटर मनोज जोशी ने विद्या को ‘भारतीय एथलेटिक्स की नई सनसनी’ करार दिया है।

गोल्फ और पोल वॉल्ट में पहली बार भारत को मेडल

इन खेलों में भारत ने उन इवेंट्स में भी परचम लहराया, जहां पहले कभी सफलता नहीं मिली थी:

  • गोल्फ: महिला गोल्फर प्रनवी उर्स ने गोल्ड मेडल जीतकर इतिहास रच दिया। यह एशियन गेम्स के गोल्फ इवेंट में किसी भारतीय का पहला स्वर्ण पदक है।

  • पोल वॉल्ट: ब्रोनिका ऑलन गोवन ने पोल वॉल्ट में ब्रॉन्ज मेडल जीता। यह एशियन गेम्स के इतिहास में इस स्पर्धा में भारत का पहला पदक है।

  • ट्रैप शूटिंग: नीरु ढांडा ने महिला ट्रैप शूटिंग के व्यक्तिगत इवेंट में गोल्ड जीतकर इतिहास रचा। वह इस इवेंट में स्वर्ण जीतने वाली पहली भारतीय महिला निशानेबाज बनीं। नीरु ने इन खेलों में कुल दो गोल्ड और एक सिल्वर जीता।

मैराथन में 44 और हाई जंप में 56 साल बाद मेडल

भारतीय एथलेटिक्स ने दशकों से चले आ रहे पदकों के सूखे को भी खत्म किया।

  • सावन बरवाल ने मैराथन में सिल्वर मेडल जीता। भारत को एशियन गेम्स मैराथन में 1982 के बाद (44 साल बाद) मेडल मिला है।

  • सर्वेश कुशारे ने हाई जंप (ऊंची कूद) में भारत को 56 साल बाद मेडल दिलाया।

  • लॉन्ग डिस्टेंस रनिंग में गुलवीर सिंह ने शानदार प्रदर्शन करते हुए दो सिल्वर और एक ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किया।

हॉकी: 44 साल बाद महिला टीम को गोल्ड, ओलंपिक का टिकट पक्का

भारतीय महिला हॉकी टीम ने 44 साल बाद एशियन गेम्स में गोल्ड मेडल जीतकर इतिहास दोहराया। वहीं, पुरुष हॉकी टीम ने भी स्वर्ण पदक अपने नाम किया। इन दोनों ऐतिहासिक जीतों के साथ ही भारतीय पुरुष और महिला टीमों ने सीधे लॉस एंजेलिस ओलंपिक 2028 (LA 2028) के लिए क्वालीफाई कर लिया है।

कुश्ती और तीरंदाजी: वर्ल्ड चैंपियंस को चटाई धूल

आर्चरी (तीरंदाजी) में भारतीय महिला कंपाउंड टीम ने गोल्ड जीता। भारत ने आर्चरी के सिरमौर माने जाने वाले दक्षिण कोरिया को कड़ी चुनौती दी।

रेसलिंग (कुश्ती) में भारत ने 1962 के बाद पहली बार चार पहलवानों को फाइनल में पहुंचाया और 1978 के बाद पहली बार पुरुष फ्रीस्टाइल में दो गोल्ड मेडल जीते। ग्रीको-रोमन में भी 1962 के बाद पहली बार कोई भारतीय फाइनल तक पहुंचा। सुजीत कलकल का 9-2 से पिछड़ने के बाद 10-9 से जीत दर्ज करना भारतीय रेसलिंग की सबसे बड़ी हाइलाइट रही। बॉक्सिंग में भी भारत ने लवलीना समेत तीन गोल्ड मेडल जीते।

कुछ कमियां और ओलंपिक की उम्मीदें

85 मेडल और चौथे स्थान के बावजूद एथलेटिक्स और शूटिंग के कुछ इवेंट्स में भारत उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर पाया। हालांकि, गोल्फ, पोल वॉल्ट, मैराथन और महिला खेलों में मिले इस अभूतपूर्व प्रोत्साहन ने लॉस एंजेलिस ओलंपिक 2028 से पहले भारतीय खेलों की एक मजबूत बुनियाद तैयार कर दी है।