फ्लाईदुबई हमले के बाद दो पायलटों ने संभाला मोर्चा, नाम क्यों छिपे हैं?

इजरायल के तेल अवीव जा रही ‘फ्लाईदुबई’ (Flydubai) की फ्लाइट में हुई आतंकी घटना के तीन दिन बाद भी विमान को क्रैश होने से बचाने वाले दो पायलटों की पहचान सामने नहीं आ पाई है। कॉकपिट के अंदर मची अफरा-तफरी और विमान के तेजी से नीचे गिरने के दौरान इन दोनों अज्ञात पायलटों की मदद बेहद अहम साबित हुई थी।
एयरलाइन ने अभी तक उन्हें सिर्फ ‘ऑफ ड्यूटी क्रू मेंबर’ बताया है, जो विमान में आम यात्रियों की तरह सफर कर रहे थे।
‘डेडहेडिंग’ पर थे दोनों पायलट
विमान में आगे की तरफ बैठे एक यात्री डैनियल श्लिच्टर ने बताया कि वे दोनों लोग विमान में सफर कर रहे अतिरिक्त पायलटों की टीम का हिस्सा थे। खबरों के मुताबिक, इन पायलटों को तेल अवीव से दुबई की वापसी उड़ान का संचालन करना था। एविएशन की भाषा में क्रू मेंबर्स के इस तरह यात्री के रूप में सफर करने को ‘डेडहेडिंग’ (Deadheading) कहा जाता है।
कॉकपिट का दरवाजा खुलते ही संभाला कंट्रोल
प्रत्यक्षदर्शी यात्री श्लिच्टर के अनुसार, फ्लाइट में मौजूद यात्रियों को अचानक पता चला कि अंदर को-पायलट बार-बार कैप्टन स्मिथ मच्छार पर जानलेवा हमला कर रहा था। बुरी तरह घायल होने के बावजूद भारतीय कैप्टन किसी तरह कॉकपिट का दरवाजा खोलने में कामयाब रहे।
दरवाजा खुलते ही यात्री अंदर घुसे और उन्होंने हमलावर को काबू में कर लिया। ठीक उसी वक्त यात्रियों की भीड़ में से एक पायलट निकला और विमान का कंट्रोल अपने हाथ में लेने के लिए सीधा कॉकपिट में चला गया। दूसरा अज्ञात पायलट भी उसके पीछे अंदर गया और फिर दोनों ने कॉकपिट का दरवाजा बंद कर लिया।
कई मिनट तक विमान पर नहीं था कंट्रोल, रडर डैमेज
श्लिच्टर ने बताया कि कॉकपिट में हुई उठापटक के बाद विमान काफी तेजी से नीचे गिरा था। उस पर दोबारा कंट्रोल पाने में इन ‘मिस्ट्री पायलटों’ को कई मिनट का समय लग गया। इस पूरे संघर्ष के दौरान विमान को काफी नुकसान भी पहुंचा था, जिसमें उसके रडर का एक हिस्सा भी शामिल था।
विमान का नियंत्रण कुछ हद तक संभालने के बाद, किसी सुरक्षित एयरपोर्ट की तलाश के लिए क्रू की तरफ से ‘मेडे’ (Mayday) कॉल जारी की गई।
यात्रियों को सता रहा था हाईजैकिंग का डर
शुरुआत में विमान में मौजूद यात्री दहशत में थे क्योंकि वे उन दो पायलटों की पहचान और इरादों के बारे में पक्के तौर पर कुछ नहीं जानते थे। डैनियल श्लिच्टर ने बताया कि यात्रियों को यह डर सता रहा था कि कहीं ये दोनों विमान का रास्ता बदलकर उसे किसी अनजान जगह न ले जाएं।
करीब 45 मिनट की जद्दोजहद के बाद कॉकपिट से इन पायलटों ने घोषणा की कि फ्लाइट को सऊदी अरब के तबुक शहर में उतारा जाएगा। इसके बाद विमान की सुरक्षित इमरजेंसी लैंडिंग कराई गई। फ्लाइट में मौजूद 170 से ज्यादा लोगों की जान बचाने में अहम भूमिका निभाने के बावजूद ‘फ्लाईदुबई’ ने अब तक इन दोनों पायलटों के नाम सार्वजनिक नहीं किए हैं।

