कैप्टन स्मित मच्छार के अनोखे सरनेम का राज, हाथी से क्या है कनेक्शन?

smit
Saima Siddiqui
Saima Siddiqui

 फ्लाईदुबई (Flydubai) की फ्लाइट में को-पायलट के जानलेवा हमले के बावजूद 180 यात्रियों की जान बचाकर सुरक्षित इमरजेंसी लैंडिंग कराने वाले भारतीय कैप्टन स्मित मच्छार/माछर (Smit Machhar) दुनियाभर में छाए हुए हैं। उनकी अदम्य बहादुरी की हर कोई तारीफ कर रहा है। लेकिन इस बीच, लोगों के मन में कैप्टन स्मित के अनूठे सरनेम ‘मच्छार’ को लेकर काफी जिज्ञासा पैदा हो गई है।

गुजरात से ताल्लुक रखने वाले इस सरनेम का इतिहास, भाषाई उत्पत्ति और इसके पीछे की ऐतिहासिक कहानियां बेहद दिलचस्प हैं। आइए जानते हैं ‘मच्छार’ सरनेम का अर्थ और इसका इतिहास।

क्या है ‘मच्छार’ का अर्थ और यह सरनेम कैसे बना?

हिंदी और गुजराती भाषा में ‘मच्छार’ (Machhar) का शाब्दिक अर्थ ‘मच्छर’ (Mosquito) होता है। इतिहासकार और भाषाई विशेषज्ञों के अनुसार, इस सरनेम की उत्पत्ति के तीन मुख्य कारण हो सकते हैं:

  1. भाषाई बदलाव (मत्सर से मच्छार): प्राचीन गुजराती और संस्कृत में एक शब्द है ‘मत्सर’, जिसका अर्थ ‘ईर्ष्या’ या ‘अहंकार’ होता है। माना जाता है कि बोलचाल की भाषा में यही ‘मत्सर’ समय के साथ ‘मच्छर’ और फिर ‘मच्छार’ बन गया।

  2. भौगोलिक स्थिति: यह भी कहा जाता है कि जो लोग मच्छरों के अधिक प्रकोप वाले भौगोलिक इलाकों में रहते थे, उन्हें पहचान के तौर पर ‘मच्छार’ कहा जाने लगा।

  3. शारीरिक बनावट और उपनाम: कई बार दुबले-पतले शरीर वाले व्यक्ति को मजाकिया लहजे में दोस्तों के बीच ‘मच्छर’ कहा जाता है। पीढ़ियों के साथ, यह उपनाम (Nickname) स्थायी रूप से फैमिली सरनेम में तब्दील हो गया।

कहां से आए मच्छार और समुदाय से क्या है कनेक्शन?

मुंबई नगर निगम के पूर्व पार्षद और भाजपा गुजराती प्रकोष्ठ के पूर्व प्रमुख मंगल भानुशाली के अनुसार, कैप्टन स्मित मच्छार गुजराती ब्रह्मक्षत्रिय (Brahmakshatriya) समुदाय से ताल्लुक रखते हैं।

  • पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, यह समुदाय नागर ब्राह्मणों और क्षत्रियों का मिश्रण है।

  • गुजरात में सरनेम की दुनिया बहुत आकर्षक है। वहां के लोगों के नाम जानवरों और पक्षियों पर भी होते हैं, जैसे—हाथी, घोड़ा, मनकड़ (कीड़े से जुड़ा) और पोपट (तोता)।

पाकिस्तान के ‘मच्छर कॉलोनी’ से जुड़ा रोचक तथ्य: यह सरनेम सिर्फ भारत में नहीं, बल्कि पाकिस्तान में भी चर्चित है। कराची शहर की एक बहुत बड़ी रिहायशी बस्ती का नाम ‘मच्छर कॉलोनी’ है। हालांकि, इसका नाम मच्छरों पर नहीं, बल्कि सिंधी मछुआरों (Fishermen) पर पड़ा था। यहां बड़ी संख्या में लोहाना (Lohana) समुदाय के मछुआरे और व्यापारी रहते थे। जब वे व्यापार के लिए भारत आए, तो पहले मुंबई बसे और फिर गुजरात पहुंचे।

जब चर्चा में आया था ‘हाथी-मच्छर’ का ऐतिहासिक किस्सा

गुजरात के राजनीतिक और सामाजिक इतिहास में ‘मच्छार’ सरनेम से जुड़ा 1960 का एक वाकया बेहद मशहूर है।

  • उस समय देश के कद्दावर नेता और पूर्व सांसद जयसुखलाल हाथी (Jaisukhlal Hathi) का एक बड़ा स्वागत समारोह आयोजित किया गया था।

  • मंच पर उनका अभिनंदन जिस नामी-गिरामी शख्सियत ने किया, उनका सरनेम ‘मच्छार’ था।

  • इस अनूठे संयोग (हाथी और मच्छर) पर उस दौर की मीडिया और लोगों ने खूब चुटकी ली थी और मजाक में कहा था, “देखिए, अब हाथी का सम्मान मच्छर के हाथों हो रहा है।”

आज उसी मच्छार परिवार के बेटे, कैप्टन स्मित मच्छार ने अपने साहस और सूझबूझ से पूरी दुनिया में अपने नाम और सरनेम का डंका बजा दिया है।