ब्राह्मण, मुस्लिम, दलित और OBC चेहरे साथ? कांग्रेस टीम का संकेत क्या है?

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शालिनी तिवारी
शालिनी तिवारी

उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव 2027 से पहले कांग्रेस (Congress) ने अपने संगठन में अब तक का सबसे बड़ा और चौंकाने वाला फेरबदल किया है। पार्टी ने प्रदेश इकाई की कमान संभाल रहे अजय राय को हटाकर रामपुर खास से विधायक आराधना मिश्रा ‘मोना’ (Aradhana Mishra ‘Mona’) को नया प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया है।

इसके साथ ही सहारनपुर से सांसद इमरान मसूद (Imran Masood) को कार्यकारी अध्यक्ष, जबकि दलित चेहरे के रूप में राजेंद्र पाल गौतम (Rajendra Pal Gautam) को प्रदेश प्रभारी की जिम्मेदारी दी गई है। पार्टी की इस नई सांगठनिक संरचना को देखें तो साफ है—अध्यक्ष ब्राह्मण, प्रभारी दलित और कार्यकारी अध्यक्ष अल्पसंख्यक। इसके अलावा दो नए उपाध्यक्षों की नियुक्ति के जरिए पार्टी ने निषाद और दलित समाज को भी साधने का खाका खींचा है।

अजय राय की विदाई की असल वजह: अंदरूनी खटपट

वाराणसी से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ मजबूती से ताल ठोकने वाले अजय राय को हटाए जाने के पीछे संगठन के भीतर चल रही खींचतान को मुख्य वजह माना जा रहा है। सियासी गलियारों में चर्चा है कि प्रदेश प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम के साथ अजय राय के तालमेल में लगातार अड़चनें आ रही थीं।

हालांकि, फैसले के आधिकारिक ऐलान से कुछ ही देर पहले अजय राय ने इस्तीफे की खबरों को खारिज करते हुए इसे भाजपा और आरएसएस का दुष्प्रचार बताया था, लेकिन हाईकमान ने पहले ही बदलाव का मन बना लिया था।

आराधना मिश्रा पर दांव: ब्राह्मण और आधी आबादी को संदेश

आराधना मिश्रा को प्रदेश अध्यक्ष बनाकर कांग्रेस ने एक साथ कई सियासी निशाने साधे हैं:

  • प्रमोद तिवारी की सियासी विरासत: आराधना मिश्रा गांधी परिवार के बेहद करीबी और 9 बार के विधायक व मौजूदा राज्यसभा उपनेता प्रमोद तिवारी की बेटी हैं।

  • 12% ब्राह्मण वोट बैंक पर नजर: यूपी की 100 से अधिक विधानसभा सीटों पर ब्राह्मण मतदाता निर्णायक भूमिका निभाते हैं। सत्ताधारी दल से सवर्णों की कथित नाराजगी को भुनाने के लिए कांग्रेस ने यह मजबूत कार्ड खेला है।

  • महिला नेतृत्व: डॉ. रीता बहुगुणा जोशी के बाद आराधना मिश्रा यूपी कांग्रेस की कमान संभालने वाली दूसरी महिला नेता हैं। यह कदम महिला मतदाताओं को जोड़ने में अहम साबित हो सकता है।

  • अखिलेश यादव से बेहतर रिश्ते: आराधना मिश्रा और उनके पिता के समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव से मधुर संबंध हैं। 2027 में ‘इंडिया’ गठबंधन के तहत सीटों के बंटवारे में यह तालमेल बातचीत को सहज बनाएगा।

इमरान मसूद: पश्चिमी यूपी और मुस्लिम मतों की घेराबंदी

सहारनपुर के सांसद इमरान मसूद को कार्यकारी अध्यक्ष की जिम्मेदारी देकर कांग्रेस ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश और मुस्लिम मतदाताओं को सीधा संदेश दिया है:

  • ओवैसी फैक्टर की काट: AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी लगातार पश्चिमी यूपी की मुस्लिम-बहुल सीटों पर आक्रामक प्रचार कर रहे हैं। ऐसे में मसूद का प्रभाव वोटों के संभावित बिखराव को रोकने में मददगार होगा।

  • मजबूत जनाधार: मसूद परिवार का सहारनपुर, मुजफ्फरनगर और आसपास के जिलों में जमीनी प्रभाव है, जिससे सपा-कांग्रेस गठबंधन का कोर वोट बैंक एकजुट रह सकता है।

देवेंद्र महरा और आलोक प्रसाद: निषाद व दलित समीकरण

कांग्रेस ने सिर्फ शीर्ष पदों तक ही सामाजिक संतुलन सीमित नहीं रखा, बल्कि उपाध्यक्ष स्तर पर भी रणनीतिक नियुक्तियां की हैं:

  • देवेंद्र प्रसाद महरा (उपाध्यक्ष): निषाद समाज से आने वाले महरा का पूर्वांचल और बुंदेलखंड में खासा असर है। इनके जरिए कांग्रेस एनडीए के सहयोगी संजय निषाद (निषाद पार्टी) और सपा के निषाद वोट बैंक में सेंध लगाने की तैयारी में है।

  • आलोक प्रसाद (उपाध्यक्ष): दलित वर्ग से आने वाले आलोक प्रसाद को संगठन में आगे बढ़ाकर पार्टी ने यह साफ किया है कि वह बहुजन समाज के युवाओं को नेतृत्व देने के लिए प्रतिबद्ध है।

कुल मिलाकर, कांग्रेस ने समाजवादी पार्टी के ‘PDA’ (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) के साथ सवर्ण (ब्राह्मण) समीकरण को जोड़कर एक व्यापक सोशल इंजीनियरिंग मॉडल पेश किया है। अब देखना यह होगा कि यह नई सांगठनिक टीम धरातल पर पार्टी कार्यकर्ताओं में कितना नया जोश भर पाती है।