ताइवान के करीब अमेरिका की मिसाइल तैनाती, क्या है NMESIS सिस्टम?

इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में चीन की बढ़ती आक्रामकता के बीच अमेरिका ने एक बड़ा रणनीतिक दांव चला है। अमेरिका जापान (Japan) के उस द्वीप पर अपना एक सिग्नेचर एंटी-शिप मिसाइल सिस्टम (Anti-Ship Missile System) तैनात करने जा रहा है, जो ताइवान (Taiwan) के सबसे करीब है। यह अभूतपूर्व कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब बीजिंग और टोक्यो के बीच तनाव चरम पर है।
जापान के रक्षा मंत्रालय के अनुसार, अमेरिकी नौसेना का यह अचूक हथियार जिसे ‘नेवी-मरीन एक्सपीडिशनरी शिप इंटरडिक्शन सिस्टम’ (NMESIS) के रूप में जाना जाता है, इस महीने होने वाले ‘कीन स्वॉर्ड’ (Keen Sword) संयुक्त सैन्य अभ्यास के दौरान जापान के ओकिनावा प्रांत के योनागुनी द्वीप (Yonaguni Island) पर तैनात किया जाएगा।
चीन की आंखों में क्यों खटक रहा है योनागुनी द्वीप?
योनागुनी, जापान का सबसे पश्चिमी द्वीप है और इसकी भौगोलिक स्थिति ही चीन की सबसे बड़ी चिंता है।
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यह द्वीप ताइवान के पूर्वी तट से केवल 110 किमी (62 मील) की दूरी पर स्थित है।
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पिछले साल सितंबर में ‘रेसोल्यूट ड्रैगन’ अभ्यास के दौरान अमेरिका ने इस सिस्टम को इशिगाकी द्वीप पर तैनात किया था, जो ताइवान से 240 किमी दूर था। लेकिन अब ‘कीन स्वॉर्ड’ अभ्यास (19 से 29 अक्टूबर) के जरिए अमेरिका इसे ताइवान के बिल्कुल करीब (110 किमी) ले आया है।
क्या है NMESIS और यह कैसे बदल देगा युद्ध का रुख?
NMESIS (Navy-Marine Expeditionary Ship Interdiction System) अमेरिकी मरीन कॉर्प्स का एक ग्राउंड-बेस्ड, बिना क्रू (Uncrewed) वाला मोबाइल मिसाइल प्लेटफॉर्म है।
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मारक क्षमता: यह तटीय या द्वीप की स्थितियों से दुश्मन के युद्धपोतों को निशाना बनाकर डुबाने में सक्षम है। इसकी रेंज 185 किलोमीटर से अधिक है।
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खतरा: यदि ताइवान पर संघर्ष की स्थिति में इसे योनागुनी में तैनात किया जाता है, तो यह ‘जैमिंग-प्रतिरोधी’ सिस्टम ताइवान के पूर्व में काम करने की कोशिश कर रहे चीनी जहाजों को आसानी से तबाह कर सकता है। (इसी क्षेत्र में चीन अपनी नौसैनिक और कोस्टगार्ड गश्त बढ़ा रहा है)।
अमेरिका और जापान का ‘फर्स्ट आइलैंड चेन’ प्लान
अमेरिकी रक्षा विभाग (Pentagon) की रणनीति के अनुसार, वे ‘फर्स्ट आइलैंड चेन’ (First Island Chain) पर अपनी पकड़ मजबूत कर रहे हैं, ताकि चीन की किसी भी आक्रामकता को रोका जा सके। यह चेन कुरील द्वीप समूह से होकर जापान, ताइवान और फिलीपींस तक जाती है।
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इस अभ्यास के दौरान अमेरिका अपना MADIS (Marine Air Defence Integrated System) भी योनागुनी में पहली बार तैनात करेगा, जो दुश्मन के ड्रोन और लो-फ्लाइंग एयरक्राफ्ट को मार गिराने में माहिर है।
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वहीं, जापान खुद भी योनागुनी पर अपनी एयर डिफेंस मिसाइल यूनिट तैनात करने की तैयारी कर रहा है।
चीन की बौखलाहट और चेतावनी
जापान और अमेरिका की इस घेराबंदी से चीन बुरी तरह बौखला गया है। चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा: “जापान ‘रक्षा’ की आड़ में चीन के करीबी क्षेत्रों में मिसाइलों सहित आक्रामक हथियारों की तैनाती कर रहा है। यह सैन्य टकराव का एक ‘फॉरवर्ड फोर्ट्रेस’ (अग्रिम किला) बनाने का प्रयास है, जो क्षेत्रीय शांति और स्थिरता के लिए सीधा खतरा है।”
बता दें कि जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची (Sanae Takaichi) के हालिया बयानों से भी चीन नाराज है। ताकाइची ने कहा था कि चीन द्वारा ताइवान पर हमला या नौसैनिक नाकेबंदी जापान के लिए ‘अस्तित्व का संकट’ पैदा कर सकती है, जो एक सैन्य प्रतिक्रिया को उचित ठहराती है।

