इराक से अमेरिका की विदाई पर क्यों खुश है ईरान? IRGC ने बताया बड़ी जीत

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सैयद सरवर हुसैन - कंट्री हेड- ईरान
सैयद सरवर हुसैन – कंट्री हेड- ईरान

इराक में अमेरिकी सेना की 23 साल पुरानी सैन्य मौजूदगी का औपचारिक अंत हो गया है। अमेरिकी सैनिकों की पूर्ण वापसी के एक दिन बाद ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशन गार्ड्स कॉर्प्स (IRGC) ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए इसे वाशिंगटन की ऐतिहासिक हार और क्षेत्रीय जनता की संप्रभुता की बड़ी जीत करार दिया है।

IRGC ने गुरुवार को जारी एक विस्तृत बयान में कहा कि इराक से अमेरिकी बलों की बेदखली इस बात का संकेत है कि अब समूचे पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) और मुस्लिम जगत से अमेरिकी प्रभुत्व के खात्मे की शुरुआत हो चुकी है।

‘ताकत की भाषा बोलने वाला अमेरिका पीछे हटने पर मजबूर’

IRGC ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि दशकों से ताकत की भाषा का इस्तेमाल करने वाले अमेरिका को अंततः उस देश से हटने पर मजबूर होना पड़ा है, जिस पर उसने दो दशक से अधिक समय तक कब्जा बनाए रखा।

बयान के मुताबिक, “बिना किसी संदेह के, इराक से अमेरिका का निष्कासन पूरे पश्चिम एशिया और व्यापक मुस्लिम जगत से उनकी अंतिम विदाई का पहला चरण है। यह बड़ी जीत इराक के राष्ट्रीय संकल्प, प्रतिरोधक आंदोलनों के संघर्ष, जनसमर्थन और इराकी सरकार के प्रभावी कदमों का नतीजा है।” ईरानी बल ने इसे इराकी जनता के अटूट साहस की जीत बताते हुए उन्हें बधाई दी।

‘वार्ता या रियायत नहीं, जनता के संघर्ष से मिली आजादी’

IRGC ने स्पष्ट किया कि अमेरिकी सैनिकों की वापसी किसी कूटनीतिक बातचीत या अमेरिकी रियायत का परिणाम नहीं है, बल्कि यह अपने रुख पर डटे रहने वाले इराकियों के संघर्ष और बलिदान का परिणाम है।

बयान में कहा गया, “अमेरिका किसी समझौते के तहत नहीं गया, बल्कि उन लोगों के दृढ़ संकल्प और शहीदों के खून की वजह से गया जिन्होंने कभी हार नहीं मानी। आज दो दशकों के विनाश के मलबे के बीच एक संप्रभु और स्वतंत्र इराक अपनी नई सुबह देख रहा है।”

सुलेमानी और अल-मुहंदिस की शहादत का जिक्र

IRGC ने अमेरिकी वापसी को अपने शीर्ष कमांडरों के बलिदान से भी जोड़ा। बयान में कहा गया कि यह कदम वर्ष 2020 में बगदाद में अमेरिकी हवाई हमले में मारे गए ईरान के शीर्ष कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल कासिम सुलेमानी और इराक के पॉपुलर मोबिलाइजेशन यूनिट्स (PMU) के डिप्टी कमांडर अबू महदी अल-मुहंदिस के खून का बदला लेने की दिशा में पहला कदम है।

IRGC ने दोहराया कि क्षेत्र की सुरक्षा की जिम्मेदारी सिर्फ यहां के देशों की होनी चाहिए, क्योंकि दो दशकों की अमेरिकी मौजूदगी ने सुरक्षा देने के बजाय अस्थिरता और आतंकवाद को ही बढ़ावा दिया।

4 ट्रिलियन डॉलर का नुकसान और जनआक्रोश

अमेरिकी हस्तक्षेप के नुकसान का आकलन करते हुए IRGC ने कहा कि 20 साल के सैन्य दखल, भारी आर्थिक खर्च (लगभग 4 ट्रिलियन डॉलर) और हजारों सैनिकों की मौतों के बाद अमेरिका को गंभीर जनआक्रोश के बीच अपमानजनक तरीके से बाहर होना पड़ा है।

उल्लेखनीय है कि अमेरिका ने मार्च 2003 में सामूहिक विनाश के हथियारों (WMD) की मौजूदगी के दावों के आधार पर सद्दाम हुसैन की सत्ता को उखाड़ फेंकने के लिए इराक पर हमला किया था। हालांकि 2011 में सेना की आंशिक वापसी हुई थी, लेकिन 2014 में आतंकी संगठन दाएश (ISIS) के खिलाफ लड़ाई के नाम पर अमेरिकी सेना ने दोबारा तैनाती की थी।

अब पूरी तरह से अमेरिकी वापसी के बाद इराक में ‘राष्ट्रीय संप्रभुता दिवस’ के रूप में जश्न का माहौल है, वहीं IRGC ने भविष्य में संभावित अमेरिकी साजिशों के खिलाफ इराकी सरकार और प्रतिरोध बलों को सतर्क रहने का आह्वान किया है।