आत्मघाती हमले के पीछे कौन? ‘फितना अल-हिंदुस्तान’ और TTP को समझिए

पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के डेरा इस्माइल खान (DI Khan) में एक बार फिर बड़ा आतंकी हमला हुआ है। दराजिंदा के पास स्थित ‘अमन मेला’ पुलिस चेकपोस्ट को निशाना बनाते हुए विस्फोटकों से भरी एक गाड़ी में धमाका किया गया। इस भीषण आत्मघाती हमले में कम से कम 11 लोगों की मौत हो गई और 30 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। मरने वालों में पुलिसकर्मियों के अलावा आठ पुरुष, दो महिलाएं और एक बच्चा भी शामिल है।
प्रतिबंधित आतंकी संगठन ‘तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान’ (TTP) ने इस आत्मघाती हमले की जिम्मेदारी ली है। यह घटना खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान सीमा के नजदीक डीआई खान-क्वेटा मार्ग पर घटी है।
रेस्क्यू ऑपरेशन जारी, घायलों की हालत गंभीर
‘रेस्क्यू 1122’ के अधिकारियों के अनुसार, धमाके के तुरंत बाद राहत और बचाव कार्य शुरू कर दिया गया। 25 से अधिक रेस्क्यू कर्मी, छह एंबुलेंस और दमकल वाहन घटनास्थल पर मलबे से पीड़ितों को निकालने में जुटे हैं। गंभीर रूप से घायल 18 लोगों को दराजिंदा और मुफ्ती महमूद अस्पताल भेजा गया है। हालांकि, इलाके में मोबाइल नेटवर्क ठप होने से बचाव कार्य में दिक्कतें आ रही हैं।
गवर्नर का बयान और ‘फ़ितना अल-हिंदुस्तान’ का जिक्र
हमले की निंदा करते हुए खैबर पख्तूनख्वा के गवर्नर फैसल करीम कुंडी ने इसे “फ़ितना अल-हिंदुस्तान ख्वारिज” की नापाक साजिश करार दिया। पाकिस्तान सरकार की ओर से आए इस बयान ने एक बार फिर उस नई सुरक्षा शब्दावली (Security Terminology) की ओर ध्यान खींचा है, जिसका इस्तेमाल पाकिस्तानी प्रशासन पिछले कुछ समय से लगातार कर रहा है।
क्या है ‘फ़ितना अल-हिंदुस्तान’ और ‘फ़ितना अल-ख़वारिज’?
पाकिस्तानी सरकार और सेना ने मई 2025 से अपने आधिकारिक संवाद में विद्रोही और आतंकी संगठनों के लिए नई शब्दावली का इस्तेमाल शुरू किया है।
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फ़ितना अल-हिंदुस्तान (Fitna al-Hindustan): यह कोई स्वतंत्र आतंकी संगठन नहीं है, बल्कि पाकिस्तानी प्रशासन द्वारा बलूचिस्तान में सक्रिय विद्रोही समूहों के लिए गढ़ा गया एक ‘लेबल’ है। अरबी शब्द ‘फ़ितना’ का अर्थ फसाद या अशांति होता है। पाकिस्तान इस शब्द का इस्तेमाल कर बिना किसी पुख्ता सबूत के बलूच विद्रोहियों को भारत (हिंदुस्तान) के कथित समर्थन से जोड़ने का नैरेटिव गढ़ने की कोशिश करता है।
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फ़ितना अल-ख़वारिज (Fitna al-Khawarij): यह लेबल पाकिस्तान ने मुख्य रूप से ‘तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान’ (TTP) के लिए तैयार किया है। ‘ख़वारिज’ शब्द का ऐतिहासिक जुड़ाव प्रारंभिक इस्लामी इतिहास से है, और इसका इस्तेमाल कर पाकिस्तान TTP को धार्मिक-राजनीतिक रूप से अलग-थलग करने की रणनीति अपना रहा है।
ग़ज़वा-ए-हिंद और फ़ितना अल-हिंदुस्तान में अंतर
अक्सर लोग ‘ग़ज़वा-ए-हिंद’ और ‘फ़ितना अल-हिंदुस्तान’ को एक ही समझ लेते हैं, लेकिन दोनों में बड़ा फर्क है। ‘ग़ज़वा-ए-हिंद’ एक धार्मिक नैरेटिव है, जबकि ‘फ़ितना अल-हिंदुस्तान’ आधुनिक पाकिस्तान राज्य की काउंटर-टेररिज्म (Counter-terrorism) संचार रणनीति का हिस्सा है, जिसका एकमात्र मकसद अपनी आंतरिक सुरक्षा विफलताओं का ठीकरा भारत पर फोड़ना है।
पाकिस्तान के इस ‘क्लासिफिकेशन फ्रेमवर्क’ से यह स्पष्ट है कि वह अपने देश में पल रहे आतंकवाद (TTP) और बलूचिस्तान के आंतरिक विद्रोह से निपटने के लिए अब नई राजनीतिक शब्दावलियों का सहारा ले रहा है। बम निरोधक दस्ता फिलहाल डेरा इस्माइल खान में हुए हमले की प्रकृति और विस्फोटकों की जांच कर रहा है।

