Tehri Election 2027: घनसाली से धनौल्टी तक, 6 सीटों का चुनावी गणित समझें

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राघवेन्द्र मिश्रा
राघवेन्द्र मिश्रा

उत्तराखंड में 2027 में होने वाले विधानसभा चुनावों को लेकर पर्वतीय क्षेत्रों में सियासी सरगर्मियां तेज हो गई हैं। गढ़वाल मंडल की राजनीति का ऐतिहासिक शक्ति केंद्र माने जाने वाले टिहरी गढ़वाल जिले पर सभी राजनीतिक दलों की विशेष नजर है। राजशाही के दौर से लेकर प्रजामंडल आंदोलनों और टिहरी बांध विस्थापन की राजनीतिक चेतना तक, इस जिले का जनादेश देहरादून की सत्ता तय करने में हमेशा अहम रहा है।

भौगोलिक और सामाजिक रूप से विविध टिहरी गढ़वाल में विधानसभा की कुल 6 सीटें—घनसाली (SC), देवप्रयाग, नरेंद्रनगर, प्रतापनगर, टिहरी और धनौल्टी—आती हैं। 2022 के विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने यहां की 6 में से 5 सीटों पर जीत दर्ज की थी, जबकि कांग्रेस केवल प्रतापनगर सीट ही अपने नाम कर सकी थी।

टिहरी गढ़वाल: आबादी, साक्षरता और धार्मिक आंकड़े

जिले की जनसांख्यिकी और सामाजिक संरचना चुनावी दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण है:

  • जनसंख्या व साक्षरता: जिले की कुल आबादी 6,18,931 है, जिसमें 2,97,986 पुरुष और 3,20,945 महिलाएं शामिल हैं। जिले की कुल साक्षरता दर 76.36 प्रतिशत है। पुरुषों में साक्षरता दर 89.76 प्रतिशत और महिलाओं में 64.28 प्रतिशत दर्ज है।

  • धार्मिक संरचना: जिले में हिंदू आबादी 98.53 प्रतिशत है। इसके अलावा मुस्लिम समुदाय की आबादी 1.19 प्रतिशत, ईसाई 0.11 प्रतिशत, सिख 0.05 प्रतिशत और अन्य वर्ग 0.28 प्रतिशत हैं।

चुनावी रण के मुख्य स्थानीय मुद्दे

टिहरी गढ़वाल के चुनावी इतिहास में स्थानीय और पर्वतीय सरोकारों की भूमिका सबसे निर्णायक रहती है। आगामी चुनाव में भी राजनीतिक दलों को इन प्रमुख मुद्दों पर जनता के सवालों का सामना करना होगा:

  • टिहरी बांध विस्थापन और मुआवजा: बांध प्रभावितों के पुनर्वास और लंबे समय से लंबित मुआवजे का मामला अब भी संवेदनशील है।

  • पहाड़ों से पलायन और रोजगार: युवाओं के लिए स्थानीय स्तर पर रोजगार की कमी और गांवों से खाली होते घरों का संकट।

  • स्वास्थ्य और शिक्षा: दुर्गम पर्वतीय अंचलों में स्वास्थ्य सेवाओं और उच्च शिक्षा के बुनियादी ढांचे का अभाव।

  • भू-कानून और पर्यटन: राज्य में सख्त भू-कानून की मांग के साथ-साथ टिहरी झील आधारित साहसिक पर्यटन और स्थानीय स्वरोजगार के अवसर।

टिहरी की सभी 6 सीटों का राजनीतिक और चुनावी ब्यौरा

1. घनसाली (SC): सुरक्षित सीट पर BJP का कब्जा अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित घनसाली विधानसभा सीट पर 2022 के चुनाव में भाजपा के शक्ति लाल शाह ने जीत दर्ज की। उन्होंने 20,949 वोट हासिल कर कांग्रेस के धनी लाल शाह (10,664 वोट) को 10,285 मतों के बड़े अंतर से हराया। इस सीट पर निर्दलीय प्रत्याशी भीम लाल आर्य 9,204 वोट पाकर तीसरे स्थान पर रहे थे।

2. देवप्रयाग: त्रिकोणीय मुकाबले में बची सीट अलकनंदा और भागीरथी के पावन संगम स्थल देवप्रयाग में 2022 का मुकाबला बेहद दिलचस्प रहा था। भाजपा प्रत्याशी विनोद कंडारी ने 17,330 वोट पाकर अपनी सीट बचाई। उन्होंने उत्तराखंड क्रांति दल (UKD) के वरिष्ठ नेता दिवाकर भट्ट (14,742 वोट) और कांग्रेस के मंत्री प्रसाद नैथानी (13,600+ वोट) को कड़े संघर्ष में पराजित किया।

3. नरेंद्रनगर: महज 1,798 वोटों का फैसला नरेंद्रनगर सीट पर कड़ा राजनीतिक मुकाबला देखने को मिला था। भाजपा के वरिष्ठ नेता सुबोध उनियाल ने 27,430 वोट हासिल कर कांग्रेस के ओम गोपाल रावत (25,632 वोट) को मात्र 1,798 मतों के अंतर से शिकस्त दी थी। UKD के सरदार सिंह पुंडीर को यहां 2,187 वोट मिले थे।

4. प्रतापनगर: जिले में कांग्रेस का अकेला गढ़ 2022 के चुनाव में प्रतापनगर ही टिहरी गढ़वाल की एकमात्र ऐसी सीट रही जहां कांग्रेस को जीत मिली। कांग्रेस उम्मीदवार विक्रम सिंह नेगी ने 19,131 वोट हासिल कर भाजपा के विजय सिंह पंवार (16,790 वोट) को 2,341 मतों से हराया। निर्दलीय पंकज व्यास ने यहां 4,700 वोट हासिल किए थे।

5. टिहरी: 951 वोटों के सबसे कम अंतर की जंग जिला मुख्यालय की इस मुख्य सीट पर जिले का सबसे नजदीकी मुकाबला दर्ज किया गया था। कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुए किशोर उपाध्याय ने 19,802 वोट प्राप्त कर उत्तराखंड जनएकता पार्टी (UJP) के दिनेश धनै (18,851 वोट) को सिर्फ 951 वोटों से हराया था। वहीं, कांग्रेस उम्मीदवार धन सिंह नेगी 6,385 वोट ही जुटा सके थे।

6. धनौल्टी: पर्यटन क्षेत्र में खिला था कमल पर्यटन के लिहाज से मशहूर धनौल्टी विधानसभा सीट पर भाजपा के प्रीतम सिंह पंवार ने 22,827 वोट हासिल कर जीत दर्ज की थी। उन्होंने कांग्रेस के जोत सिंह बिष्ट (14,000+ वोट) को हराया था, जबकि निर्दलीय महावीर सिंह रांगड़ 9,000 से अधिक वोट लेकर मुकाबले को त्रिकोणीय बनाने में जुटे थे।

टिहरी गढ़वाल में भाजपा जहां अपनी 5 सीटों की बढ़त को दोहराने के लक्ष्य के साथ मैदान में उतरेगी, वहीं कांग्रेस के सामने प्रतापनगर से आगे बढ़कर खोई हुई सीटों पर वापसी करने की चुनौती रहेगी। इसके साथ ही क्षेत्रीय दल और निर्दलीय प्रत्याशियों का प्रदर्शन भी इस पर्वतीय जिले के चुनावी नतीजों में बड़ा उलटफेर करने की क्षमता रखता है।