राजनीतिक नर्सरी पौड़ी गढ़वाल में 2027 की तैयारी, 6 सीटों पर क्या बदला?

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Saima Siddiqui
Saima Siddiqui

उत्तराखंड विधानसभा चुनाव 2027 की सुगबुगाहट के साथ ही राज्य की सत्ता और सियासत के सबसे बड़े केंद्र पौड़ी गढ़वाल में राजनीतिक दलों ने अपनी गोटियां बिछानी शुरू कर दी हैं। देश को राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA), चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) और प्रदेश को कई मुख्यमंत्री देने वाली पौड़ी की माटी को राज्य की ‘राजनीतिक नर्सरी’ और प्रशासनिक शक्ति का सिरमौर माना जाता है।

लैंसडाउन की वादियों से लेकर श्रीनगर के शैक्षणिक हब, कोटद्वार के मैदानी प्रवेश द्वार और चौबट्टाखाल, थलीसैंण, पौड़ी व यमकेश्वर के सुदूर ग्रामीण अंचलों तक फैली जनता का हर सियासी फैसला देहरादून की सत्ता के समीकरणों को सीधे तौर पर तय करता है।

पौड़ी की 6 सीटें और चुनावी रण के मुख्य मुद्दे

पौड़ी गढ़वाल जिले में विधानसभा की कुल 6 सीटें—पौड़ी, श्रीनगर, कोटद्वार, चौबट्टाखाल, यमकेश्वर और लैंसडाउन—आती हैं। इस पर्वतीय जिले में मुख्य मुकाबला पारंपरिक रूप से भारतीय जनता पार्टी (BJP) और कांग्रेस (INC) के बीच सीधा रहता है, जबकि स्थानीय मुद्दे और निर्दलीय उम्मीदवार भी चुनावी गणित को प्रभावित करते हैं।

यहाँ के सियासी समर में जीत-हार तय करने के लिए कई अहम मुद्दे केंद्र में हैं:

  • पलायन और खाली होते गांव: पहाड़ों से पलायन की मार और ‘भूतिया गांव’ (Ghost Villages) की समस्या यहां का सबसे संवेदनशील चुनावी विषय है।

  • सख्त भू-कानून और रोजगार: राज्य में सख्त भू-कानून की मांग और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसरों की कमी।

  • स्वास्थ्य और प्रशासनिक वजूद: कोटद्वार और श्रीनगर में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति को सुदृढ़ करना और जिला मुख्यालय पौड़ी के प्रशासनिक वजूद को पुनर्जीवित करने की मांग।

  • बुनियादी अवसंरचना व जंगली जानवरों का आतंक: जंगली जानवरों के बढ़ते हमलों से सुरक्षा, उच्च शिक्षा के बेहतर साधन और सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क कनेक्टिविटी।

जनसांख्यिकी और सामाजिक ताना-बाना

चुनावी समीकरणों को समझने के लिए पर्वतीय जिलों की सामाजिक और जनसांख्यिकीय संरचना भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

2011 की जनगणना के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, पड़ोसी रुद्रप्रयाग जिले की कुल आबादी 2,59,648 दर्ज है। इसमें पुरुष आबादी 1,31,125 (50.5%) और महिला आबादी 1,28,523 (49.5%) है। जिले की औसत साक्षरता दर 79.83 प्रतिशत है, जिसमें पुरुष साक्षरता 91.61 प्रतिशत और महिला साक्षरता दर 68.05 प्रतिशत दर्ज की गई है।

वहीं, सीमांत चंपावत जिले की धार्मिक आबादी के आंकड़ों पर नजर डालें तो यहाँ हिंदू आबादी 96.12 प्रतिशत और मुस्लिम आबादी 3.35 प्रतिशत है। इसके अलावा ईसाई समुदाय 0.34 प्रतिशत, सिख 0.13 प्रतिशत और अन्य वर्ग 0.06 प्रतिशत हैं।

2022 के चुनाव परिणाम: चंपावत और लोहाघाट का समीकरण

पर्वतीय विधानसभा क्षेत्रों में 2022 के आम चुनाव के दौरान दिलचस्प चुनावी मुकाबले देखने को मिले थे:

1. चंपावत विधानसभा सीट (55) अल्मोड़ा लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली इस सामान्य सीट पर 2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के कैलाश चंद्र गहटोरी ने 32,547 वोट हासिल कर कांग्रेस के हेमेश खर्कवाल (27,243 वोट) को हराया था। आम आदमी पार्टी के मदन सिंह महर को 2,580 वोट मिले थे।

इस सीट का राजनीतिक महत्व तब और बढ़ गया जब कैलाश चंद्र गहटोरी ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के लिए अपनी विधायकी से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद हुए उपचुनाव में मुख्यमंत्री धामी ने यहाँ ऐतिहासिक रिकॉर्ड अंतर से जीत दर्ज कर विधानसभा में प्रवेश किया था।

2. लोहाघाट विधानसभा सीट (54) नेपाल सीमा से सटी चंपावत जिले की सबसे बड़ी विधानसभा सीट लोहाघाट पर 2022 में कांग्रेस ने जीत दर्ज की थी। कांग्रेस उम्मीदवार खुशाल सिंह अधिकारी ने 32,950 वोट पाकर भाजपा के दो बार के तत्कालीन विधायक पूरन सिंह फर्त्याल (26,912 वोट) को लगभग 6,038 मतों के अंतर से पराजित किया। इस सीट पर निर्दलीय प्रत्याशी हिमेश चंद्र कलखुरिया को 1,247 वोट मिले थे।

2027 के महामुकाबले की ओर बढ़ते उत्तराखंड में पौड़ी गढ़वाल की बौद्धिक और प्रशासनिक साख के साथ-साथ इन पर्वतीय क्षेत्रों के स्थानीय मुद्दे राजनीतिक दलों के चुनावी घोषणापत्रों की दिशा तय करेंगे।